आस्था, परंपरा और प्रसाद का अद्भुत संगम, बौंसी का मधुसूदन मंदिर बना श्रद्धा का महातीर्थ

बांका जिले के बौंसी प्रखंड स्थित प्राचीन मधुसूदन मंदिर इन दिनों आस्था और भक्ति का जीवंत केंद्र बना हुआ है.
बौंसी. बांका जिले के बौंसी प्रखंड स्थित प्राचीन मधुसूदन मंदिर इन दिनों आस्था और भक्ति का जीवंत केंद्र बना हुआ है. मकर संक्रांति के पावन अवसर से शुरू होकर एक माह तक भगवान मधुसूदन को खिचड़ी का महाभोग अर्पित किया जाता है, जिसे ग्रहण करने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है. अब तक 80 हजार से अधिक श्रद्धालु पंक्तिबद्ध होकर खिचड़ी प्रसाद ग्रहण कर चुके हैं. माना जाता है कि बौंसी क्षेत्र में भगवान मधुसूदन राजा की तरह विराजमान हैं और यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है. यही कारण है कि न केवल स्थानीय लोग, बल्कि जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक पदाधिकारी और अन्य जिलों से आए श्रद्धालु भी मंदिर में शीश नवाने पहुंचते हैं.
वर्ष में पांच बार प्रजा को दर्शन देते हैं भगवान
मधुसूदन मंदिर की परंपराएं इसे अन्य मंदिरों से विशिष्ट बनाती हैं. पूरे वर्ष में पांच बार भगवान को मंदिर से बाहर लाया जाता है, ताकि वे अपनी प्रजा को प्रत्यक्ष दर्शन दे सकें. विशेष रूप से रथ यात्रा और मकर संक्रांति के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें पूरा बौंसी प्रखंड भक्ति के रंग में रंग जाता है.13 फरवरी के बाद बदलेगा भोग का स्वरूप
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, 13 फरवरी के बाद पूरे वर्ष भगवान को दिन में चावल, दाल और सब्जी का भोग लगाया जायेगा. वहीं, विभिन्न पर्वों और विशेष तिथियों पर छप्पन भोग अर्पित करने की परंपरा भी निभाई जाती है, जो मंदिर की धार्मिक गरिमा को और बढ़ाती है.श्रद्धालुओं के लिए अनुशासन और सेवा की मिसाल
सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु अनुशासन के साथ लंबी कतारों में लगकर प्रसाद ग्रहण करते हैं. मंदिर परिसर में सेवा, सुरक्षा और व्यवस्था की सराहना हर कोई कर रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मधुसूदन मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सामाजिक समरसता का प्रतीक है. बौंसी का मधुसूदन मंदिर आज भी अपनी प्राचीन परंपराओं और जनआस्था के बल पर श्रद्धालुओं के हृदय में विशेष स्थान बनाए हुए है, जहां भोग मात्र भोजन नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा का प्रसाद है.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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