सिंचाई डांड़ पर अतिक्रमण से हो हजार एकड़ खेत रह गये प्यासे
Updated at : 03 Feb 2026 6:43 PM (IST)
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विकास की अंधी दौड़ और व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण दशकों पुराने कचमचिया-पंजवारा सिंचाई डांड़ का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है.
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भू-माफिया और निर्माण की अंधी दौड़ में मिट रहा अस्तित्व
पंजवारा. विकास की अंधी दौड़ और व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण दशकों पुराने कचमचिया-पंजवारा सिंचाई डांड़ का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है. खेतों की प्यास बुझाने वाली इस जीवन रेखा पर कुछ रसूखदारों और स्थानीय लोगों द्वारा मिट्टी भरकर कच्ची सड़क का निर्माण किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश है.मकानों तक पहुंचने के लिए डांड़ को बनाया सड़क
पंजवारा बाजार के समीप संकट मोचन मंदिर के पास से गुजरने वाली इस डांड़ के किनारे पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मकानों का निर्माण हुआ है. इन नवनिर्मित मकानों तक रास्ता बनाने के लिए लोगों ने डांड़ को ही मिट्टी और कूड़े-कचरे से भरना शुरू कर दिया है. आश्चर्य की बात यह है कि बिना पुलिया निर्माण के ही डांड़ के ऊपर कच्ची सड़क बिछाई जा रही है, जिससे पानी का प्रवाह पूरी तरह बाधित हो गया है.संकट में दो हजार एकड़ भूमि की सिंचाई
स्थानीय किसानों के अनुसार, विक्रमपुर-पंजवारा सिंचाई डांड़ से लगभग दो हजार एकड़ उपजाऊ भूमि की सिंचाई होती थी. डांड़ के भर जाने से अब खेतों तक पानी पहुंचना असंभव हो गया है. ग्रामीणों ने बताया कि यदि जल्द ही अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो आने वाले समय में क्षेत्र की खेती पूरी तरह ठप हो जायेगी.
इन ग्रामीणों ने उठाई आवाज
अतिक्रमण के खिलाफ सुबोध यादव, वाल्मीकि भगत, शैलेंद्र कुमार भगत, गुड्डू यादव, विकास कुमार यादव, महेश यादव, राजेश कुमार भगत, बबलू कुमार भगत, शंकर भगत, अनुपरेखा देवी, राकेश कुमार, भगत, संतोष कुमार सहित दर्जनों किसानों ने प्रशासन से डांड़ को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है.मामला गंभीर है, डांड़ अतिक्रमण की लिखित शिकायत प्राप्त हुई है, पंजवारा में अतिक्रमण का मामला संज्ञान में है. बांध की भूमि पर अतिक्रमण को लेकर नोटिस जारी किया गया है. सड़क किनारे अमीन से मापी कराकर जल्द ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जायेगी.
विकास कुमार, सीओ, बाराहाटB
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