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खाद की किल्लत से परेशान, ऊंचे दामों पर खरीदने को मजबूर किसान

खाद की किल्लत से परेशान, ऊंचे दामों पर खरीदने को मजबूर किसान

रबी फसल के पीक सीजन में ब्लैक में खाद खरीदना अन्नदाताओं की लाचारी

गौरव कश्यप, पंजवारा

रबी फसलों की बुवाई व सिंचाई के इस महत्वपूर्ण समय में क्षेत्र के किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. गेहूं, मक्का व दलहन की खेती के लिए खाद की भारी किल्लत देखी जा रही है. किसान खेतों में पहली सिंचाई के बाद खाद डालने के लिए परेशान हैं, लेकिन उन्हें सरकारी दर पर उर्वरक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है.

कालाबाजारी व ऊंचे दामों की मार से अन्नदाता परेशान

किसानों का आरोप है कि बाजार में खाद का कृत्रिम अभाव पैदा कर दिया गया है. खाद का स्टॉक कर लिया जाता है व बाद में उसे ऊंचे दामों पर बेचा जाता है. मजबूरी में किसानों को पैरवी लगाकर या ब्लैक में महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है. इससे न केवल खेती की लागत बढ़ रही है, बल्कि खाद मिलने में देरी के कारण फसल चक्र भी प्रभावित हो रहा है, जिसका सीधा असर पैदावार पर पड़ेगा.

सिर्फ कागजों तक सीमित बैठक

स्थानीय किसानों व प्रतिनिधियों का कहना है कि हर साल खेती के सीजन में उर्वरक निगरानी कमेटी की बैठकें तो होती हैं, लेकिन धरातल पर उसका कोई असर नहीं दिखता. प्रशासन व जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा छोटे किसानों को भुगतना पड़ रहा है.

कहते हैं स्थानीय किसान

सुनील कुमार यादव ने बताया कि बाजार में महंगे दाम देने के बावजूद गुणवत्तापूर्ण खाद-बीज नहीं मिल पा रहा है. केदार मांझी ने कहा कि प्रशासन को दागी दुकानदार चिन्हित कर खाद वितरण की प्राथमिकता तय करनी चाहिए. मिथिलेश कुमार मंडल ने बताया कि पंजवारा में यह समस्या हर साल की है और शिकायत के बाद भी समाधान नहीं निकलता. विश्वनाथ मंडल ने बताया कि अन्नदाता कहे जाने वाले किसान आज मनमानी रवैये का शिकार हैं.

दुकानदार मांगे अधिक कीमत तो विभाग से करें शिकायत

प्रखंड कृषि पदाधिकारी इंद्रदेव दास ने कहा कि सभी दुकानदारों को सरकारी दर पर खाद बेचने और पॉश मशीन में एंट्री के बाद ही खाद देने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने किसानों से अपील की है कि खाद खरीदते समय दुकानदार से पक्का बिल जरूर मांगें. यदि दुकानदार बिल देने से मना करे या अधिक कीमत वसूले, तो तुरंत इसकी शिकायत विभाग से करें. विभाग की ओर से कालाबाजारी रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं.

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