बांका में दहेज के लिए विवाहिता की हत्या मामले में पति और सास को उम्रकैद

Edited by AMIT KR SINHA
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बांका व्यवहार न्यायालय.

Dowry Death Case : दहेज की मांग पूरी नहीं हुई तो पहले धमकी दी गई और फिर अगले ही दिन विवाहिता की मौत की खबर आ गई. अब इस चर्चित Dowry Death Case में बांका की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पति और सास को उम्रकैद की सजा सुनाई है.

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बांका से मदन कुमार की रिपोर्ट

Dowry Death Case : बांका व्यवहार न्यायालय ने दहेज हत्या के एक महत्वपूर्ण मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी पति और उसकी मां को उम्रकैद की सजा सुनाई है. एडीजे-2 सूर्यकांत तिवारी की अदालत ने सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया. यह मामला शंभुगंज थाना क्षेत्र के खपड़ा करसोप गांव की विवाहिता नेहा कुमारी की मौत से जुड़ा है, जिसने उस समय पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी.

छह साल की शादी, लेकिन खत्म नहीं हुई दहेज की मांग

अभियोजन पक्ष के अनुसार नेहा कुमारी की शादी लगभग छह वर्ष पूर्व शंभुगंज थाना क्षेत्र के खपड़ा करसोप गांव निवासी अमित कुमार सिंह के साथ हुई थी. शादी के बाद से ही नेहा पर मायके से 50 हजार रुपये लाने का दबाव बनाया जाता था. आरोप है कि पति अमित कुमार सिंह और उसकी मां रेणु देवी दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर उसे लगातार प्रताड़ित करते थे.

परिजनों के अनुसार विवाहिता को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जाता था. दहेज की मांग को लेकर चल रहा यह विवाद धीरे-धीरे गंभीर रूप लेता गया.

मौत से एक दिन पहले मिली थी धमकी

मृतका की मां बबीता देवी ने प्राथमिकी में बताया कि 15 नवंबर 2024 को उनके दामाद ने फोन कर कहा था कि यदि दहेज की मांग पूरी नहीं की गई तो अगले दिन बेटी का शव देखने को मिलेगा. यह धमकी परिवार के लिए बेहद भयावह थी.

दुर्भाग्यवश, अगले ही दिन 16 नवंबर 2024 को नेहा कुमारी की मौत की सूचना मिली. इस घटना ने परिवार को झकझोर कर रख दिया और मामले ने गंभीर कानूनी रूप ले लिया.

मां ने दर्ज करायी थी हत्या की प्राथमिकी

घटना के बाद मुंगेर जिले के संग्रामपुर थाना क्षेत्र स्थित दुर्गापुर निवासी बबीता देवी ने शंभुगंज थाना में अपने दामाद अमित कुमार सिंह और समधन रेणु देवी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई. शिकायत में दोनों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और उनकी पुत्री की हत्या करने का आरोप लगाया गया. पुलिस जांच के बाद मामला न्यायालय पहुंचा, जहां विस्तृत सुनवाई की गई.

आठ गवाहों और साक्ष्यों ने मजबूत किया मामला

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल आठ गवाह प्रस्तुत किए गए. सरकार की ओर से जिला लोक अभियोजक हीरालाल सिंह ने पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अभिषेक कुमार और आफताब असलम ने बहस की.

दोनों पक्षों की दलीलों, गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने अमित कुमार सिंह और रेणु देवी को दोषी पाया. इसके बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई.

दहेज अपराधों के खिलाफ सख्त संदेश

इस फैसले को दहेज से जुड़े अपराधों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण न्यायिक संदेश माना जा रहा है. अदालत के निर्णय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दहेज के लिए महिलाओं का उत्पीड़न और उनकी हत्या जैसे अपराध किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे.

यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता और कानून के प्रति विश्वास को भी मजबूत करता है.

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