ePaper

दो दशकों से उपेक्षित पड़ी है मंदार की प्राचीन ब्रह्माणी प्रतिमा

Updated at : 17 Feb 2026 7:53 PM (IST)
विज्ञापन
दो दशकों से उपेक्षित पड़ी है मंदार की प्राचीन ब्रह्माणी प्रतिमा

??????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????

मंदार की पावन धरती, जो अपने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए जानी जाती है, आज अपनी ही एक अमूल्य धरोहर की उपेक्षा की साक्षी बनी हुई है.

विज्ञापन

पहले तीन खंड में थी, जो अब सात में हुई, कई खंड गायब

संजीव पाठक, बौंसी. मंदार की पावन धरती, जो अपने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए जानी जाती है, आज अपनी ही एक अमूल्य धरोहर की उपेक्षा की साक्षी बनी हुई है. लगभग दो दशक पहले पापहरिणी सरोवर से प्राप्त देवी ब्रह्माणी की प्राचीन प्रतिमा आज भी संरक्षण के अभाव में खुले आसमान के नीचे पड़ी है. मंदार तराई में अवस्थित पर्यटक गेस्ट हाउस में कई टुकड़ों में खंडित प्रतिमा गंदगी के ढेर में पड़ी हुई है, जो आज भी अपने उद्धारक का बाट जोह रही है. यह स्थिति न केवल प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत के प्रति संवेदनहीनता को भी उजागर करती है.

पापहरिणी सरोवर से मिला था अनमोल अवशेष

वर्ष 1999 में मंदार पर्वत के नीचे स्थित पापहरिणी सरोवर की सफाई के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रतिमाएं प्राप्त हुई थीं. खुदाई और निकासी के क्रम में यह मूर्ति दो हिस्सों में टूट गयी. बाद में उसे सरोवर के किनारे रख दिया गया. प्रारंभिक स्तर पर इसकी पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी, जिसके कारण यह वर्षों तक उपेक्षित रही. कुछ समय बाद इसे पर्यटन विभाग के निरीक्षण भवन परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया, किंतु वहां भी इसे सुरक्षित रखने की समुचित व्यवस्था नहीं की गयी. आज भी यह प्रतिमा खुले आसमान के नीचे गंदगी, वर्षा, धूप और अन्य प्राकृतिक प्रभावों को सहती हुई अपनी दशा पर मौन प्रश्न खड़े कर रही है.

विशेषज्ञों ने की पहचान

मंदार विकास परिषद के एक कार्यक्रम के दौरान इतिहासकार उदयेश रवि की नजर इस प्रतिमा पर पड़ी. गहन अध्ययन के पश्चात इसे देवी ब्रह्माणी की प्रतिमा के रूप में पहचाना गया. उन्होंने बताया कि यह प्रतिमा ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित है. लगभग तीन फीट ऊंची और दो फीट चौड़ी इस प्रतिमा का वजन करीब 55 किलोग्राम है. मूर्ति में देवी को चार भुजाओं के साथ अंकित किया गया है. दाहिने हाथों में माला और पुस्तक, जबकि बाएं हाथों में कमंडल और वरद मुद्रा प्रदर्शित है. सिर पर सुशोभित मुकुट और पीछे निर्मित प्रभामंडल इसकी शिल्पकला की उत्कृष्टता को दर्शाते हैं. उन्होंने बताया कि यह प्रतिमा कुम्भकारों की कुलदेवी मानी जाती है तथा 64 योगिनियों में भी इनका उल्लेख मिलता है. ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि मंदार क्षेत्र में 64 योगिनियों की पूजा होती रही होगी. विशेषज्ञों के अनुसार इसकी शैली गुप्तकालीन कला से मेल खाती है, जो भारतीय मूर्तिकला के स्वर्णिम युग का प्रतिनिधित्व करती है. इतिहासविदों का मानना है कि यह प्रतिमा मंदार क्षेत्र की प्राचीनता और सांस्कृतिक समृद्धि का सशक्त प्रमाण है. गुप्तकालीन कला भारतीय सभ्यता के उत्कर्ष का प्रतीक मानी जाती है. इस दृष्टि से यह प्रतिमा केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि इतिहास का जीवंत दस्तावेज है. मंदार क्षेत्र पहले से ही धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है. ऐसी दुर्लभ प्रतिमा का यहां मिलना इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को और भी सुदृढ़ करता है.

संरक्षण की आवश्यकता

स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से कई बार इस प्रतिमा के संरक्षण की मांग की है. उनका कहना है कि क्षेत्र की कई अन्य दुर्लभ मूर्तियां पहले ही चोरी या क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं. कालांतर में यहां से कई मूर्तियां चोरी भी हुई हैं और विभिन्न कुंडों की सफाई के दौरान निकली प्रतिमाओं का अब तक कोई अता-पता नहीं है. यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह अनमोल धरोहर भी नष्ट हो सकती है. विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रतिमा को सुरक्षित संग्रहालय या संरक्षित कक्ष में रखा जाए. इसके संरक्षण और मरम्मत के लिए पुरातत्व विभाग से विशेषज्ञ बुलाए जाएं. मंदार क्षेत्र में एक लघु संग्रहालय की स्थापना की जाय. क्षेत्र की अन्य प्राचीन मूर्तियों का सर्वेक्षण और सूचीकरण कराया जाय.

विरासत बचाने की जिम्मेदारी

यह केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और इतिहास का सजीव प्रतीक है. यदि हम अपनी धरोहरों की रक्षा नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी क्षमा नहीं करेंगी. अब समय आ गया है कि प्रशासन, सरकार और समाज मिलकर इस ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित करने की ठोस पहल करें, ताकि मंदार की यह अमूल्य ब्रह्माणी प्रतिमा पुनः सम्मान और संरक्षण प्राप्त कर सके.

कहते हैं पर्यटन पदाधिकारी

इस मामले में पूछे जाने पर जिले के प्रभारी पर्यटन पदाधिकारी शंभू पटेल ने बताया कि मूर्ति के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाए जायेंगे और संबंधित विभाग को इसकी जानकारी दी जायेगी.

कहती हैं कला एवं संस्कृति पदाधिकारी

इस मामले में कला एवं संस्कृति पदाधिकारी प्रीति कुमारी ने बताया कि प्रतिमा की जांच कर उसे संरक्षित करने का प्रयास किया जायेगा.

विज्ञापन
SHUBHASH BAIDYA

लेखक के बारे में

By SHUBHASH BAIDYA

SHUBHASH BAIDYA is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन