बांका में दाल और मसालों ने बिगाड़ा किचन बजट, आलू-प्याज के दाम फिलहाल स्थिर
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 04 Jun 2026 7:27 AM
सांकेतिक तस्वीर
Banka Mandi : बांका दाल, आटा और मसालों की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की जेब पर बढ़ाया बोझ. विक्रमशिला सेतु ध्वस्त होने के बाद परिवहन लागत बढ़ने का असर बाजार में साफ दिख रहा है.
बांका से मदन कुमार की रिपोर्ट
Banka Mandi : बांका की मंडियों में इन दिनों अनाज और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. जहां आलू और प्याज की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं, वहीं दाल, मसाला और आटा की कीमतों में तेज उछाल ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है. कारोबारियों के अनुसार माल ढुलाई की बढ़ती लागत और आपूर्ति प्रभावित होने के कारण बाजार में कई जरूरी वस्तुएं महंगी हो गई हैं. इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है.
दाल और मसालों की महंगाई ने बढ़ाई चिंता
स्थानीय कारोबारियों के मुताबिक दाल की कीमतों में प्रति क्विंटल करीब 500 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वहीं आटा के दाम भी 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गए हैं. मसालों और खाद्य तेल की कीमतों में भी तेजी बनी हुई है. रोजाना इस्तेमाल होने वाली इन वस्तुओं के महंगे होने से मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ गया है.
विक्रमशिला सेतु का असर अब बाजार तक
व्यापारियों का कहना है कि भागलपुर में विक्रमशिला सेतु ध्वस्त होने के बाद माल ढुलाई की व्यवस्था प्रभावित हुई है. बांका मंडी में खाद्यान्न और अन्य जिंसों की आपूर्ति मुख्य रूप से पूर्णिया के गुलाबबाग और कोलकाता की मंडियों से होती है. अब माल को लंबा रास्ता तय कर मुंगेर के कृष्णा सेतु होकर लाना पड़ रहा है. इससे परिवहन लागत बढ़ी है और उसका असर सीधे वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे रहा है.
मंडी में क्या है आज का भाव
स्थानीय मंडी के अनुसार अरहर दाल 11,500 से 15,000 रुपये प्रति क्विंटल, मसूर दाल 6,000 से 6,550 रुपये और मूंग दाल 9,540 से 9,600 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है. सरसों तेल की कीमत 15 लीटर टिन के लिए 2,070 से 2,470 रुपये के बीच है. वहीं आलू 1,200 से 1,450 रुपये और प्याज 1,800 से 1,900 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर उपलब्ध है.
आगे भी बनी रह सकती है अस्थिरता
कारोबारियों का मानना है कि जब तक परिवहन व्यवस्था सामान्य नहीं होती, तब तक कीमतों में स्थिरता की उम्मीद कम है. ईंधन की बढ़ती कीमतें और लंबी दूरी की ढुलाई बाजार को प्रभावित कर रही है. ऐसे में आने वाले दिनों में खाद्यान्न और अन्य जरूरी वस्तुओं के दामों में और बदलाव देखने को मिल सकता है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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