इस बार घोड़े पर आयेंगी मां शारदीय नवरात्र. मुरगा पर दुर्गा के गमन का है योग
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Sep 2016 2:26 AM (IST)
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जिले भर में दुर्गा पूजा की तैयारी जोरी से चल रही है. इस बार मां दुर्गा का आगमन घोड़े पर हो रही है और उनका गमन अर्थात-प्रस्थान मुर्गा पर होगा. भगवती का आगमन व गमन दोनों ही अशुभ फल कारक है. बांका : शारदीय नवरात्र को लेकर जिले के सभी दुर्गा मंदिरों में पिछले कई […]
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जिले भर में दुर्गा पूजा की तैयारी जोरी से चल रही है. इस बार मां दुर्गा का आगमन घोड़े पर हो रही है और उनका गमन अर्थात-प्रस्थान मुर्गा पर होगा. भगवती का आगमन व गमन दोनों ही अशुभ फल कारक है.
बांका : शारदीय नवरात्र को लेकर जिले के सभी दुर्गा मंदिरों में पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही है. कहीं भव्य पूजा पंडाल तो कहीं मंदिरों को भव्य तरीके से सजाने का कार्य किया जा रहा है. वहीं शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में मां दुर्गा के सप्तशती पाठ व भक्ति गीत गुंजने लगे हैं. पंडित के अनुसार शारदीय नवरात्र 10 दिनों का है. क्योंकि द्वितीया तिथि की वृद्धि हो गयी है. 1 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र प्रारंभ हो रहा है. कलश स्थापना प्रात: काल से लेकर संध्या से पूर्व किसी भी समय किया जा सकता है.
मध्याह्न अभिजित मुहूर्त 11:36 बजे से 12:24 के मध्य कलश स्थापना का विशेष मुहूर्त होता है. हालांकि इस बार मां दुर्गा का आगमन घोड़े पर हो रही है और उनका गमन अर्थात-प्रस्थान मुर्गा पर होगा. भगवती का आगमन व गमन दोनों ही अशुभ् फल कारक है. यदि भगवती घोड़े पर आयी तो अपने राष्ट्र पर आपदा विपत्ती का संकेत माना जाता है. तथा अपने राजा के उपर भी विपत्ती का संकेत माना जाता है. जबकि भगवती मुर्गा पर जाये तो युद्ध का संकेत मिलता है.
दशमी को नीलकंठ का दर्शन अति शुभदायक
पूजा का मुहूर्त
इस बार महाअष्टमी का व्रत 9 अक्टूबर रविवार को होगा. सभी सौभाग्य व्रती महिला प्रात: काल से लेकर संध्या 5:48 तक डलिया सुहाग, पेटारी इत्यादि भर सकती है एवं समर्पण कर सकती है. ऐसी मान्या है कि महाअष्टमी का व्रत करने से मनोवाक्षितफल,धन, धनु, सुख,शांति की प्राप्ति होती है. महानवमी का व्रत 10 अक्तूबर सोमवार को मनायी जायेगी. तथा नवरात्र के समापन का हवन 10 अक्तूबर सोमवार को नवमी तिथि संध्या 6:05 तक किया जायेगा. नवरात्र व्रत के पारण 11 अक्तूबर को प्रात: दशमी का पवित्र पर्व 11 अक्तूबर मंगलवार को सर्वत्र बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में हर्षोंल्लास के साथ मनाया जायेगा. विजय दशमी के दिन अपराजिता भगवती का पूजन, नीलकंठ दर्शन तथा देवी विसर्जन के पश्चात जयंती धारण करना चाहिए जो लोगों के लिए अति शुभदायक होता है.
कहते हैं आचार्य
इस संबंध में आचार्य ओम प्रकाश झा ने बताया कि काशी व मिथिला पंचांग के अनुसार इस बार मां भगवती का आगमन घोड़ा व प्रस्थान मुर्गा पर हो रहा है. ये दोनों अशुभ फल कारक है इससे राष्ट्र पर आपदा व युद्ध का संकेत बनता है. साथ ही राजा के उपर भी विपत्ती का संकेत माना गया है. हालांकि इस बार नवरात्र 10 दिनों तक चलेगी. जिसमें 10 दिनों तक लोग मां की आराधना व नवरात्र व्रत को रख कर अपने मनोवांक्षित फल की प्राप्ति कर सकते हैं.
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