संसाधन भरपूर, सुविधाअों से दूर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :03 May 2016 5:15 AM (IST)
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बांका नगर पंचायत. करोड़ों के बजट के बाद भी नपं के लोग हैं परेशान करोड़ों के बजट एवं विपुल स्थानीय श्रोतों के बावजूद शहर के नागरिकों को समुचित बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा पाने में बांका नगर पंचायत विफल रहा है. उपाध्याय बांका : कभी बांका नगर पंचायत साधन विहीन जरूर था. लेकिन अब इसके पास […]
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बांका नगर पंचायत. करोड़ों के बजट के बाद भी नपं के लोग हैं परेशान
करोड़ों के बजट एवं विपुल स्थानीय श्रोतों के बावजूद शहर के नागरिकों को समुचित बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा पाने में बांका नगर पंचायत विफल रहा है.
उपाध्याय बांका : कभी बांका नगर पंचायत साधन विहीन जरूर था. लेकिन अब इसके पास संसाधनों की कोई कमी नहीं. फिर भी शहर में मूलभूत नागरिक सुविधाओं के नाम पर इसके पास करने के लिए शायद कुछ नहीं है. तभी तो बांका शहर और शहरवासियों के लिए पेयजल, सफाई, शौचालय, सौंदर्यीकरण, पार्क आदि जैसी बुनियादी सुविधाओं का इंतजाम कर पाने में भी नगर पंचायत प्रशासन अब तक मोटे तौर पर विफल ही रहा है.
22 वार्डो और करीब 50 हजार की आबादी वाले बांका शहर में ये सुविधाएं अब भी नागरिकों के लिए दूर की बातें साबित हो रही हैं. शहर के आधे दर्जन वार्डो की स्थिति गांवों से भी बदतर है. कई मुहल्लों में स्ट्रीट लैंप दूर, बिजली तक उपलब्ध नहीं है. सफाई और जल निकासी के लिए नाले शहर के लिए बस अरमान भर बन कर रह गये हैं. कई मुहल्लों में चलने लायक कच्ची सड़क तक नहीं है. जो नाले हैं उनका पानी सड़कों पर बह रहा है. सार्वजनिक शौचालय कभी जिला प्रशासन की पहल पर बने थे जिनका रख रखाव नगर पंचायत को करना था. लेकिन नगर पंचायत इसमें भी विफल रहा है.
शहर में कहीं पार्क तक नहीं है. खेल मैदान तो दूर की बात है. इससे ज्यादा और क्या कहा जा सकता कि सफाई के लिए 60 कर्मियों की फौज के बावजूद जगह जगह जमा कूड़े के ढेर शहर की पहचान बन रहे हैं. नगर पंचायत में न जाने किस लिए 3-3 फॉगिंग मशीन की खरीद हुई थी… मच्छरों के भारी प्रकोप के बावजूद इनसे निपटने के लिए फॉगिंग करने की जगह ये नगर पंचायत कार्यालय परिसर के गुलदस्ते बने हुए हैं.
महज दिखावे के लिए हैं करोड़ों के संसाधन : बांका नगर पंचायत में सफाई उपक्रम के लिए 3 ट्रैक्टरों सहित 3 चालक और 60 कर्मियों की फौज तैनात है. सफाई कर्मियों को प्रत्येक दिन हरेक मुहल्ले में जाकर सिटी बजाते हुए घरों के कचरे एकत्रित करने, नालों की उड़ाही तथा सफाई करने की जिम्मेदारी है. शौचालयों की सफाई के लिए 5.5 लाख की सीवर सक्शन मशीन नगर पंचायत के पास है. 16-16 लाख में खरीदी गयी 2 बड़ी और छोटी जेसीबी मशीन भी नगर पंचायत की संपत्ति में शामिल है. मच्छरों से निपटने के लिए हाल ही में 17 लाख की लागत से खरीदी गयी एक बड़ी और 3 छोटी फॉगिंग मशीनें भी नगर पंचायत के जिम्मे है. 7.9 लाख में खरीदे गये ऑटो टाईप 2 पे लोडर और 6.2 लाख में खरीदे 2 पानी टैंकर भी नगर पंचायत कार्यालय की शोभा बढ़ा रहे हैं. लेकिन स्थानीय श्रोत और राज्य सरकार की योजना मद की राशि से एकत्रित की गयी इतनी बड़ी परिसंपत्ति का कितना लाभ शहर को नागरिकों को मिल पा रहा है, यह यहां के नागरिकों से बेहतर और बता सकता है.
अंधेरे मुहल्ले, कच्ची सड़कें व कूड़े का ढेर बनी है नपं की पहचान
गांवों से भी बदतर हैं शहर के गली मुहल्ले
शहर में मुख्य मार्गों से लेकर गली मुहल्ले तक में कभी सैकड़ों वाटर टेप प्वाइंट हुआ करते थे. आज ये नहीं हैं. जहां कहीं एक दो बच गये हैं, टोटी के अभाव में उनका पानी बर्बाद हो रहा है. शहर के नाले जाम हैं. नालों का पानी सड़कों पर बह रहा है. उड़ाही और सफाई के नाम पर सिर्फ मुख्य मार्गों पर खानापूरी की जा रही है. गली मुहल्लों में स्ट्रीट लैंप नहीं है. सार्वजनिक शौचालय शहर वालों के लिए इतिहास बन गये हैं. कई मुहल्लों में सड़कें तक पक्की नहीं हैं. करोड़ों की योजना राशि व्यय होने के बाद भी आधे दर्जन मुहल्ले गांवों से बदतर हाल में हैं. कई मुहल्ले में अब तक बिजली नहीं पहुंची. सड़क, नाले, पेयजल और सफाई की बात तो दूर की बात है. अपनी इन नाकामियों पर पक्ष रखने तक के लिए नगर पंचायत प्रशासन में किसी के पास दो शब्द तक नहीं हैं. नगर पंचायत मौजूदा है, लेकिन नगर के नागरिक अपने ही भाग्य भरोसे अपनी हाल पर जीने को विवश हैं.
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