जिला परिषद के बाद जिला नियोजनालय ने किया बिरसा मुंडा रैन बसेरा पर कब्जा

Published at :27 Apr 2016 1:46 AM (IST)
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जिला परिषद के बाद जिला नियोजनालय ने किया बिरसा मुंडा रैन बसेरा पर कब्जा

जिले के गरीबों के लिए कभी आश्रय नहीं बन पाया दो दशक पूर्व निर्मित रैन बसेरा बगैर वाद्य यंत्र क्या सिखायेंगे संगीत शिक्षक जिले के हाई स्कूलों में संगीत शिक्षक तो बहाल हुए पर नहीं हुई वाद्य यंत्रों की खरीद बांका : जिले भर में संगीत शिक्षकों की बहाली प्रत्येक शिक्षक नियोजन के दौरान किया […]

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जिले के गरीबों के लिए कभी आश्रय नहीं बन पाया दो दशक पूर्व निर्मित रैन बसेरा

बगैर वाद्य यंत्र क्या सिखायेंगे संगीत शिक्षक
जिले के हाई स्कूलों में संगीत शिक्षक तो बहाल हुए पर नहीं हुई वाद्य यंत्रों की खरीद
बांका : जिले भर में संगीत शिक्षकों की बहाली प्रत्येक शिक्षक नियोजन के दौरान किया जाता रहा है. शिक्षकों की बहाली तो हुई. लेकिन जिले के जितने भी विद्यालय हैं उनमें एक दो विद्यालय को छोड़ कर किसी भी विद्यालय में वाद्य यंत्र उपलब्ध नहीं है. जिस वजह से संगीत शिक्षक विद्यालय सिर्फ उपस्थिति दर्ज कराने आते हैं, न कि संगीत की शिक्षा देने. ज्ञात हो कि जिले भर के 10 प्लस टू विद्यालय में 23 एवं माध्यमिक के 6 विद्यालयों में संगीत शिक्षकों नियुक्ति हुई है.
लेकिन लगभग सभी के सभी विद्यालय वाद्य यंत्र विहीन है. ऐसे में संगीत के प्रति कैसे जगेगी छात्र छात्राओं की रूची, या फिर यह कहा जा सकता है कि नियोजन में संगीत शिक्षकों की बहाली होनी थी जो शिक्षा विभाग के द्वारा कर दी गयी लेकिन शिक्षकों की बहाली होने के बाद कोई अधिकारी या विद्यालय प्रधान सुधि लेने वाले नहीं है कि वाद्य यंत्र नहीं होगा तो कैसे विद्यालय में संगीत की शिक्षा दी जायेगी.
बैठे पगार ले रहे संगीत शिक्षक
वाद्य यंत्र के उपलब्ध नहीं रहने पर संगीत शिक्षक मगन हैं. उनके द्वारा अपनी तरफ से कभी यह प्रयास नहीं किया गया कि जिस वजह से संगीत शिक्षक की बहाली हुई है वही नहीं दे पा रहे हैं और बदले में मासिक तनख्वाह उठा रहे हैं. शिक्षकों के द्वारा कभी भी न तो विभाग को लिखा गया और न ही विभाग के उच्चाधिकारी को इस बाबत जानकारी दी गयी.
वहीं यदि शिक्षकों के मासिक तनख्वाह में देरी या कमी सरकार कर दे तो उसके लिए शिक्षक उसे अपना अधिकार मानकर प्रदर्शन करने लगते हैं. लेकिन बैठे बिठाये मुफ्त का पैसा सरकार से ले रहे हैं तो इनके मन में जरा सी भी ग्लानि नहीं होती है. बल्कि तनख्वाह का आनंद लेते हैं.
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