अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा सदर अस्पताल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 Apr 2016 2:11 AM (IST)
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ऊंची दुकान में फीकी पकवान का नमूना बन कर रह गया है जिला सदर अस्पताल बांका : बांका के लोगों को जब पता चला था कि यहां सौ बेड वाला जिला अस्पताल बनेगा तो लोग इसे आशा भरे दृष्टि से देखते थे कि चलो अब बांका से मरीज भागलपुर रेफर नहीं होगा. कटने छिलने से […]
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ऊंची दुकान में फीकी पकवान का नमूना बन कर रह गया है जिला सदर अस्पताल
बांका : बांका के लोगों को जब पता चला था कि यहां सौ बेड वाला जिला अस्पताल बनेगा तो लोग इसे आशा भरे दृष्टि से देखते थे कि चलो अब बांका से मरीज भागलपुर रेफर नहीं होगा. कटने छिलने से लेकर बड़ी बीमारियों का इलाज होगा. बांका वासियों का यह सपना 15 जनवरी 2010 को पूरा हुआ. अनुमंडल अस्पताल सभी साजो समान के साथ जिला अस्पताल में शिफ्ट हो गया. जिसका उद्घाटन तत्कालीन बिहार सरकार के पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के मंत्री द्वारा किया गया था.
साथ ही यह भी आश्वासन मिला था कि सदर अस्पताल के क्रियान्वयन के लिए जितने भी चिकित्सकों या अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की आवश्यकता होगी वह पूरा होगा. लेकिन ये वादे सिर्फ भाषणों तक ही सिमट कर रह गये. आज तक न तो एक चिकित्सक बहाल हुए और न ही अन्य कर्मी, वर्तमान में बांका वासी यहां तक कहने लगे हैं कि जब अनुमंडल स्तर का अस्पताल था उस समय चिकित्सकों की संख्या अधिक थी जब से जिला अस्पताल का निर्माण हुआ है,
तब से चिकित्सकों की संख्या घटती चली जा रही है. कहने का तात्पर्य यह है कि जिला अस्पताल में मरीजों को चिकित्सकीय सुविधा अधिक मिलनी चाहिए. लेकिन ठीक इसके विपरीत हुआ. मरीजों को सदर अस्पताल में खुला खुला सा बड़ा जगह जरूर मिला, लेकिन जिसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी यानि चिकित्सकों की वह बढ़ा ही नहीं बल्कि घटता चला गया.
जंग खा रहीं मशीनें : सदर अस्पताल के निर्माण के साथ ही अत्याधुनिक इंडोस्कॉपी एवं सीआर्म मशीन उपलब्ध हुआ था जिसके संचालन के लिए तत्कालीन चिकित्सक इंडोस्कॉपी के लिए डा. आरपी जयसवाल एवं सीआर्म के लिए डा. अंसारी को विशेष प्रशिक्षण हेतु राज्य से बाहर भेजा गया था. लेकिन प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटते ही इन चिकित्सकों का तबादला अन्यत्र जिलों में हो गया. जिस वजह से उक्त दोनों मशीनें आज तक सदर अस्पताल में धूल फांक रही है.
यदि ये दोनों मशीनें चालू हो जाती है तो पथरी एवं हड्डी से संबंधित रोगों का इलाज शुलभता से होगा. उक्त रोग से ग्रसित मरीज रेफर नहीं होंगे.
लापरवाही की वजह से बंद हैं सुविधाएं : वर्ष 2011-12 में बांका सदर अस्पताल में ब्लड ट्रांसप्लांट मरीजों को होता था, जो वर्तमान में बंद है. इसका मुख्य कारण ब्लड ट्रांसप्लांट के लाइसेंस का नवीकरण नहीं होना है. इसका नवीकरण राज्य स्वास्थ्य समिति से होता है. बांका से बार बार पत्राचार करने के बाद भी आज तक लाइसेंस का विस्तारीकरण राज्य स्वास्थ्य समिति के द्वारा नहीं किया गया है. वहीं इसके अलावे आईसीयू के लिए 6 शैय्या वाले बेड का भी निर्माण होना था
जिसके लिए सदर अस्पताल के तीसरे तल पर जगह आरक्षित कर रखा गया है लेकिन राज्य से इसकी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण इसका निर्माण नहीं हो पा रहा है. साथ ही एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बॉर्न केयर युनिट) के भवन का निर्माण सदर अस्पताल परिसर में ही किया जा चुका है. लेकिन उसका इंटेरियर डेकोरेशन या साजो समान राज्य स्वास्थ्य समिति से आज तक उपलब्ध नहीं हो पाया है. जिस वजह से नवजात शिशु एवं गंभीर बीमारी से पीडि़त मरीजों को तुरंत रेफर कर दिया जाता है.
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