राहत नहीं, अग्निपीड़ितों को मिल रही संवेदनाएं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Apr 2016 2:34 AM (IST)
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अग्निकांडों का सिलसिला तो थमा लेकिन अग्निपीड़ितों के जीवन में अब भी लगी है आग सिर्फ सर्वे करने के लिए पहुंच रहे अधिकारी, ढांढ़स बंधा रहे जनप्रतिनिधि संवेदनाओं की बजाय भोजन पानी व वस्त्र मांग रहे बेघरबार हुए अग्निपीड़ित बांका : बांका जिले में फिलहाल अगलगी का सिलसिला थमा है. लेकिन अब तक हुए अगलगी […]
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अग्निकांडों का सिलसिला तो थमा लेकिन अग्निपीड़ितों के जीवन में अब भी लगी है आग
सिर्फ सर्वे करने के लिए पहुंच रहे अधिकारी, ढांढ़स बंधा रहे जनप्रतिनिधि
संवेदनाओं की बजाय भोजन पानी व वस्त्र मांग रहे बेघरबार हुए अग्निपीड़ित
बांका : बांका जिले में फिलहाल अगलगी का सिलसिला थमा है. लेकिन अब तक हुए अगलगी की घटनाओं में बेघर हुए परिवारों की जिंदगी में अब भी आग लगी हुई है. ऐसे परिवार खुले आसमान के नीचे रहकर न घर के न घाट के वाली स्थिति में जीवन बसर कर रहे हैं. उनके समक्ष खाने पीने से लेकर ओढ़ने बिछाने और पहनने तक का संकट मुंह बाये खड़ा है. अधिकारी और जनप्रतिनिधि उन्हें संवेदनाएं जरूर बांट रहे हैं.
लेकिन उनकी जरूरतों पर उनका ध्यान नहीं है. अग्निपीड़ित परिवार कहते हैं… संवेदनाओं से पेट नहीं भरता बाबू! उन्हें पीने के लिए पानी और खाने के लिए भोजन चाहिए. पहनने के लिए वस्त्र और ओढ़ने बिछाने के लिए बिस्तर चाहिए. लेकिन उनकी सुनता कौन है. अधिकारी और जनप्रतिनिधि (इनमें स्थानीय नेतागण भी शामिल हैं) उनके पास आते और संवेदनाओं के दो मीठे बोल देकर चले जाते हैं. सरकारी राहत के नाम पर उन्हें कहीं कुछ नहीं मिल रहा है.
समाज के शुभचिंतकों और कुछ संवेदनशील सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से मिले चुड़ा गुड़ से उनका पेट भर रहा है. उनका तो सबकुछ खाक हो गया है. संवेदनाओं की पोटली लेकर उनके पास आने वाले अधिकारी और जनप्रतिनिधि उन्हें जले पर नमक छिड़कने वाले सौदागर की तरह लगते हैं.
भूखे पेट सोने को विवश हैं करीब छह सौ अग्निपीड़ित परिवार
पिछले तीन माह के दौरान बांका जिले के विभिन्न हिस्सों में हुए दर्जनों अग्निकांडों में चार सौ से ज्यादा घर जल कर राख हो चुके हैं. इन अग्निकांडों ने छह सौ से ज्यादा परिवारों को बेघर कर दिया है. शहर के विजयनगर स्थित एक बथान में लगी आग से सिलसिला शुरू हुआ जिसने अब तक कटोरिया, धोरैया, शंभुगंज, बाराहाट, रजौन, बांका, फुल्लीडुमर, अमरपुर, बेलहर आदि प्रखंडों में तबाही मचा कर रख दी.
शंभुगंज के पौकरी पंचायत के कुछ अग्निपीड़ितों के अलावा धोरैया के चपरी तथा कटहारा, रजौन के कैथा, झिकटा, फुल्लीडुमर के नवटोलिया, कटोरिया के पंजरपट्टा आदि गांवों के अग्निपीड़ित उन्हें राहत मिल पाने से व्यथित होकर कहते हैं कि कई बार अधिकारी उनका सर्वे करने आते हैं मानो वे जगह जमीन हों.
नेताओं की भी लंबी फेहरिश्त है जो उन्हें राहत की बजाय संवेदनाएं दे जाते हैं. ये संवेदनाएं लेकर आखिर वे करेंगे क्या ? बेहतर होता यदि वे खाने को अन्न, पीने को पानी और पहनने को वस्त्र दे जाते!
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