बदहाल है कौशलपुर संस्कृत विद्यालय
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Mar 2015 7:40 AM
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प्रधानाध्यापिका के घर पर बनती है शिक्षकों की हाजिरी बांका/अमरपुर : जिले के 13 अनुदानितसंस्कृत विद्यालयों में अमरपुर प्रखंड के कौशलपुर गांव स्थित संस्कृत मध्य विद्यालय की स्थिति सबसे खराब है. यहां बिना किसी छात्र व शिक्षक के पहुंचे ही शिक्षकों को वेतनमान वर्षो से प्राप्त हो रहा है. ग्रामीण इस व्यवस्था से काफी क्षुब्ध […]
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प्रधानाध्यापिका के घर पर बनती है शिक्षकों की हाजिरी
बांका/अमरपुर : जिले के 13 अनुदानितसंस्कृत विद्यालयों में अमरपुर प्रखंड के कौशलपुर गांव स्थित संस्कृत मध्य विद्यालय की स्थिति सबसे खराब है.
यहां बिना किसी छात्र व शिक्षक के पहुंचे ही शिक्षकों को वेतनमान वर्षो से प्राप्त हो रहा है. ग्रामीण इस व्यवस्था से काफी क्षुब्ध हैं. ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी उदासीनता के कारण यहां कार्यरत शिक्षक बेखौफ होकर आराम फरमा रहे हैं. विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मणिमाला प्रसाद विद्यालय छोड़ कर अपने मायके में रहती हैं.
विद्यालय की स्थिति
कौशलपुर गांव में 36 वर्षो से चल रहे प्राथमिक मध्य संस्कृत विद्यालय में छात्रों की उपस्थिति शून्य है. कभी कभार एक दो शिक्षक यहां आते हैं जबकि इस विद्यालय में कुल आठ शिक्षक कार्यरत हैं. मालूम हो कि विद्यालय भवन अपने निर्धारित खाता खेसरा से दो किमी दूरी पर स्थित है. जांच की जाये तो यह स्पष्ट हो जायेगा कि विद्यालय स्थापना काल से गलतियों के ढेर पर बसा हुआ है. वर्ग एक से आठ तक का पाठ बिना वर्ग कक्ष के ही कागज पर चल रहा है. एकमात्र बरामदे पर ही सभी कक्षाओं को चलाने का दावा प्रधानाध्यापक कर रहे हैं. इस विद्यालय के अध्यक्ष महेंद्र प्रसाद मनु हैं जिनकी पत्नी यहां प्रधानाध्यापिका तो सुपुत्री प्रियरंजना यज्ञ सेनी वरीय शिक्षक के रुप में सेवारत हैं.
नहीं आते हैं विद्यार्थी
ग्रामीणों का कहना है कि जब भी कोई इस विद्यालय के विषय में कुछ चर्चा करते हैं तो कहा जाता है कि विद्यालय मेरे पॉकेट की वस्तु है जहां मर्जी वहां शिकायत करें. ग्रामीण रामानंद महतो का कहना है कि विद्यालय में कभी भी छात्र-छात्र को नहीं देखा गया है. कौशल किशोर शर्मा का कहना है कि 15 अगस्त एवं 26 जनवरी को छोड़ कर प्रधानाध्यापिका कभी नहीं आती हैं. शिक्षकों का व्यवहार तो यह है कि स्कूली बच्चों को पढ़ाना तो दूर विद्यालय परिसर में प्रवेश तक नहीं करने दिया जाता है.
ग्रामीण दिलीप शर्मा ने कहा कि विद्यालय के शिक्षकों को दबाव में रख कर काम लिया जाता है.अभिलाषा देवी ने कहा कि शिक्षकों की उदासीनता से बच्चों को दूर स्थित विद्यालय में पढ़वाने को विवश हैं. हद तो यह है कि स्कूली बच्चों की उपस्थिति पंजी भी विद्यालय में नहीं है. शिक्षक उपस्थिति पंजी प्रधानाध्यापिका अपने साथ ही रखती हैं.शुक्रवार को विद्यालय में तीन शिक्षक उपस्थित थे, उन्होंने कहा कि बच्चे स्कूल नहीं आते हैं.शिक्षक ने बताया कि प्रधानाध्यापिका आज छुट्टी पर हैं.
कहते हैं प्रधानाध्यापक
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ने बताया कि किसी प्रकार को कोई फंड नहीं मिलने से स्कूल ठंड बस्ते में चला गया है. भवन निर्माण के अभाव में जैसे तैसे 280 छात्र-छात्राओं को पढ़ाने का काम किया जा रहा है. सर्व शिक्षा अभियान का लाभ विद्यालय को नहीं मिल रहा है जिससे विद्यालय की ऐसी स्थिति है.
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