ट्रैक्टर पलटने से मालिक की मौके पर हुई मौत

Updated at : 30 Apr 2019 7:55 AM (IST)
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ट्रैक्टर पलटने से मालिक की मौके पर हुई मौत

बांका : नये सत्र के साथ विभिन्न विद्यालय में एडमिशन व री-एडमिशन का चलन शुरु हो गया है. स्कूल प्रवेश की महंगी शुल्क अभिभावकों के लिए परेशानी बनी ही हुई है. री-एडमिशन के नाम पर निजी स्कूल अभिभावक का आर्थिक दोहन कर रहे हैं. प्रशासन निजी स्कूल की मनमानी को गंभीरता से नहीं ले रही […]

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बांका : नये सत्र के साथ विभिन्न विद्यालय में एडमिशन व री-एडमिशन का चलन शुरु हो गया है. स्कूल प्रवेश की महंगी शुल्क अभिभावकों के लिए परेशानी बनी ही हुई है. री-एडमिशन के नाम पर निजी स्कूल अभिभावक का आर्थिक दोहन कर रहे हैं. प्रशासन निजी स्कूल की मनमानी को गंभीरता से नहीं ले रही है.

अलबत्ता, निजी स्कूल व्यवसाय के रुप में औने-पौने ढंग से मोटी रकम वसूलने को अमादा है. निजी स्कूल में री-एडमिशन में जो विद्यार्थी उसी विद्यालय में अध्ययनरत है, उसे दूसरी कक्षा में जाने के लिए विधिवत पुन: प्रवेश लेना पड़ता है. इसके लिए पांच हजार से लेकर 15 हजार तक की शुल्क देनी पड़ती है.
अभिभावकों का कहना है की री-एडमिशन के नाम पर इनती रकम किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है. मजबूरी बस अभिभावक सार्वजनिक रुप से इसका विरोध नहीं कर पाते हैं, परंतु दबी जुबान से अपनी पीड़ा जरुर रख देते हैं. जानकारी के मुताबिक जिले भर में तीन-चार सौ के करीब निजी विद्यालय हैं. जिला मुख्यालय में एक दर्जन उच्च दर्जा के स्कूल हैं.
जहां प्रवेश के लिए एड़ी-चोटी का बल लगाना पड़ता है. लिहाजा, ऐसे विद्यालय एडमिशन से लेकर री-एडमिशन के नाम पर अनाप-शनाप राशि वसूल लेते हैं. यही नहीं निजी विद्यालय शिक्षा नीति का भी खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं. ड्रेस, किताब व स्कूल में होने वाले विज्ञान प्रदर्शनी सहित अन्य आयोजन के नाम पर भी काफी रकम वसूली जाती है, जो अभिभावक के नजर में बिल्कुल फिजूल खर्ची ही है.
किताब के लिए दुकान रहता है तय, एक किताब हजार-दो हजार की
निजी विद्यालय में किताब के नाम पर भी काफी वसूली करते हैं. जानकारी के मुताबिक प्रति वर्ष किताब का प्रकाशन बदलते रहता है. साथ ही बच्चे कहां से किताब खरीदेंगे इसके लिए दुकान भी तय रहता है. नर्सरी कक्षा तक की किताब हजार-दो हजार में मिलती है.
आगे की कक्षा की पुस्तकों की कीमतों का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है. मसलन, एडमिशन, री-एडमिशन के साथ किताब पर भी निजी विद्यालय खूब कमाई करते हैं. ताज्जूब तो इस बात की है कि विद्यार्थी ड्रेस के लिए कपड़ा किस दुकान से खरीदेंगे ये भी पहले से तय होता है.
कक्षावार री-एडमिशन की संभावित फीस
नर्सरी से कक्षा तीन- दो से छह हजार तक
कक्षा चार से सात- चार से नौ हजार तक
कक्षा सात से दसवीं- नौ हजार से 15 हजार तक
किताब की कीमत
कक्षा नर्सरी से तीन- 500 से 3000 तक
कक्षा चार से सात- 2000- 5000 तक
कक्षा सात से दसवीं- 5000 से 8000 तक
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