पीबीएस कॉलेज में इतिहास, भूगोल व काॅमर्स की पढ़ाई नहीं

Updated at : 29 Jun 2018 6:16 AM (IST)
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पीबीएस कॉलेज में इतिहास, भूगोल व काॅमर्स की पढ़ाई नहीं

महत्वपूर्ण विषय कॉमर्स की शिक्षा भी पीबीएस में नहीं हो सकी अबतक शुरू बांका : शिक्षा आज सबसे बड़ी जरूरत बन गयी है. बगैर शिक्षा का मानव संपूर्ण विकास नहीं कर सकता है. मौजूदा समय हर माता-पिता का सपना होता है कि वे अपने बच्चे को बढ़िया से बढ़िया विद्यालय में शिक्षा दे सके. इस […]

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महत्वपूर्ण विषय कॉमर्स की शिक्षा भी पीबीएस में नहीं हो सकी अबतक शुरू

बांका : शिक्षा आज सबसे बड़ी जरूरत बन गयी है. बगैर शिक्षा का मानव संपूर्ण विकास नहीं कर सकता है. मौजूदा समय हर माता-पिता का सपना होता है कि वे अपने बच्चे को बढ़िया से बढ़िया विद्यालय में शिक्षा दे सके. इस चक्कर में जमीन, घर गिरवी रखने के साथ अतिरिक्त उधार भी लेना पड़ता है. इस जिले से मैट्रिक व इंटर का रिजल्ट निकलने के बाद लाखों छात्र बड़े शहरों का रास्ता नाप लेते हैं. चूंकि जिले में अबतक शिक्षा की वैसी व्यवस्था नहीं हो पायी है कि अभिभावक अपने बच्चों को यहां रखने की रिस्क उठा सके. अभिभावकों की चिंता स्वभाविक है. एक मात्र अंगीभूत पीबीएस कॉलेज की दयनीय स्थिति देख अन्य विद्यालयों का अंदाजा लगाया जा सकता है. पीबीएस कॉलेज की स्थापना 1959 में हुयी. परंतु 59 वर्ष बाद भी पीबीएस में अति महत्वपूर्ण विषय की शिक्षा प्रारंभ नहीं हो सकी है.
तिलका मांझी विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले इस कॉलेज को वाई-फाई सिस्टम से जोड़ दिया गया है. हाल में कई आलीशान बिल्डिंग का भी निर्माण किया गया. परंतु छह दशक बीतने को है, बावजूद कॉमर्स, भूगोल, समाजशास्त्र, इतिहास जैसे प्रमुख विषयों की शिक्षा अब भी अंधकारमय नजर आ रहा है. हाल में मैट्रिक व इंटर का परिणाम आने के बाद छात्र-छात्राएं अपने-अपने विषय व शिक्षा व्यवस्था पर चिंतन-मंथन कर रहे हैं. ज्यादातर, बच्चे बाहर ही अच्छे कॉलेज में दाखिला लेना चाहते हैं. हालांकि गरीब छात्र किसी तरह यहीं रहकर ही आगे की पढ़ाई को मजबूर हैं. परंतु ऐसे बच्चे शिक्षा सुधार की मांग भी कर रहे हैं.
लाइब्रेरी में पुस्तक का अकाल
पीबीएस कॉलेज में नया पुस्तकालय भवन का निर्माण किया गया है. परंतु पुस्तकालय में एक भी पुस्तक मौजूद नहीं है. छात्र संघ ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि पुस्तक की खरीद में कॉलेज प्रशासन कोताही बरत रही है. जिसकी वजह से छात्र-छात्राएं तरह-तरह के ज्ञान बटोरने से वंचित रह जा रहे हैं. पुस्तकालय में उपयोगी पुस्तक का होना अनिवार्य है, अन्यथा कॉलेज का पूरा अर्थ अधूरा रह जाता है.
13 प्रोफेसरों के भरोसे पीबीएस की शिक्षा प्रमुख विषय के सात प्रोफेसरों का पद रिक्त
जिले के एकमात्र अंगीभूत कॉलेज मात्र 13 शिक्षकों के भरोसे हैं. जानकारी के मुताबिक प्रमुख विषय के करीब सात प्रोफेसरों का पद लंबे समय से रिक्त है. यही नहीं इस मार्च तक कई शिक्षक सेवानिवृत के मुहाने पर भी खड़े हैं. ऐसी स्थिति में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करना बेमानी है. सूत्र के मुताबिक रिक्त पद के लिए कई बार यूनिवर्सिटी को लिखित मांग की गयी.
परंतु वहां से भी टाल-मटोल का रवैया बरकरार है.
कॉलेज स्थापना के छह दशक बीत जाने के बावजूद अबतक कॉमर्स, इतिहास, भूगोल सहित अन्य महत्वपूर्ण व लोकप्रिय विषय की शिक्षा शुरू नहीं हुई है, जो चिंता का विषय है. इस मुद्दे को लेकर छात्र संघ गंभीर है. राज्यपाल तक बात पहुंचायी गयी है. अगर अपेक्षित परिणाम नहीं मिले तो आंदोलन किया जायेगा.
सौरभ जादोन, अध्यक्ष, पीबीएस कॉलेज छात्र संघ
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