बिहार के बख्तियारपुर-मोकामा और सहरसा-उमगांव फोरलेन सड़क निर्माण की बढ़ सकती है समय-सीमा, जानें कारण

Updated at : 19 Jan 2023 11:32 PM (IST)
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बिहार के बख्तियारपुर-मोकामा और सहरसा-उमगांव फोरलेन सड़क निर्माण की बढ़ सकती है समय-सीमा, जानें कारण

सहरसा-उमगांव एनएच के चौथे चरण में पश्चिमी कमला बांध से सुपौल के परसरमा के बीच कोसी नदी पर बनने वाले पुल की धीमी प्रगति के कारण इसका निर्माण पूरा करने की समय-सीमा बढ़ सकती है. वहीं बख्तियारपुर-मोकामा सड़क के लिए किये गये जमीन अधिग्रहण में अब भी किसानों को मुआवजे का भुगतान बकाया है.

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बिहार में फोरलेन बख्तियारपुर-मोकामा एनएच-31 सहित सहरसा-उमगांव के बीच बनने वाले कोसी पुल के निर्माण की धीमी प्रगति की वजह से दोनों परियोजनाओं की समय-सीमा बढ़ सकती है. फिलहाल दोनों परियोजनाओं को पूरा करने की समय-सीमा 2023 है. 44.6 किमी लंबाई में बन रहे बख्तियारपुर-मोकामा फोरलेन एनएच-31 का निर्माण करीब 837 करोड़ रुपये की लागत से जून 2017 में शुरू हुआ था.

बख्तियारपुर-मोकामा सड़क का 60 फीसदी निर्माण ही पूरा हो सका है

पहले इसका निर्माण दिसंबर 2020 में पूरा करने की समय-सीमा तय थी, लेकिन जमीन अधिग्रहण की समस्या से इसकी समय-सीमा बढ़ा कर मार्च 2023 कर दी गयी थी. इसके बावजूद अब तक इस सड़क का करीब 60 फीसदी निर्माण ही पूरा हो सका है. इसके लिए किये गये जमीन अधिग्रहण में अब भी किसानों को मुआवजे का भुगतान बकाया है. इस सड़क का निर्माण होने से पटना से लखीसराय, बेगूसराय आने-जाने वालों को सुविधा होगी.

कोसी नदी पर बन रहा पुल

वहीं ,सहरसा-उमगांव एनएच के चौथे चरण में पश्चिमी कमला बांध से सुपौल के परसरमा के बीच कोसी नदी पर बनने वाले पुल की धीमी प्रगति के कारण इसका निर्माण पूरा करने की समय-सीमा बढ़ सकती है. फिलहाल एप्रोच रोड सहित यह पुल करीब 13.3 किमी की लंबाई में करीब 1101 करोड़ रुपये की लागत से फरवरी 2020 से बन रहा है. इसका निर्माण पूरा होने की समय- सीमा अगस्त 2023 है. इस पुल का निर्माण गैमन-ट्रांसरेल (जेवी) कर रहा है.

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सहरसा-उमगांव का 40 फीसदी निर्माण ही हो सका है पूरा

सूत्रों के अनुसार अब तक इस पुल का केवल 40 फीसदी ही निर्माण हुआ है. इसके निर्माण की गति धीमी होने की मुख्य वजह मधुबनी जिले में जमीन अधिग्रहण की समस्या बतायी जाती है. इस पुल सहित सड़क का निर्माण होने से मधुबनी से सुपौल के लिए नया रास्ता मिल सकेगा. साथ ही पहले के मुकाबले मधुबनी और सुपौल की दूरी करीब 50 किमी घट जायेगी. इसके साथ ही सीमांचल और मिथिलांचल के बीच आवागमन में सुविधा बढ़ जायेगी.

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