हसपुरा. हसपुरा शहर के चौराही रोड स्थित बुढ़वा महादेव और पुरानी देवी मंदिर के प्रांगण में आयोजित नौ दिवसीय रामलीला का समापन को हो गया. रामलीला के समापन को लेकर विशेष आयोजन किया गया था. रावण वध के बाद श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में आयोजकों ने दीप यज्ञ और भंडारे का आयोजन किया. आयोजन का शुभारंभ श्रीराम की आरती से किया गया. इसमें पूर्व विधायक डॉ रणविजय कुमार, डॉ विपिन सिंह, विजय अकेला, पंसस डॉ ब्रह्मदेव प्रसाद, मुखिया प्रतिनिधि राकेश सिंह, रिटायर्ड शिक्षक कुलदीप चौधरी समेत अन्य लोगों ने भाग लिया. रामलीला उत्सव को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि रामायण के सभी पात्र महान हैं. बुद्धि, बल और ऐश्वर्य के मामले में राम से भी आगे थे. लेकिन पूजे राम जाते हैं, क्योंकि उन्होंने मर्यादा सिखायी. राम ने भाई का भाई से, पुत्र का माता-पिता से, मित्र का एक मित्र से, राजा का प्रजा से कैसा संबंध हो, इसका आदर्श स्थापित किया. इसलिए मर्यादा पुरुषोत्तम हैं. इस आयोजन का मकसद तभी सफल होगा, जब हम इन चरित्रों का गुण अपने में समाहित करेंगे. रामलीला के आयोजन का अंतिम दिन होने के कारण दर्शकों की भारी भीड़ जुटी थी. रामलीला पंडाल खचाखच भरा हुआ था, जिसमें महिलाओं की संख्या काफी अधिक थी. रामलीला के समापन की जैसे ही घोषणा हुई, ग्रामीणों ने प्रयाग से आये रामलीला कलाकारों को उपहार देकर विदा किया. श्री रामायण धर्म प्रचारक मंडली प्रयागराज के संचालक जितेंद्र पांडेय ने कहा कि हमें हसपुरा के ग्रामवासियों ने बहुत प्यार दिया. अंतिम दिन रामलीला में दिखाया गया कि मेघनाद, कुंभकर्ण आदि महारथी योद्धाओं के मारे जाने के बाद रावण आपा खो देता है. स्वयं युद्ध करने के लिए आता है. राम-रावण का युद्ध देखने देवता भी आते हैं. रावण, राम से घनघोर युद्ध करता है. राम एक-एक कर रावण के दसों सिर काट देते हैं, लेकिन फिर उसके सिर जुड़ जाते हैं. तब विभीषण राम को बताते हैं कि रावण की नाभि में अमृत है. यह जानकर राम रावण की नाभि में अग्निबाण मारते हैं. बाण लगते ही रावण कटे वृक्ष के समान धरती पर गिर जाता है.
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