टीडीबी कॉलेज में मुंशी प्रेमचंद जयंती पर विशेष व्याख्यान, साहित्य के नवमूल्यांकन पर हुई चर्चा

रेवेंशॉ विश्वविद्यालय, कटक (ओडिशा) के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक शर्मा वक्तव्य देते
Aurangabad News : रानीगंज के टीडीबी कॉलेज में मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती पर विशेष व्याख्यान का आयोजन, जीवनी साहित्य के नवमूल्यांकन पर विशेषज्ञों ने रखे अपने विचार।
Aurangabad News : रानीगंज स्थित त्रिवेणी देवी भालोटिया (टीडीबी) कॉलेज के हिंदी विभाग की ओर से कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती के अवसर पर 'प्रेमचंद के जीवनी साहित्य का नवमूल्यांकन' विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ मुंशी प्रेमचंद एवं रवींद्रनाथ टैगोर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना और स्वागत गीत के साथ हुआ.
मुख्य वक्ता का किया गया सम्मान
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रेवेंशॉ विश्वविद्यालय, कटक (ओडिशा) के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक शर्मा का प्राचार्य डॉ. संजीव पांडेय ने उत्तरीय, पुष्पगुच्छ और स्मृति-चिह्न भेंटकर सम्मानित किया. स्वागत भाषण में प्राचार्य डॉ. संजीव पांडेय ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को समझने का सशक्त माध्यम है और आज भी पूरी तरह प्रासंगिक बना हुआ है.
प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान पर वक्ताओं ने रखे विचार
उर्दू विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापिका डॉ. साबेरा खातून ने प्रेमचंद के हिंदी और उर्दू साहित्य में योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी अनेक रचनाएं पहले उर्दू में लिखी गईं और बाद में हिंदी में प्रकाशित हुईं. वहीं बांग्ला विभाग की डॉ. राजश्री बोस ने प्रेमचंद और शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के साहित्य की समानताओं पर विस्तार से चर्चा की. डॉ. मीना कुमारी ने मुख्य वक्ता का परिचय प्रस्तुत किया.
प्रेमचंद के जीवन और साहित्य के नए मूल्यांकन पर दिया जोर
अपने व्याख्यान में डॉ. अभिषेक शर्मा ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व, पारिवारिक जीवन, आर्थिक संघर्ष और साहित्य-सृजन के विभिन्न पक्षों का विश्लेषण किया. उन्होंने अमृत राय की 'कलम का सिपाही', शिवरानी देवी की 'प्रेमचंद घर में' तथा कमल किशोर गोयनका के 'प्रेमचंद विश्वकोश' का उल्लेख करते हुए प्रेमचंद के जीवन और साहित्य के नए मूल्यांकन की आवश्यकता पर बल दिया.
शोधार्थी ने बताई कहानियों की समकालीन प्रासंगिकता
शोधार्थी आशुतोष मणि त्रिपाठी ने प्रेमचंद की कहानियों की समकालीन प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे. उन्होंने होरी और धनिया जैसे पात्रों के माध्यम से सामाजिक चेतना और ग्रामीण जीवन के यथार्थ का विश्लेषण किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापिका डॉ. मंजुला शर्मा ने की. उन्होंने अपने संबोधन में प्रेमचंद के साहित्य की मानवीय दृष्टि और सामाजिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया.
छात्राओं ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
इस अवसर पर छात्राओं ने सरस्वती वंदना, स्वागत गीत तथा स्वरचित कविताओं का पाठ प्रस्तुत किया. कार्यक्रम का संचालन छोटेलाल प्रसाद ने किया, जबकि संयोजन हिंदी विभाग के यूजी कोऑर्डिनेटर डॉ. आलम शेख ने किया. धन्यवाद ज्ञापन डॉ. जयराम पासवान ने किया. कार्यक्रम में डॉ. किरण लता दुबे, डॉ. रीना तिवारी, डॉ. गणेश रजक सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे.
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