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विषम परिस्थिति से गुजर रहे अनुदानित शिक्षण संस्थान के कर्मी

Updated at : 08 Sep 2025 6:46 PM (IST)
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विषम परिस्थिति से गुजर रहे अनुदानित शिक्षण संस्थान के कर्मी

मांगों को लेकर कर रहे हैं पुरजोर संघर्ष, आज से आमरण अनशन

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मांगों को लेकर कर रहे हैं पुरजोर संघर्ष, आज से आमरण अनशन

औरंगाबाद/कुटुंबा़ अनुदानित शिक्षण संस्थान के कर्मी फिलहाल विषम परिस्थिति से गुजर रहे हैं. सरकार के वित्त रहित शिक्षा नीति की समाप्ति और रिजल्ट आधारित अनुदान उनके लिए छलावा साबित हो रहा है. त्रासदी का दंश झेल रहे शिक्षक व कर्मी अब अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे है.इस बात की चर्चा जिले के हर वित्त रहित शिक्षण संस्थानों में हैं. जानकारी के अनुसार प्रत्येक शिक्षण संस्थान के अधिकांश कर्मी अपनी ज्वलंत मुद्दो को लेकर पटना में अड़े हुए है. वहीं जो शिक्षण संस्थान में मौजूद हैं वे हाथ में काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं. अनुदान नहीं वेतनमान फोरम के जिला संयोजक श्याम पाठक ने कहा कि पूरे प्रदेश में शिक्षा के अलख जगाने वाले वित्त रहित शिक्षण संस्थान के शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारी भूखमरी के कगार पर पहुंच गये हैं. जांच के नाम पर उनके शिक्षण संस्थानों का कोड निरस्त कर बंद किया जा रहा है. कभी एक ऐसा भी समय रहा था, कि बिहार में हाइ स्कूल, इटंर व डिग्री कालेजों की काफी कमी थी.बड़े-बड़े शहरों में एक दो कालेज होते थे. ऐसे में साधारण परिवार, किसान, मजदूर व मध्यमवर्ग के लोग अपने बेटे- बेटियां को बाहर भेजकर पढ़ा पाने में सक्षम नहीं होते थे. इसके बावजूद विपरीत परिस्थिति में वित्त रहित शिक्षण संस्थान के कर्मियो ने प्रखंड स्तर पर स्कूल व कॉलेज खोलकर हर घर के बच्चों को शिक्षित सभ्य व सुसंस्कृत बनाने का काम किया है. महिला कालेज के प्राचार्य दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि उनकी समस्याओं को सुनने के लिए कोई अधिकारी तैयार नहीं है. संघ के जिलाध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि बिहार बोर्ड के अधिकारी शासी निकाय व प्रबंध समिति के गठन करने में भी रुचि नहीं ले रहे हैं. जिला संयोजक श्री पाठक ने बताया कि लगातार आंदोलन के बावजूद सरकार द्वारा अब तक पहल नहीं की गयी है. अब मंगलवार से आंदोलन का तीसरा चरण शुरू होगा. इस क्रम में गांधी मैदान पटना स्थित गांधी स्मारक के समीप वितरहित शिक्षक एवं शिक्षेतरकर्मी आमरण अनशन पर बैठेंगे.

बिना मानक पूरा किये प्राइमरी स्कूलों को किया गया अपग्रेड

सूर्य नारायण इंटर कॉलेज देव के प्रधानाचार्य अनिल कुमार सिंह आदि संघ के नेताओं ने कहा कि बगैर मानक पूरा किये प्राइमरी स्कूलों को मिडिल स्कूल तत्पश्चात पल्स टू स्कूल में अपग्रेड कर दिया गया है. वहीं भूमि भवन संसाधन रहने के बावजूद वित्त रहित्त शिक्षण संस्थान के कर्मियों के साथ पक्षपात किया जा रहा है. प्राचार्य सह संयोजक शिव कुमार पाठक व वीर कुंवर सिंह कालेज नवीनगर के पूर्व प्राचार्य श्रीकांत तिवारी, जनता कालेज के प्राचार्य विनय सिंह आदि ने बताया कि वित्त रहित शिक्षा नीति की कलंकित व्यवस्था में वांछित सुधार की जरूरत है.

ये है कर्मियों की मुख्य मांगें

वित्त रहित शिक्षकेतर कर्मचारियों के मुख्य मांगो में अनुदान के बदले वेतनमान, पूर्व के बकाये अनुदान की राशि का एक मुश्त भुगतान, रिटायर्ड कर्मियों की उम्र सीमा में वृद्धि तथा सेवा शर्तो को लागू करते हुए सेवानिवृत्ति के पश्चात एकमुश्त राशि का भुगतान किया जाना, जांच के नाम पर निरस्त किए गए कोड को पुनः बहाल करना आदि शामिल है. संघ का कहना है कि जबतक सरकार हमारी मांगों पर विचार नहीं करती है,तबतक हम सभी सड़क से लेकर सदन तक प्रदर्शन करेंगे. उन्होंने बताया कि वित्तरहित शिक्षकों को वेतनमान देने के लिए शिक्षा समिति की अनुशंसा को लागू नहीं किये तथा वेतन पेंशन देने के लिए पटना हाईकोर्ट के न्यायादेश का पालन बिहार सरकार द्वारा नहीं किये जाने से शिक्षाकर्मियों में घोर निराशा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUJIT KUMAR

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SUJIT KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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