Aurangabad News: युवाओं के जोश में खेल मैदान बन रहे बाधा

Updated at : 19 Apr 2025 11:01 PM (IST)
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Aurangabad News: युवाओं के जोश में खेल मैदान बन रहे बाधा

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Aurangabad News:स्टेडियम में बेहतर सुविधा बहाल हो तो नहीं होगी मेडल की कमी

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दाउदनगर. मेडल लाओ-नौकरी पाओ. बिहार सरकार की यह पहल युवाओं को काफी आकर्षित कर रहा है. यही कारण है कि हाल के वर्षों में खेल से जुड़ी गतिविधियों में युवाओं की रुचि बढ़ी है. जिले के छात्र व युवा कई प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में सफलता हासिल किये हैं. हालांकि, युवाओं को खेल से संबंधित तैयारी के लिए उचित सुविधा की कमी खलती रहती है. जाहिर है जब सबकुछ बेहतर होगा तो युवाओं के जोश व जुनून में बढ़ोतरी होगी. प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे ही युवाओं से बातचीत की गयी जो अपने बल पर ही सही अपने भविष्य को गढ़ने में लगे हुए है. बातचीत में युवाओं ने सरकारी स्तर पर सुविधाएं बढ़ाये जाने पर बल दिया. जब तक खेलों के लिए सुविधाओं के साथ बेहतर माहौल नहीं बनेगा खिलाड़ी अभ्यास नहीं कर पायेंगे. राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान बनाने के लिए नियमित अभ्यास की जरूरत है. नियमित अभ्यास ही खिलाड़ियों को मेडल दिलाने में सहायक साबित होगा़ इसी सब पर आधारित है इस बार का प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम.

असुविधा झेलते हुए करना पड़ रहा अभ्यास

बिहार पुलिस, होमगार्ड आदि की बहाली में शारीरिक दक्षता की जरूरत होती है. शारीरिक दक्षता को प्राप्त करने के लिए कुशल प्रशिक्षण एवं अभ्यास की आवश्यकता होती है. जब क्षेत्र में उचित फील्ड ही नहीं हो और सुविधाएं ही नदारद हो तो फिर कुशल प्रशिक्षण और अभ्यास कहां से मिलेंगे. विभिन्न बहालियों के लिए तैयारी कर रहे युवक-युवती, फुटबॉल, क्रिकेट खेलने वाले एवं एथलीट खिलाड़ियों के लिए दाउदनगर में एक स्टेडियम तक की व्यवस्था नहीं है. फिर भी अपने-अपने नजदीकी खेल मैदानों पर युवक-युवतियां अभ्यास व प्रशिक्षण प्राप्त करते दिख जाते हैं. स्थिति यह भी है कि कुछ ग्रामीण क्षेत्र से भी युवक-युवती अभ्यास करने के लिए दाउदनगर पहुंचते हैं या दूर के ग्रामीण क्षेत्रों के युवक-युवती सिर्फ अभ्यास करने के लिए दाउदनगर शहर में किराये के मकान पर रह रहे हैं. वैसे युवक-युवतियों ने एक स्वर में कहा कि खेल मैदानों पर सुविधा ही नहीं है. असुविधा को झेलते हुए अभ्यास करना पड़ता है. एक खास बात यह दिखी कि बेटियां भी बेटों के मुकाबले अब कम नहीं है. काफी संख्या में युवतियां प्रेक्टिस करने के लिए पहले सुबह खेल मैदानों पर पहुंच जा रही हैं .हालांकि, इनका कहना है कि कम से कम खेल मैदानों तक पहुंचने वाले रास्तों में और खेल मैदानों पर रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए. पुलिस की पेट्रोलिंग की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि घर की बेटियां खेल मैदानों तक पहुंचने में अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सकें और कुशल प्रशिक्षण प्राप्त कर व अभ्यास कर अपने सपने को पूरा कर सकें. देश एवं राज्य के विकास एवं सुरक्षा में अपना योगदान दे सकें. खेल मैदान पर प्रेक्टिस करने वाले अधिकांश युवतियां होमगार्ड, बिहार पुलिस तथा दरोगा की तैयारी में लगी हुई दिखी.

शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक स्टेडियम का अभाव

दाउदनगर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक स्टेडियम का अभाव है. राष्ट्रीय स्कूल मैदान खेल मैदान पर 2011-12 में स्टेडियम का निर्माण कराया गया था, जो कभी चालू ही नहीं हुआ. यह पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है. इसकी दीवाल क्षतिग्रस्त हो चुकी है. स्टेडियम में बनाये गये कमरे क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. इसकी कीवाड़ और खिड़की का कोई अता-पता नहीं है. स्टेडियम के गेट का भी कोई अता-पता नहीं है. इसकी देख-रेख भी करने वाला कोई नहीं है. जब स्टेडियम नहीं था, तो इस खेल मैदान पर कोई न कोई आयोजन होते रहता था, लेकिन जब से यह स्टेडियम बना है, तब से शायद ही एकाध आयोजन इस पर हुआ हो.

अन्य खेलों के लिए भी मैदानों की हालत खराब

दाउदनगर शहर में एकमात्र खेल मैदान अशोक इंटर स्कूल का खेल मैदान है, जहां शहर के युवक एवं युवतियां अभ्यास करने पहुंचते हैं. डायट तरार मैदान पर भी लोग अभ्यास करने पहुंचते हैं, लेकिन आने वाले समय में इसकी भी चहारदीवारी हो सकती है. इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में यदि देखें तो तरार खेल मैदान, एकंनी इंटर स्कूल खेल मैदान, चौरम खेल मैदान, नीमा फील्ड ऐसे प्रमुख मैदान हैं, जहां अहले सुबह से ही युवक-युवती अभ्यास करने पहुंच जाते हैं. ये सब कहने को तो खेल मैदान हैं, लेकिन सुविधाएं नदारद है. सुबह में मॉर्निंग वाक करने वाले लोग पहुंचते हैं. अभ्यास करने वाले युवा पहुंचते हैं. फुटबॉल तो अब लगभग लुप्त ही हो चुका है. इसलिए फुटबॉल का अभ्यास करते शायद ही कोई दिखता हो. हां, क्रिकेट का अभ्यास करते लोग जरूर दिख जाते हैं. बॉलीबाल व बैडमिंटन खेलते दिखते हैं. कुछ खेल मैदानों पर कभी-कभी फुटबॉल या क्रिकेट की प्रतियोगिताएं जरूर देखी जाती हैं. सूरज की पहली किरण निकलने के पहले ही लोग सपनों से भरे कदम दौड़ लगाना और खेल को शुरू कर देते हैं.

फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए यह समस्या और भी गंभीर

फिलहाल खेल मैदान के नाम पर जहां युवा तैयारी कर रहे हैं वहां कोई सुविधा भी उपलब्ध नहीं है. न तो पीने के पानी की व्यवस्था है और न शौचालय की व्यवस्था है. घास नहीं होने के कारण मैदान में हर वक्त धूल उड़ते रहता है. इससे प्रेक्टिस करना भी मुश्किल हो गया है. वॉशरूम नहीं है. लाइट की व्यवस्था नहीं है .अशोक इंटर स्कूल खेल मैदान पर हाल में नगर पर्षद द्वारा एक हाइ मास्ट लाइट लगाया गया है, लेकिन उसे भी पर्याप्त नहीं कहा जा सकता. लोगों का कहना है कि खेल मैदानों में घास नहीं है. इसके कारण कभी-कभी खिलाड़ी या एथलीट अभ्यास करते हैं तो अक्सर गिरकर चोटिल हो जाते हैं. फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए यह समस्या और भी गंभीर है, क्योंकि यह खेल शारीरिक संपर्क पर आधारित होते हैं. घास नहीं रहने के कारण मैदान काफी सख्त हो गयी है, जिससे गिरने पर गंभीर चोटिल होने की संभावना बनी रहती है. एथलीट एवं अन्य खिलाड़ियों ने बताया कि बरसात में पानी जमा हो जाता है. जल निकासी की भी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे अभ्यास प्रभावित होता है.

प्रेक्टिस करने में करना पड़ता है दिक्कतों का सामना

अशोक इंटर स्कूल खेल मैदान पर प्रेक्टिस करने वाले युवाओं ने बताया कि इस खेल मैदान के आस-पास काफी संख्या में घरों का निर्माण हो गया है. इसके कारण कई बार ऐसा होता है कि गृह स्वामी द्वारा निर्माण सामग्री खेल मैदान पर ही गिरवा दिया जाता है, जिससे अभ्यास करने में भी असुविधा होती है. कभी-कभी पानी या कचरा भी खेल मैदान पर ही फेंक दिया जाता है. इसके कारण भी प्रेक्टिस करने में असुविधा होती है. कुल मिलाकर यदि कहा जाये तो असुविधाओं को झेलते हुए एथलीट एवं खिलाड़ी प्रैक्टिस कर रहे हैं. एक सुनहरे सपने के साथ प्रैक्टिस कर रहे हैं. उनके सपने को पंख देने के लिए स्थानीय स्तर पर कुछ निजी प्रशिक्षक भी हैं.

इंडोर स्टेडियम के लिए नहीं मिली जगह

पिछले दो-तीन वर्षों से दाउदनगर शहर में इंडोर स्टेडियम के लिए प्रशासन द्वारा जगह की तलाश की जा रही है, लेकिन अब तक जगह चिह्नित नहीं हो सकी है. कई जगहों को प्रशासनिक पदाधिकारी द्वारा देखा गया, लेकिन किसी भी जगह का अंतिम रूप से चयनित हो पाने की सूचना नहीं है. एक तरफ जहां यहां आउटडोर स्टेडियम नहीं है, वहीं दूसरी तरफ इंडोर स्टेडियम का भी अभाव है. आखिर खिलाड़ी एवं प्रशिक्षु जाये तो कहां जाएं. बीच में कभी-कभी चौरम खेल मैदान पर स्टेडियम निर्माण कराने की चर्चा तो उठी, लेकिन वह चर्चा तक की सीमित होकर रह गयी.

विद्यालयों के खेल मैदान को डेवलप किये जाने की जरूरत

वैसे तो सरकार द्वारा सरकारी हाई स्कूलों में फिजिकल टीचर की पदस्थापना की गयी है, जिनके द्वारा पीटी आदि कराया जाता है. लेकिन उन विद्यालयों के खेल मैदानों को भी विकसित करने की आवश्यकता है. कई विद्यालयों के पास खेल मैदान तो हैं, लेकिन उसकी देख-भाल सही तरीके से नहीं हो पा रही है. उन खेल मैदानों पर युवा सुबह-शाम अभ्यास तो करते दिखते हैं, लेकिन नियमित अभ्यास के लिए कोई सुविधा नहीं दिखती है. विद्यालयों के खेल मैदान की स्थिति यह है कि उन मैदानों पर ग्रामीण अहले सुबह ही अभ्यास करने एवं सैर-सपाटा करने पहुंच जाते हैं. शाम में भी ग्रामीण एवं युवा अभ्यास के लिए पहुंचते हैं या शहर से पैदा करने पहुंचते हैं. अहले सुबह और शाम में पूरा खेल मैदान अंधेरे में डूबा रहता है. ग्रामीणों का कहना है कि कई खेल मैदानों की स्थिति है कि थोड़ी सी बारिश होने पर भी जल जमाव हो जाता है. इसके कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है. ऐसे खेल मैदानों को विकसित किये जाने की आवश्यकता है, जिससे ग्रामीण प्रतिभाओं की प्रतिभा में निखार आ सकेगा और ग्रामीणों के लिए सुविधाजनक होगा.

खेलों में दाउदनगर का रहा है बेहतर इतिहास

युवाओं ने कहा कि अनुमंडल ने खेल व एथलीट के क्षेत्र में कई प्रतिभाएं दी हैं. एक समय ऐसा था, जब अहले सुबह होते ही यहां एथलीट दौड़ का अभ्यास करने घरों से निकल जाते थे, जिनमें से अधिकतर आज नौकरी में हैं. वैसे, आर्मी या बिहार पुलिस में जाने का सपना संजोये युवा आज भी खेल मैदानों में चक्कर काटते तो दिखते हैं, मगर वह खेल मैदान सिर्फ नाम के हैं. प्रखंड के लगभग सारे खेल मैदान सिर्फ नाम के रह गये हैं .न तो खेल मैदान व्यवस्थित हैं और न ही उन्हें विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है. दाउदनगर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक खेलकूद गतिविधियों का भी एक अलग इतिहास रहा है. यहां की फुटबॉल टीम राज्य एवं राज्य के बाहर जाकर खेल चुकी है. क्रिकेट टीम ने भी अंतर जिला क्रिकेट टूर्नामेंट में भाग लिया है. यहां के निवासी कई खिलाड़ी स्थानीय स्तर पर ही प्रैक्टिस कर कई बड़े-बड़े टूर्नामेंटों में भाग ले चुके हैं, लेकिन दाउदनगर शहर में कोई भी ऐसी जगह नहीं है, जहां लोग सही तरीके से अभ्यास कर सकें. खेल के विकास के लिए सिर्फ कागज पर ही बातें होती दिखती हैं. धरातल पर कहीं कुछ नहीं दिखता है. न ही इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक स्तर पर देखी जा रही है.

रग्बी फुटबॉल चैंपियनशिप के दौरान दिखी अव्यवस्था

तीन से पांच अप्रैल तक दाउदनगर के तरार खेल मैदान पर राज्य स्तरीय फुटबॉल चैंपियनशिप का आयोजन किया गया. इसमें राज्य के विभिन्न जिलों के महिला और पुरुष खिलाड़ियों ने भाग लिया. इस दौरान खेल मैदानों की अव्यवस्था को सभी ने महसूस किया. समापन समारोह में बिहार के खेल मंत्री सुरेंद्र मेहता एवं राज्यसभा सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा पहुंचे थे, जो देर शाम तक समापन समारोह में मौजूद रहे थे. इन दोनों ने भी मैदान की अव्यवस्था को देखा होगा. उपेंद्र कुशवाहा द्वारा यह घोषणा की गयी कि इस खेल मैदान पर अगले आयोजन से पहले लाइट की व्यवस्था होगी, जबकि खेल मंत्री द्वारा कहा गया कि सरकार द्वारा सभी प्रखंडों में आउटडोर स्टेडियम का निर्माण कराये जाने की योजना है. पंचायत में खेल मैदान बनाए जा रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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