अंबा. निजी विद्यालय में पढ़ाई कर रहे बच्चों को विभाग द्वारा सरकारी स्कूल में अध्यनरत बताया जाना कतई उचित नहीं है. ये बातें बिहार पब्लिक स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अजय पांडेय ने कहीं. प्रेस बयान के माध्यम से उन्होंने बताया कि कई बच्चों का नाम सरकारी एवं प्राइवेट दोनों विद्यालय में है. ऐसी परिस्थिति में सरकार द्वारा सभी विद्यालय से बच्चों का आंकड़ा यू-डैस पर स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया था. ऐसे में बाल विकास विद्यालय देवरिया द्वारा स्कूल में अध्यनरत बच्चों की आंकड़ा जब यू-डैस पर डाला गया, तो विभाग द्वारा उक्त विद्यालय में अध्यनरत 25 बच्चों का नाम सरकारी विद्यालय में दर्शा दिया गया. उन्होंने बताया कि विभाग का यह कृत सरकारी नियमावली एवं नैतिकता के विपरीत है. मामले को लेकर उक्त विद्यालय के कंप्यूटर टीचर मनोरंजन कुमार ने जिलाधिकारी के नाम आवेदन देकर जांच कराने की मांग की है. जिलाध्यक्ष ने कहा कि बच्चों के पास निजी विद्यालयों का आइ कार्ड उपलब्ध है. निजी विद्यालय के नामांकन पंजी, उपस्थिति पंजी का अवलोकन तथा बच्चों के शैक्षणिक गतिविधि से भी मामले की जांच की जा सकती है. अभिभावकों की सहमति तथा भौतिक सत्यापन व साक्ष्य के बगैर निजी स्कूल से बच्चों का नामांकन एक ही दिन सामूहिक रूप से कर निरस्त किया जाना सरकारी नियम की अनदेखी है. इसके साथ ही विभागीय अधिकारी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ भी कर रहे हैं. उन्होंने विभाग से इसकी जांच करते हुए उचित निर्णय लेने का अनुरोध किया है. उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच कराने, सामूहिक निरस्तीकरण आदेश को तत्काल स्थगित किये जाने, दोषी पदाधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई किये जाने की मांग की है. बताया कि यदि अधिकारी इस पर सही निर्णय नहीं लेते हैं, तो आगे की रणनीति तैयार की जायेगी.
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