Aurangabad news. डायबिटीज विशेषज्ञ डॉक्टरों का दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस 29 से

Updated at : 24 Mar 2025 8:17 PM (IST)
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Aurangabad news. डायबिटीज विशेषज्ञ डॉक्टरों का दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस 29 से

Aurangabad news देश में तेजी से बढ़ते मधुमेह के रोगियों के बेहतर और आधुनिक पद्धति से उपचार, इस क्षेत्र में नित हो रहे नये अन्वेषण और शोध को लेकर डायबिटीज विशेषज्ञ चिकित्सकों के दो दिवसीय राज्यस्तरीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन औरंगाबाद में 29 और 30 मार्च को किया जायेगा.

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औरंगाबाद शहर. देश में तेजी से बढ़ते मधुमेह के रोगियों के बेहतर और आधुनिक पद्धति से उपचार, इस क्षेत्र में नित हो रहे नये अन्वेषण और शोध को लेकर डायबिटीज विशेषज्ञ चिकित्सकों के दो दिवसीय राज्यस्तरीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन औरंगाबाद में 29 और 30 मार्च को किया जायेगा. यह आयोजन रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया के बिहार चैप्टर की ओर से किया जा रहा है. आरएसएसडीआइ बिहारकॉन के आयोजन सचिव डॉ बीके सिंह ने बताया कि औरंगाबाद स्थित एमएलएस कॉलेज ऑफ फार्मेसी ऑडिटोरियम में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन 29 मार्च को शाम सात बजे होगा. उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि आरएसएसडीआइ के अध्यक्ष डॉ अनुज माहेश्वरी होंगे, जबकि विशिष्ट अतिथि सीसीडीएसआइ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ एएन राय होंगे. आइसीपी के डीन डॉ कमलेश तिवारी होंगे. उन्होंने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस के दौरान 15 से अधिक सत्र आयोजित किये जायेंगे. इनमें मधुमेह जैसी बीमारी के कारण, उपचार बचाव आदि विषय पर 75 से अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक अपना व्याख्यान और शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे. चिकित्सा के क्षेत्र में अतिमहत्वपूर्ण इस कॉन्फ्रेंस में बिहार के 280 से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टरों के अलावा दिल्ली समेत देश के विभिन्न भागों से 20 से अधिक राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय ख्यातिलब्ध चिकित्सक भाग लेंगे. इस आयोजन में मेडिसिन में स्नातकोत्तर (एमडी) की पढ़ाई कर रहे युवा चिकित्सकों को भी आमंत्रित किया गया है. डॉ सिंह ने बताया कि भारत में मधुमेह के रोगियों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है और यह मधुमेह की राजधानी बनती जा रही है. इसपर नियंत्रण पाने के लिए मधुमेह के विशेषज्ञ डॉक्टर निरंतर प्रयास और मंथन कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि संयमित जीवन, आहार, व्यायाम को अपनाकर मधुमेह पर आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि मधुमेह को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई है और लोग इसके उपचार तथा नियंत्रण के लिए विधिवत प्रणाली को न अपनाकर अपने ढंग से भी इलाज करने लगते हैं. स्वयं अपनाने वाली तथा नीम-हकीमों से सुनी सुनाई पद्धति मधुमेह रोगियों के लिए खतरनाक है. डॉ सिंह ने कहा कि मधुमेह रोगियों के उपचार और उस पर नियंत्रण को लेकर पूरी दुनिया खासकर भारत के चिकित्सक अति गंभीर हैं और इसका बेहतर निदान निकालने के लिए की दिशा में कार्य कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वर्तमान में भी जो चिकित्सा पद्धति मौजूद है, उसके माध्यम और संयमित जीवन शैली से मधुमेह से होने वाले दुष्परिणामों को पूरी तरह नियंत्रित करने के साथ- साथ उसे आसानी रोका जा सकता है. मौके पर डॉ ओम प्रकाश एवं डॉ एसबी प्रसाद भी उपस्थित थे.

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