गवाहों को धमकानेवालों पर कार्रवाई करे पुलिस
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :17 May 2016 7:58 AM (IST)
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नगर भवन में स्पीडी ट्रायल को लेकर सोमवार को एक कार्यशाला का आयोजन किया गया. जिला जज ने कहा कि जब भी कोई घटना घटती है तो पुलिस पदाधिकारी वहां पर पहुंच कर पूरे मामले की जांच करते हैं. लेकिन, पुलिस अनुसंधान में देरी करते हैं तो उन्हें समस्या उत्पन्न होती है. इसके कारण समय […]
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नगर भवन में स्पीडी ट्रायल को लेकर सोमवार को एक कार्यशाला का आयोजन किया गया. जिला जज ने कहा कि जब भी कोई घटना घटती है तो पुलिस पदाधिकारी वहां पर पहुंच कर पूरे मामले की जांच करते हैं. लेकिन, पुलिस अनुसंधान में देरी करते हैं तो उन्हें समस्या उत्पन्न होती है. इसके कारण समय पर कांड का निष्पादन न्यायालय में नहीं हो पाता है.
औरंगाबाद (नगर) : नगर भवन में स्पीडी ट्रायल को लेकर सोमवार को एक कार्यशाला का आयोजन किया गया. इसका उद्घाटन जिला व सत्र न्यायाधीश बलराम दूबे, डीएम कंवल तनुज, एसपी बाबू राम व सीजेएम गोपालजी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. कार्यक्रम का संचालन वरीय उपसमाहर्ता प्रमोद पांडेय ने किया. इस कार्यशाला में व्यवहार न्यायालय के एपीपी, अधिवक्ता, न्यायिक पदाधिकारी के अलावा जिले के सभी थानाध्यक्ष शामिल हुए. कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला जज ने कहा कि जब भी कोई घटना घटती है तो पुलिस पदाधिकारी वहां पर पहुंच कर पूरे मामले की जांच करते हैं. लेकिन, पुलिस अनुसंधान में देरी करते हैं तो उन्हें समस्या उत्पन्न होती है. इसके कारण समय पर कांड का निष्पादन न्यायालय में नहीं हो पाता है.
कर्तव्य का निर्वहन करें. अन्याय किसी भी सूरत में न करें. इसका परिणाम घातक होता है. पुलिस की जिम्मेवारी सिर्फ एफआइआर व चार्जशीट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि किस कांड में क्या प्रगति हुई है उसकी जानकारी रखनी है. समय पर न्यायालय में गवाह को प्रस्तुत करना है, जो लोग गवाह को तोड़ने व धमकाने का प्रयास करते हैं, वैसे लोगों के पर कार्रवाई भी करें. साक्ष्य के साथ समय पर रिपोर्ट दें, इससे न्यायालय में मामले की जल्द सुनवाई होगी. न्यायालय से जब भी कोई नोटिस, समन जाता है तो कर्तव्य का पालन करते हुए समय पर उसका तामिला करें.
हमलोगों का उद्देश्य है न्याय देना और स्पीडी ट्रायल के तहत फैसला सुनाना . यदि समय पर न्याय होगा तो समाज के साथ-साथ प्रदेश में खुशहाली आयेगी. डीएम कंवल तनुज ने संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी कांड का जड़ अनुसंधान होता है. यदि शुरू में ही अनुसंधान कमजोर हो गया तो कुछ भी प्रयास कर लें, कुछ नहीं होगा. इसके लिये अनुसंधान प्रणाली को मजबूत करना होगा और प्लान बनाकर कार्य करना होगा तभी सबकुछ ठीक रहेगा.
एसपी बाबू राम ने कहा कि संसाधन की कमी है, फिर भी हमलोग इस पर काम कर रहे हैं. कानून कहता है कि जो दोषी है वही जेल जाये. लेकिन, आम लोगों की ये अवधारणा होती है कि छोटे से छोटे मामले में भी जेल भेजा जाये. जनता में विश्वास कायम करने के लिए सही तरीके से काम करना होगा और गलत कार्य करने वाले लोगों को कानून के शिकंजे में कंसना होगा. 125 मामले हमारे यहां स्पीडी ट्रायल के तहत है, जिसमें एक सौ मामले आर्म्स एक्ट का है. इसमें कोई समस्या नहीं आयेगी, इसके लिये स्पेशल सेल बना हुआ है.
एसपी ने थानाध्यक्षों को निर्देश देते हुए कहा कि अनुसंधान सही तरीके से करें. संवेदनशील होकर काम करें. पहले साक्ष्य इकक्ठा करें, फिर समय पर समन का निबटारा करें, जो भी समन कुर्की, वारंट से संबंधित मामला है उसे हर हाल में पांच जून तक निष्पादित करते हुए न्यायालय को रिपोर्ट भेजे. सीजीएम गोपालजी ने संबोधित करते हुए कहा कि ईमानदारी से काम करें, परिणाम अच्छा मिलेगा, कानून के दायरे में रहकर अनुसंधान करें. कोई भी सबूत को नहीं छोड़े, एक चूक आरोपित को फायदा पहुंचा सकता है.
कोर्ट पर नहीं छोड़े, स्वयं को गवाही दिलायें, कोर्ट में गवाही दिलाने के पहले गवाहों को रिहलसल करायें. अधिवक्ता कुमार योगेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि स्पीडी ट्रायल नाम पड़ गया है पर हमलोग स्पीड में नही आते हैं. क्योंकि अनुसंधानकर्ता समय पर न तो न्यायालय में गवाह को प्रस्तुत करते हैं और न ही कोई साक्ष्य. इस लिये ऐसा कार्य करें कि जिस मामले में स्पीडी ट्रायल करानी है, उस मामले का केस डायरी एपीपी को उपलब्ध करायें.
यदि समय पर चार्जशीट व गवाही हो जाता है, तो मैं दावे के साथ कहता हूं कि एक माह में कांड का निष्पादन न्यायालय से हो जायेगा. अधिवक्ता नृपेश्वर सिंह देव ने कहा कि समय पर मामले का निष्पादन नहीं होने से अपराधियों को लाभ मिल जाता है. कारण यह है कि समय पर न्यायालय में गवाहों का गवाही नहीं हो पाता है. अनुसंधान सही तरीके से नहीं हो पाता है.
इस मौके पर विधि संघ के अध्यक्ष रसिक बिहारी सिंह, अपर जिला सत्र न्यायाधीश विनय कुमार तिवारी, डीएसपी सुनील कुमार, सुमित कुमार, अधिवक्ता इरशाद आलम, इंद्रदेव यादव, महेंद्र सिंह के अलावा अन्य न्यायिक पदाधिकारी व अधिवक्ता उपस्थित थे.
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