जल्द चलेगा प्रशासनिक डंडा

Published at :28 Apr 2016 8:21 AM (IST)
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जल्द चलेगा प्रशासनिक डंडा

सख्ती. देर रात डीजे की धुन पर मस्ती करनेवालों पर कसेगा शिकंजा ‘डीजे वाले बाबू, मेरा गाना बजा दो’ का आग्रह अब रात 10 बजे के बाद किसी को भी मुसीबत में डाल सकता है. क्योंकि, जिला प्रशासन ने सख्ती से इस ओर कार्रवाई करने का निर्देश थानाध्यक्षों को दे दिया है. इससे डीजे चालानेवालों […]

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सख्ती. देर रात डीजे की धुन पर मस्ती करनेवालों पर कसेगा शिकंजा
‘डीजे वाले बाबू, मेरा गाना बजा दो’ का आग्रह अब रात 10 बजे के बाद किसी को भी मुसीबत में डाल सकता है. क्योंकि, जिला प्रशासन ने सख्ती से इस ओर कार्रवाई करने का निर्देश थानाध्यक्षों को दे दिया है. इससे डीजे चालानेवालों की मुसीबत तो बढ़ेगी ही, लेकिन आम लोगों को कितना फायदा होगा, यह तो आनेवाले दिनों में ही पता चलेगा.
शनिवार को डीजे चलानेवालों, धार्मिक आयोजनकर्ताओं व समाजसेवियों के साथ डीएम करेंगे बैठक
औरंगाबाद (सदर) : हाल के वर्षों में डीजे का क्रेज अचानक से बढ़ा है. कम उम्र के बच्चों के साथ बड़े उम्र के लोग भी इसे पसंद करनेवालों में शामिल हैं. चाहे कोई शादी समारोह हो या धार्मिक आयोजन या फिर क्यों न एक छोटा सा बर्थ डे पार्टी ही हो, बस बड़े-बड़े डीजे साउंड लगे व फुल वोल्युम में गाना शुरू कर दिया जाता है.
दूसरे लोगों की परवाह किये बगैर बस अपनी मस्ती में डूबे रहने का साधन डीजे उस वक्त काफी तकलीफ देता है, जब रात में लोग सो रहे होते हैं व स्कूल के वक्त बच्चे पढ़ रहे होते हैं. खासकर मरीजों को इससे अधिक परेशानी होती है. इन्हीं परेशानियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने कड़े तेवर अख्तियार कर डीजे पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है. डीएम कंवल तनुज ने एक सप्ताह पूर्व अपने कार्यालय कक्ष में एक औपचारिक बैठक में कहा था कि डीजे अनावश्यक रूप से समस्या पैदा करता है.
समय सीमा व कार्यक्रम क्षेत्र में इसका पालन नहीं किया जाता है. इसलिए इस पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है. उन्होंने कहा था कि शादी समारोह व धार्मिक आयोजनों पर वाहनों में परिवर्तन कर बड़े स्पीकर लगा कर ध्वनि प्रदूषण फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती. क्योंकि, ये हरकत अनावश्यक रूप से लोगों को परेशानी में डालता है. डीजे पर प्रशासन द्वारा लगाये जा रहे प्रतिबंध पर बुधवार को कुछ प्रमुख लोगों से बातचीत की गयी.
मंदिर व मसजिदों में लाउडस्पीकर बजते हैं, जिससे ये एलान किया जाता है कि लोग प्रार्थना के लिए जग जाएं. लेकिन, वैसी ध्वनि जो बेवजह कोलाहल पैदा करती है, उस पर प्रतिबंध लगना चाहिए. डीजे के शोर-शराबे में लोगों की तकलीफ पता नहीं चलती है. लेकिन, डीजे के बजने से सचमुच तनाव पैदा होता है. मधुर व मीठे स्वर में गीत-संगीत बजने चाहिए व हो सके तो पारंपरिक ढोल व नगाड़े का इस्तेमाल धार्मिक आयोजनों पर करना चाहिए. इससे लोगों को कम परेशानी होगी.
सतीश कुमार मिश्रा, मुख्य पुजारी दुर्गा मंदिर
डीजे पर प्रतिबंध को लेकर 30 को होगी खास बैठक
डीजे पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाने के लिए जिलाधिकारी कंवल तनुज व एसपी बाबू राम ने अपने संयुक्त निर्णय में 30 अप्रैल को शहर के नगर भवन में एक बड़ी बैठक बुलायी है. डीएम ने अपनी पूर्व की औपचारिक बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों व समाजसेवियों से कहा था कि इस बैठक की सूचना प्रखंडस्तर पर प्रसारित कर दी जाये, ताकि हर प्रखंड से लोग इस बैठक में शामिल हो सके. बैठक में धार्मिक आयोजनकर्ताओं व समाजसेवियोंकी उपस्थिति अनिवार्य मानी गयी है. उन्होंने यह भी कहा था कि किसी भी धार्मिक आयोजन के पूर्व जो शांति समिति की बैठक थाना स्तर पर होती है, उस समिति को भंग करते हुए एक नयी समिति का गठन भी करने का निर्देश इस बैठक में दिया जायेगा.
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