बापू के सोच को बिहार की सरकार ने किया साकार : जगन्नाथ सिंह

Published at :01 Apr 2016 2:19 AM (IST)
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बापू के सोच को बिहार की सरकार ने किया साकार : जगन्नाथ सिंह

औरंगाबाद (कार्यालय) : गत 30 वर्षों से नशामुक्ति अभियान चला रहे जगन्नाथ िसंह ने सरकार द्वारा एक अप्रैल से लागू किये गये शराबबंदी को ऐतिहासिक दिवस कहा है. साथ ही उन्होंने प्रदेश सरकार के मुखिया को धन्यवाद देकर यह भी कहा है कि आपने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों को सबसे बड़ा सम्मान दिया है. […]

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औरंगाबाद (कार्यालय) : गत 30 वर्षों से नशामुक्ति अभियान चला रहे जगन्नाथ िसंह ने सरकार द्वारा एक अप्रैल से लागू किये गये शराबबंदी को ऐतिहासिक दिवस कहा है. साथ ही उन्होंने प्रदेश सरकार के मुखिया को धन्यवाद देकर यह भी कहा है कि आपने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के विचारों को सबसे बड़ा सम्मान दिया है. बापू ने कहा था कि यदि सत्ता उनके हाथों में आये तो मात्र एक घंटे के अंदर शराब की सारी दुकानों को बंद करा दें. आज बापू की सोच को बिहार की सरकार ने साकार कर दिखाया. वैसे यह आवाज तो जन-जन से उठ रही थी.
बुद्धिजीवी की पुकार, महिलाओं की चीत्कार और बापू के विचार इन तीनों ने विचारों को बिहार के मुखिया ने सम्मान दिया है. मुख्यमंत्री का यह ऐतिहासिक निर्णय न केवल शराब से लोगों का जीवन बचायेगा, बल्कि बिहार को गौरवान्वित बनाने में भी अग्रणी भूमिका निभायेगी. श्री सिंह के अनुसार देश के 11 बड़े शहरों में 11वीं क्लास में पढ़नेवाले 45 प्रतिशत छात्र शराब पीते है. भारत के 73.6 करोड़ युवा 35 वर्ष से कम उम्र के है. अगर हम इन्हें शराब पीने की आदत से बचा लें तो यह देश युवाओं का देश बन सकता है.
विद्यार्थियों को दिया करते थे नशा से दूर रहने की शिक्षा
जगन्नाथ बाबू एक सरकारी विद्यालय में शिक्षक रह चुके है. बातचीत के क्रम में उन्होंने शिक्षक के रूप में अपने जीवन की कुछ बातों को बड़ा ही संक्षिप्त शब्दों में उल्लेख करते हुए कहा कि 1966 में ये गेट स्कूल में शिक्षक बने.
जगन्नाथ बाबू बताते हैं कि जब भी क्लास में बच्चों को पढ़ाने जाते थे तब सबसे पहले वो बच्चों को कहते थे नशा से दूर रहना. समाज में भी लोगों को नशा छोड़ने के लिए आग्रह किया करते थे. इनका प्रयास से कई लोगों ने शराब छोड़ दी, सिगरेट पीना बंद कर दिया. बिरजु नाम का एक रिक्शाचालक पांव में चप्पल नहीं पहनता था. कपड़े फटे रहते थे. लेकिन, शराब जरूर पीता था. ये बताते है कि बिरजु ने जब इनके कहने पर शराब छोड़ दी और उसका परिवार खुशहाल दिखने लगा तो इनका नशा मुक्ति अभियान सफल होते हुए दिखाई देने लगा.
1986 में ये अपने गांव बारुण थाना क्षेत्र के रसलपुर में हरिकीर्तन का आयोजन किया और वहां जितने भी लोग आये उन सभी को शराब व किसी भी प्रकार के नशा पान नहीं करने का संकल्प दिलाया. यह काम ये लगातार 25 वर्षों तक किया. 62 वर्षीय सत्यनारायण सिंह ने खैनी खाना छोड़ दी, यमुना सिंह ने चाय नहींपीने का संकल्प लिया. ऐसे कई लोग हैं जो नशा छोड़ कर इनके अभियान से जुड़ते रहे.
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