मान गये शांतिनगर के लोग खुशी से दे दी अपनी जमीन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :13 Feb 2016 7:58 AM (IST)
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– नवीनगर व बारुण की सीमा पर लगायी जा रही एनपीजीसी परियोजना औरंगाबाद कार्यालय : बिहार सरकार व एनटीपीसी द्वारा नवीनगर व बारुण की सीमा पर लगायी जा रही एनपीजीसी परियोजना में डीएम कंवल तनुज का प्रयास सार्थक साबित हो गया. इस परियोजना में शुक्रवार काे जिला प्रशासन को वह सफलता हाथ लगी है, जिसके […]
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– नवीनगर व बारुण की सीमा पर लगायी जा रही एनपीजीसी परियोजना
औरंगाबाद कार्यालय : बिहार सरकार व एनटीपीसी द्वारा नवीनगर व बारुण की सीमा पर लगायी जा रही एनपीजीसी परियोजना में डीएम कंवल तनुज का प्रयास सार्थक साबित हो गया. इस परियोजना में शुक्रवार काे जिला प्रशासन को वह सफलता हाथ लगी है, जिसके लिए पिछले पांच वर्षों से प्रयास किया जा रहा था.
शांतिनगर के विस्थापित किसानों ने सरकार का मुआवजा स्वीकार कर लिया और राजी-खुशी अपनी जमीन दे दी़
जानकारी के अनुसार, डीएम कंवल तनुज शुक्रवार की दोपहर करीब ढाई बजे शांतिनगर गांव पहुंचे और किसानों के साथ सौहार्दपूर्ण माहौल में वार्ता की, जिसके बाद किसानों ने सरकार का मुआवजा स्वीकार कर अपनी जमीन देने के लिए राजी हो गये. डीएम ने किसानों को मुआवजे का चेक थमाया और जमीन परियोजना को सौंप दी. गौरतलब है कि शांतिनगर गांव जिस जगह पर बसा है वह परियोजना की हृदस्थली है.
उसी जगह पर परियोजना का कूलिंग प्वाइंट बनना है. किसान अपनी जमीन इसलिए देना नहीं चाह रहे थे कि वे पहले अपनी मांगें सरकार व जिला प्रशासन से मनवा लेना चाह रहे थे. दूसरी तरफ शांति नगर के जमीन के लिये पिछले वर्ष भी तत्कालीन डीएम नवीनचंद्र झा ने प्रयास किया था, लेकिन मामला नहीं सुलझा था. इसको लेकर परियोजना से बिजली उत्पादन करने का समय लगातार बढ़ते जा रहा था.
कल से शांतिनगर में कार्य होगा प्रारंभ : डीएम द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार किसानों ने अपना मुआवजा ले लिया है. कल से इस जमीन पर परियोजना का कार्य शुरू होगा.
डीएम ने कहा है कि शांतिनगर के किसानों के जमीन पर पेड़ पौधे लगे है उसे भी हटाने की बात किसानों ने कही है. 15 दिनों के अंदर किसान अपना जमीन खाली कर देंगे और उस पर लगे पेड़ पौधे पर लगे है उसका भी मुआवजा दिया जायेगा. डीएम ने यह भी कहा कि यहां के 200 विस्थापित किसानों को रोजगार दिया गया था. हमने आदेश दिया है कि शीघ्र ही और 200 विस्थापितों को रोजगार दे और रोजगार का अनुपात बढ़ाये. ताकि एनपीजीसी परियोजना का कार्य शीघ्र पूरा हो. डीएम ने कहा कि विस्थापित किसानों को कृषक मजदूरी के रूप में 750 दिनों की राशि का भुगतान अप्रैल माह तक कर दिया जायेगा.
किसान के घर डीएम ने किया जलपान : डीएम को गांव में वृहस्पत पासवान के दरवाजे पर बिछी खाट पर बैठाया गया. डीएम ने वहीं पर गांव के किसानों के साथ चाय-नाश्ता किया. इससे किसान काफी खुश दिखे और इसी का परिणाम हुआ कि जिस काम के लिए सरकार व जिला प्रशासन पिछले पांच वर्षों से प्रयास कर रहे थे. वह काम कुछ घंटों में ही डीएम कंवल तनुज के नाम जुड़ गया. परियोजना का सबसे बड़ा रोड़ा हट गया. यह डीएम की कार्य कुशलता और व्यहारिकता का परिणाम माना जा रहा है.
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