प्राचीन गुरुद्वारा का हाल बुरा, कोई पूछनेवाला भी नहीं

Published at :04 Jan 2016 7:00 PM (IST)
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प्राचीन गुरुद्वारा  का हाल बुरा, कोई पूछनेवाला भी नहीं

प्राचीन गुरुद्वारा का हाल बुरा, कोई पूछनेवाला भी नहीं भवानोखाप पुनपुन नदी पर स्थित गुरुद्वारा उपेक्षित फोटो नंबर-10, परिचय-भवानोखाप में स्थित सिखों का गुरूद्वाराप्रतिनिधि, नवीनगर (औरंगाबाद) भवानोखाप पुनपुन नदी तट पर स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा उपेक्षित पड़ा हुआ है. जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके इस गुरुद्वारे की देखरेख करने वाला कोई नहीं है. यहां हस्तलिखित गुरूग्रंथ […]

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प्राचीन गुरुद्वारा का हाल बुरा, कोई पूछनेवाला भी नहीं भवानोखाप पुनपुन नदी पर स्थित गुरुद्वारा उपेक्षित फोटो नंबर-10, परिचय-भवानोखाप में स्थित सिखों का गुरूद्वाराप्रतिनिधि, नवीनगर (औरंगाबाद) भवानोखाप पुनपुन नदी तट पर स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा उपेक्षित पड़ा हुआ है. जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके इस गुरुद्वारे की देखरेख करने वाला कोई नहीं है. यहां हस्तलिखित गुरूग्रंथ साहिब की एक प्रति भी पायी गयी थी. साथ ही पुराना कृपाण, खड़ाऊ व चवर आदि भी मिले थे. इस स्थल की पहचान 2009-10 में की गयी थी. इन सभी चीजों को देखने के बाद सिख धर्मावलंबियों ने इसे अत्यंत प्राचीन बताया था. पूर्व में इस गुरुद्वारे की देखरेख काना नामक साधु के द्वारा किया जाता था. उनके मृत्यु के बाद यह गुरुद्वारा पूरी तरह जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुका है. इसे देखने वाला कोई नहीं है. सामाजिक कार्यकर्ता बैजनाथ यादव समेत कई लोगों ने बताया कि सिखों के नौवें गुरू तेगबहादुर , उनकी माता नानकी जी, पत्नी गुजरी दी व साला कृपाल दास यहां कुछ माह के लिए रुके थे. इसके बाद सभी पटना चले गये थे, जहां गुरूगोविंद सिंह का जन्म हुआ था. मो रमजान अली व मुस्ताक अहमद ने बताया कि कई वर्ष पटना में गुजारने के बाद वापसी के क्रम में इसी गुरूद्वारे में आकर रूके थे. यहां माता नानकी जी का निधन हो गया था. उनकी समाधि आज भी इस गुरुद्वारे में है. इसका संचालन खलसा पंथ के पुजारी द्वारा किया गया था. साथ ही कई उत्सव मनाये गये थे. इस गुरुद्वारे के पास पुनपुन नदी पर पुल निर्माण की मांग की है, जो नवीनगर को सीधे जोड़ता है.

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