महिला हेल्पलाइन से अब तक 131 मामलों का निबटारा

Published at :29 Dec 2015 6:48 PM (IST)
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महिला हेल्पलाइन से अब तक 131 मामलों का निबटारा

महिला हेल्पलाइन से अब तक 131 मामलों का निबटारा महिलाओं को न्याय दिलाने में सफल साबित हो रहा हेल्पलाइन औरंगाबाद (सदर)सामाजिक स्तर पर महिला को सहनशीलता, त्याग का प्रतिरूप बताया जाता है. इससे महिलाएं अपनी चाहत को स्पष्ट नहीं कर पाती, अपने अधिकार का ये सही प्रयोग करने में अक्षम रह जाती है. पुरुष प्रधान […]

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महिला हेल्पलाइन से अब तक 131 मामलों का निबटारा महिलाओं को न्याय दिलाने में सफल साबित हो रहा हेल्पलाइन औरंगाबाद (सदर)सामाजिक स्तर पर महिला को सहनशीलता, त्याग का प्रतिरूप बताया जाता है. इससे महिलाएं अपनी चाहत को स्पष्ट नहीं कर पाती, अपने अधिकार का ये सही प्रयोग करने में अक्षम रह जाती है. पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के साथ लैगिंक आधार पर किये जा रहे भेदभाव की वजह से महिलाएं अपने अधिकार से वंचित रह जाती हैं. जागरूकता के कमी के कारण उन पर जुल्म किये जाते हैं, शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है. महिलाओं के इन्ही समस्याओं को देखते हुए जिले में शुरू किया गया महिला हेल्पलाइन आज पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने मे सफल साबित हो रहा है. वर्ष 2009 के दिसंबर में शुरू किया गया यह हेल्पलाइन महिला उत्पीड़न जैसे तमाम मामलों के लिए अब ये सुलह का केंद्र बन गया है. जिले के विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं से संबंधित उत्पीड़न के मामले हेल्पलाइन में आते हैं और हेल्पलाइन अपने स्तर से मामलों का निष्पादन सुलह के आधार पर कर रही है. जो गंभीर मामले होते हैं उसमेें महिला हेल्पलाइन महिला थाने की मदद लेती है और फिर उसे कोर्ट से न्याय दिलाया जाता है. हेल्पलाइन से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2015 में अब तक 159 मामलें महिला हेल्पलाइन में आये थे. जिनमें 131 मामलों का निष्पादन किया जा चुका है. ज्यादातर मामले हेल्पलाइन के माध्यम से ही निष्पादित किये गये हैं. इन मामलों में घरेलू हिंसा, यौन शोषण, मारपीट, मानसिक प्रताड़ना, दहेज उत्पीड़न सहित अन्य शामिल हैं. महिलाओं को किया जा रहा जागरूक : महिला हेल्पलाइन न केवल सुलह के अधार पर महिलाओं को न्याय दिला रहा है बल्कि उन्हें जागरूक भी कर रहा है. महिलाओं व लड़कियों को यह जानकारी दी जा रही है कि मनपसंद कपड़े न पहनने देना, मनपसंद नौकरी या काम न करने देना, अपनी पसंद का नहीं खाने देना, बालिग व्यक्ति को अपने पसंद से विवाह नहीं करने देना, या ताने देना, मनहूस आदि कहना, शक करना, मायके न जाने देना, किसी खास व्यक्ति से मिलने से रोक लगाना, पढ़ने न देना, काम छोड़ने का दबाव डालना, कहीं आने जाने से रोकना भी हिंसा है. मानसिक प्रताड़ना में ये सभी आते हैं. अगर इस तरह की कोई शिकायत महिलाओं को हो तो वे महिला हेल्पलाइन की मदद ले सकते हैं.

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