देवकुंड थाना के कोने-कोने में जलजमाव

देवकुंड थाना के कोने-कोने में जलजमाव कैदी को बाहर रखना मजबूरी(फोटो नंबर-2,3)परिचय- देवकुंड थाना परिसर में जल जमाव,हाजत में जल जमाव(पेज दो का लीड) देवकुंड (औरंगाबाद)आम लोगों को सुरक्षा के लिए जनसंख्या के मद्देनजर थानों की स्थापना की गयी. लेकिन पुलिसकर्मी कैसे रहते हैं, कैसे कार्य करते हैं. ये देखने वाला लगभग 35 वर्षों से […]
देवकुंड थाना के कोने-कोने में जलजमाव कैदी को बाहर रखना मजबूरी(फोटो नंबर-2,3)परिचय- देवकुंड थाना परिसर में जल जमाव,हाजत में जल जमाव(पेज दो का लीड) देवकुंड (औरंगाबाद)आम लोगों को सुरक्षा के लिए जनसंख्या के मद्देनजर थानों की स्थापना की गयी. लेकिन पुलिसकर्मी कैसे रहते हैं, कैसे कार्य करते हैं. ये देखने वाला लगभग 35 वर्षों से कोई नहीं है, जो पुलिसकर्मी आम लोगों की सुरक्षा देने के लिए कृत संकल्पित है, वहीं उन्हें सुरक्षा देने वाला कोई नहीं है. पुलिसकर्मी कैसे रहते है, कैसे खाते-पीते हैं. इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है. जी! हां ये कहानी नहीं, हकीकत है गोह प्रखंड के देवकुंड थाना का. देवकुंड स्थित थाना परिसर में जल जमाव होने से पुलिसकर्मियों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है. थाना के जितने भी कमरे हैं या कार्यालय से लेकर हाजत तक यानी थाना परिसर के कोने-कोने में जलजमाव बना हुआ है.जलजमाव से थाना भवन में आयी दरारथाने में जलजमाव से साफ स्पष्ट हो रहा है कि बरसात का मौसम है. बारिश का पानी से ही थाने में जलजमाव हुआ होगा, लेकिन नहीं. थाने से महज 100 फुट की दूरी पर कोचहासा नहर लाइन है. उसी नहर के पानी का रिसाव थाना में हो रहा है, जिससे जलजमाव बनी हुई है. जलजमाव होने से थाना भवन में भी दरारे आ गयी है, जो साफ संकेत कर रहा है कि थाना का भवन कभी भी किसी समय ध्वस्त हो सकता है और इसकी चपेट में पुलिसकर्मी से लेकर थानाध्यक्ष भी आ सकते हैं.थाना में जाने के लिए ईंट का सहारा थाना परिसर में जाने के लिए एक चौकी रखा गया है, बीच में ईंट का सहारा लिया गया है. कार्यालय में भी लगभग दो फुट पानी टेबुल व कुरसी को घेरे हुए है. इससे स्पष्ट हो जा रहा है कि थाना का कार्य किस ढंग से किया जाता होगा. देवकुंड थाने के एसाइ देबु पासवान के बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि सचमुच थाने के कोने-कोने में पानी की जलजमाव है . उन्होंने बताया कि हाजत में इतनी पानी है कि कैदी को बाहर रखना हमलोगों को मजबूरी बन गयी है. जब कैदी को बहार थाना परिसर में रखा जायेगा तो सुरक्षा करना हमलोगों का दायित्व है, इससे भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. लोगों की मानने तो 35 वर्ष बीत गये, पर देवकुंड थाना में संसाधनों की पूर्ति अब तक नहीं किया गया है. जैसे तैसे यहां के पुलिसकर्मी समय बिता रहे हैं. ताज्जुब की बात यह है कि तो आज तक अपना भवन हैं, ना ही इस ओर जिला प्रशासन द्वारा अब तक ठोस कदम उठाये गये हैं.
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