डीएम ने एसडीओ से सदर अस्पताल का कराया स्कैन, मिली काफी खामियां

Published at :01 Nov 2015 7:02 PM (IST)
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डीएम ने एसडीओ से सदर अस्पताल का कराया स्कैन, मिली काफी खामियां

डीएम ने एसडीओ से सदर अस्पताल का कराया स्कैन, मिली काफी खामियां जख्मी महिला को टाका लगाते मिला चतुर्थवर्गीय कर्मचारसदर अस्पताल की चिकित्सीय व्यवस्था देख भड़के एसडीओ, कहा- सब गायब हैं, हॉस्पिटल कौन चलायेगा(फोटो नंबर-17,18,19,20)कैप्शन- सदर अस्पताल का निरीक्षण करते एसडीओ, जख्मी महिला का टाका लगाते चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी, खाली पड़ा निबंधन कक्ष, पूर्जा बनाते […]

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डीएम ने एसडीओ से सदर अस्पताल का कराया स्कैन, मिली काफी खामियां जख्मी महिला को टाका लगाते मिला चतुर्थवर्गीय कर्मचारसदर अस्पताल की चिकित्सीय व्यवस्था देख भड़के एसडीओ, कहा- सब गायब हैं, हॉस्पिटल कौन चलायेगा(फोटो नंबर-17,18,19,20)कैप्शन- सदर अस्पताल का निरीक्षण करते एसडीओ, जख्मी महिला का टाका लगाते चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी, खाली पड़ा निबंधन कक्ष, पूर्जा बनाते चिकित्सक(लीड) औरंगाबाद (नगर) एक तरफ सदर अस्पताल को केंद्र सरकार ने आदर्श अस्पताल के रूप में विस्तार करने के लिए चयनित किया है, तो दूसरी ओर इस अस्पताल के चिकित्सीय व्यवस्था में कोई सुधार नहीं आया है. सच कहें तो अस्पताल की व्यवस्था पीएचसी के बराबद भी नहीं है, ऐसा लोगों का भी मानना है. जब रविवार को एक मरीज की सूचना पर जिलाधिकारी कंवल तनुज सदर अस्पताल का स्कैन एसडीओ सुरेंद्र प्रसाद से कराया, तो चिकित्सीय व्यवस्था की पोल खुल गयी. दोपहर 12 बजे तक निबंधन काउंटर पर कोई भी व्यक्ति पुरजा काटने के लिए उपस्थित नहीं था. एक जख्मी महिला का इलाज ड्रेसर के जगह पर चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी कर रहा था और वह जख्म में टांका लगा रहा था. इसी बीच जिलाधिकारी कंवल तनुज के आदेश पर सदर एसडीओ सुरेंद्र प्रसाद सदर अस्पताल में जांच करने के लिए पहुंच गये. जब ऑपरेशन थियेटर रूम में गये तो देखा कि एक महिला दर्द से कराह रही है. उसे चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी टांका लगा रहा है. जब एसडीओ ने पूछा कि आपका नाम क्या है, तो टांका लगा रहे कर्मचारी ने अपना नाम शिवकुमार बताया. जब एसडीओ ने पद नाम पूछा, तो उन्होंने बताया कि चतुर्थवर्गीय पद पर कार्यरत हैं. एसडीओ ने उसका नाम अपने कागजात पर नोट किया. इसके बाद पूरे अस्पताल का निरीक्षण किया. इस दौरान पाया कि उपाधीक्षक, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य प्रबंधक, डीपीएम के अलावे अन्य चिकित्सक व कर्मचारी गायब हैं. इसके बाद एसडीओ प्रसव कक्ष पहुंचे, वहां पर ड्यूटी पर दो एएनएम कार्य कर रही थी. देव प्रखंड के सटवट गांव की एक महिला दर्द से कराह रही थी. जब उसके उपचार के बारे में ड्यूटी पर कार्य कर रही एएनएम से पूछताछ की, तो ललिता कुमारी ने बताया कि नर्स द्वारा डॉक्टर को बुलाने के लिए मुझे कॉल दिया गया था. इसके बाद मैं डॉक्टर मणि कुमारी के आवास पर गयी. आधा घंटा इंतजार करने के बाद डॉक्टर द्वारा जवाब मिला कि आज मेरी ड्यूटी नहीं है. इसके बाद 11 बजे डाॅ रीना कुमारी के आवास पर गयी, उन्होंने भी जवाब दिया कि आज मेरी ड्यूटी नहीं है. इसके बाद महिला के परिजन प्रसव कक्ष से उसे बेहतर इलाज के लिए निजी क्लिनिक में चले गये. इसके बाद एसडीओ ने सिविल सर्जन से कहा कि सब गायब है, हॉस्पिटल कौन चलायेगा. ऐसे कह देने से आदर्श अस्पताल नहीं बन पायेगा. हद है, ये सब क्या मजाक बना रखे हैं. डीपीएम पटना में है, स्वास्थ्य प्रबंधक सासाराम में, तो उपाधीक्षक शेरघाटी में, यह बहुत ही गलत है. इसे मैं बरदाश्त नहीं करूंगा, बल्कि कार्रवाई करने के लिए जिलाधिकारी को पत्राचार करूंगा. एसडीओ ने इश्वर से दुहाई लगाते हुए कहा कि हे भगवान औरंगाबाद के लोगों को रविवार को बीमार मत पड़ने दिजियेगा. एसडीओ ने कहा कि सदर अस्पताल बाहर से देखने में तो चकाचक व सुंदर लगता है, लेकिन अंदर के चिकित्सीय व्यवस्था पीएचसी से भी बदतर है. इधर, उपाधीक्षक तपेश्वर प्रसाद ने कहा कि मैं छुट्टी पर हूं. अस्पताल की व्यवस्था में सुधार लाने के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन मुझे लोग सहयोग नहीं कर रहे हैं. एसडीओ के निरीक्षण करने के बाद जिला स्वास्थ्य समिति के अश्विनी कुमार, नागेंद्र केसरी, सदर अस्पताल के क्लर्क संजय कुमार, दयानंद कुमार, प्रभारी उपाधीक्षक आरबी चौधरी उल्टे पांव दौड़ते हुए अस्पताल पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली. तब तक एसडीओ निरीक्षण कर जा चुके थे.

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