संस्कृत भाषा सीखने को उत्सुक हैं अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्राएं

Published at :09 Oct 2015 10:25 PM (IST)
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संस्कृत भाषा सीखने को उत्सुक हैं अल्पसंख्यक समुदाय के  छात्र-छात्राएं

संस्कृत भाषा सीखने को उत्सुक हैं अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्राएं संस्कृत हाइस्कूल में सुविधाएं नदारद (फोटो नंबर-15) कैप्शन- विद्यालय में पढ़ते अल्पसंख्यक छात्राएं ( कैंपस पेज के लिये) औरंगाबाद (नगर) शहर के मदरसा इसलामिया के समीप स्थापित संस्कृत उच्च विद्यालय में अल्पसंख्यक समुदाय के दर्जनों छात्र-छात्राएं आज संस्कृत विषय की पढ़ाई कर रहे हैं. हालांकि […]

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संस्कृत भाषा सीखने को उत्सुक हैं अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्राएं संस्कृत हाइस्कूल में सुविधाएं नदारद (फोटो नंबर-15) कैप्शन- विद्यालय में पढ़ते अल्पसंख्यक छात्राएं ( कैंपस पेज के लिये) औरंगाबाद (नगर) शहर के मदरसा इसलामिया के समीप स्थापित संस्कृत उच्च विद्यालय में अल्पसंख्यक समुदाय के दर्जनों छात्र-छात्राएं आज संस्कृत विषय की पढ़ाई कर रहे हैं. हालांकि इस विद्यालय को विभाग व अधिकारियों द्वारा उपेक्षित किया जा रहा है. जिस तरह से विद्यालय में छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ रही है उसके मुताबिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं करायी जा रही है. इससे छात्र-छात्राओं के भविष्य पर ग्रहण लग रहा हैं. शिक्षा जगत में एक अलग पहचान रखने वाली संस्कृत उच्च विद्यालय की स्थापना वर्ष 1912 में हुआ था. उस समय पर्याप्त मात्रा में संसाधनों की उपलब्धता थी, लेकिन आज धीरे-धीरे सभी खत्म हो गये. इस विद्यालय में अभी भी वर्ग एक से लेकर 10वीं तक के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई होती हैं. देखरेख के अभाव में आज विद्यालय की स्थिति काफी खराब हो गयी है. वहीं भवनों की जर्जरता व शिक्षकों की कमी शिक्षा विभाग की प्रमुख दावों पर सवाल खड़ा करती है. इस ओर आज तक न तो विभाग की नजर पड़ी और नहीं अधिकारियों का नींद टूटा. आज इस विद्यालय की हालत बदतर हो गयी है. प्रधानाध्यापक सूर्यपत सिंह ने बताया कि इस विद्यालय में वर्ग एक से 10वीं तक के सैकड़ों छात्र-छात्राओं का नामांकन है. ज्यादातर मुसलिम बच्चे यहां पढ़ाई के लिए आते हैं और वे लोग स्वेच्छा से संस्कृत विषय की पढ़ाई करते हैं. यहां सुविधाओं के अभाव के कारण विद्यालय उपेक्षित है. हालांकि, शैक्षणिक परिभ्रमण के अलावे सरकार द्वारा चलायी जा रही सभी योजनाओं का लाभ मिलता है. इधर विभाग व अधिकारियों द्वारा कई सुविधाओं से वंचित रखा गया है. यहां तक कि इस विद्यालय में मध्याह्न भोजन का लाभ नहीं मिलता. अधिकारियों के पास कई बार मध्याह्न भोजन चालू कराने के लिए आवेदन दिया, लेकिन मध्याह्न भोजना योजना पदाधिकारियों की लापरवाही के कारण आज तक इस का लाभ बच्चों को नहीं मिला. प्राचार्य ने बताया कि इस विद्यालय में 56 छात्र-छात्राएं मुसलिम समुदाय के हैं, जो स्वेच्छा से संस्कृत विषय की पढ़ाई करते हैं.

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