नहीं आते डॉक्टर, टेक्नीशियन करता है मरीजों का डायलिसिस

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 May 2018 3:45 AM

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अरवल : सदर अस्पताल में किडनी पीड़ित रोगियों के इलाज के लिये सरकार ने अत्याधुनिक डायलिसिस केंद्र का निर्माण वर्ष 2015 में किया. इस डायलिसिस केंद्र में एक चिकित्सक, टेक्नीशियन एवं दो कर्मियों की तैनाती की गयी है. इस डायलिसिस केंद्र का संचालन बी-बराउंड मेडिकल इंडिया प्रा लिमिटेड के द्वारा किया जाता है. डायलिसिस केंद्र […]

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अरवल : सदर अस्पताल में किडनी पीड़ित रोगियों के इलाज के लिये सरकार ने अत्याधुनिक डायलिसिस केंद्र का निर्माण वर्ष 2015 में किया. इस डायलिसिस केंद्र में एक चिकित्सक, टेक्नीशियन एवं दो कर्मियों की तैनाती की गयी है. इस डायलिसिस केंद्र का संचालन बी-बराउंड मेडिकल इंडिया प्रा लिमिटेड के द्वारा किया जाता है. डायलिसिस केंद्र में दो बेड हैं. बिहार में 17 जिलाें में डायलिसिस केंद्र खोले गये थे, जिनमें अरवल जिला भी शामिल है. डायलिसिस केंद्र का लाभ पास-पड़ोस के जिला के लोग भी उठा रहे हैं. औरंगाबाद, जहानाबाद, आरा, पटना के पालीगंज के किडनी मरीज इस केंद्र में आकर इलाज कराते हैं.

दुर्भाग्य की बात यह है कि केंद्र में कंपनी के द्वारा जिस चिकित्सक की तैनाती की गयी वे सप्ताह में कभी-कभार ही दर्शन देते हैं. टेक्नीशियन के द्वारा ही मरीजों का डायलिसिस हो रहा है, जिससे हमेशा जान का खतरा बना रहता है. लोगों ने बताया कि मरीजों का डायलिसिस कराने के एवज में 1584 रुपये भी देने पड़ते हैं. टेक्नीशियन गुप्तनाथ तिवारी ने बताया कि चिकित्सक सप्ताह में मात्र एक से दो दिन ही आ पाते हैं एवं पूरे सप्ताह की हाजिरी बनाते हैं. हम तो मजबूरी में मरीजों का डायलिसिस करते हैं. अनुभव के आधार पर जो कुछ सीखा है उसी से मरीजों को भला-चंगा करने का प्रयास करते हैं. विशेष परिस्थिति में चिकित्सक से फोन पर विमर्श के बाद काम करते हैं. सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक केंद्र खुलाता है. एक मरीज का डायलिसिस करने में कम से कम 5 घंटे का वक्त लग जाता है. एक दिन में चार किडनी से पीड़ित मरीजों का डायलिसिस आसानी से किया जा सकता है. अब तक कुल 57 किडनी मरीजों का डायलिसिस किया जा चुका है. स्थानीय निवासी मो खुनदु आलम ने बताया कि हम बहुत ही गरीब परिवार से हैं. मजबूरी में डायलिसिस टेक्नीशियन से ही कराते आ रहे हैं.

अगर यही काम बाहर कराते तो 4-5 हजार रुपये देने पड़ जाते. हालांकि डॉक्टर के बजाय टेक्नीशियन से उपचार जान से खिलवाड़ है. क्या कहते हैं सिविल सर्जन
कई बार हमें भी सूचना मिली है कि डायलिसिस केंद्र में चिकित्सक नहीं आते हैं. टेक्नीशियन के द्वारा ही डायलिसिस किया जाता है जो बिल्कुल गलत है. डायलिसस केंद्र में तैनात चिकित्सक को बुलाकर निर्देश भी दिये थे, लेकिन चिकित्सक हमारे आदेश को नहीं मान रहे. साथ ही डायलिसिस केंद्र हमारे नियंत्रण से बाहर है. केंद्र के चिकित्सक एवं कर्मी हमारे आदेश को नहीं मानते हैं. राज्य स्वास्थ्य समिति की बैठक में इस मुद्दे को उठायेंगे.
डॉ राजकुमार शर्मा, सिविल सर्जन
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