छात्र-छात्राएं फर्श पर बैठ कर करते हैं पढ़ाई
Updated at : 24 Aug 2017 2:07 AM (IST)
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कुव्यवस्था. इंटरस्तरीय भागवत उच्च विद्यालय का हाल करपी (अरवल) : बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले सरकार इसके लिए प्रयत्नशील है. इसके लिए शिक्षा का अधिकार कानून लाया गया. वहीं विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए पंचायत से लेकर नगर शिक्षक तक की नियुक्ति भी की गयी. कई विद्यालयों को अपग्रेड किया […]
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कुव्यवस्था. इंटरस्तरीय भागवत उच्च विद्यालय का हाल
करपी (अरवल) : बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले सरकार इसके लिए प्रयत्नशील है. इसके लिए शिक्षा का अधिकार कानून लाया गया. वहीं विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए पंचायत से लेकर नगर शिक्षक तक की नियुक्ति भी की गयी. कई विद्यालयों को अपग्रेड किया गया. प्राथमिक विद्यालय को मध्य विद्यालय में, मध्य विद्यालय को उच्च विद्यालय में तथा उच्च विद्यालय को इंटरस्तरीय बनाया गया. परंतु प्रखंड क्षेत्र के शहरतेलपा स्थित इंटर स्तरीय भागवत उच्च विद्यालय के बच्चे आज भी बरामदे में या फिर पेड़ की छांव में बोरा बिछाकर पढ़ने को मजबूर हैं.
इस विद्यालय की स्थापना 1947 में हुई थी. उस समय बच्चों को पढ़ने के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध थीं. कमरे, शिक्षक, पुस्तकालय, प्रयोगशाला तथा बच्चों को बैठने के लिए पर्याप्त मात्रा में बेंच-डेस्क भी उपलब्ध थी परंतु समय के साथ-साथ विद्यालय में छात्रों की संख्या बढ़ती चली गयी, लेकिन सुविधाएं और संसाधन कम होते चले गये. नतीजा वर्तमान समय में बच्चों को जाड़ा, गरमी और बरसात के मौसम में बरामदे या खुले आकाश में फर्श पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है. इस विद्यालय में कमरे, शिक्षक, बेंच व डेस्क समेत कई सुविधाओं की घोर कमी है. विद्यालय में नामांकित 1100 छात्र- छात्राओं को पढ़ाने के लिए महज 10 शिक्षक ही
पदस्थापित हैं. ऐसे में कई महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई शिक्षक के अभाव में नहीं हो रही है. अंग्रेजी, हिंदी, गणित व रसायन शास्त्र विषयों के शिक्षक नहीं रहने से छात्र इन विषयों की पढ़ाई से वंचित हैं. वहीं इंटर की बात करें तो महज तीन शिक्षक ही पदस्थापित हैं. इनमें दो इतिहास व एक उर्दू के शिक्षक हैं. बाकी विषयों की पढ़ाई शिक्षक के अभाव में नहीं हो रही है. नतीजन छात्रों को निजी कोचिंग का सहारा लेना पड़ रहा है.
जाड़ा की ठिठुरण, गरमी की लहर या फिर बारिश की बूंदों से इनकी पढ़ाई प्रभावित होती है. हल्की बारिश होने पर भी बच्चों से लेकर शिक्षकों में भी भागमभाग की स्थिति उत्पन्न हो जाती है और समय से पूर्व ही उन्हें छुट्टी दे दी जाती है. इस इंटर स्तरीय उच्च विद्यालय में अगर कमरे की बात की जाये तो वर्ग कक्ष की संख्या महज पांच हैं. इनमें नवम वर्ग में 450, दशम वर्ग में 410, इंटर विज्ञान में 120 और कला संकाय में 120 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. कुल मिलाकर विद्यालय में छात्रों की संख्या 1100 है. इनमें एक कमरा कार्यालय के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. शेष चार कमरे में 1100 छात्रों की पढ़ाई कैसे हो सकती है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. इंटरस्तरीय के लिए भवन तो लगभग बनकर तैयार है, लेकिन उसे अभी सुपुर्द नहीं किया गया है. इस कारण इस भवन का पूर्णतः लाभ बच्चों को नहीं मिल पा रहा है.
क्या कहते हैं छात्र-छात्रा
शिक्षकों की कमी के कारण कोर्स पूरा नहीं हो पाता है. विभाग की उदासीनता का खामियाजा यहां पढ़ने वाली छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है.
पल्लवी कुमारी
बैठने के लिए पर्याप्त मात्रा में न तो बेंच-डेस्क है और न ही पढ़ाने के लिए शिक्षक. इससे छात्रों को काफी परेशानी होती है.
मंतोष कुमार
क्या कहते हैं अधिकारी
शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार द्वारा बहाली की प्रक्रिया जारी है. प्रक्रिया पूरी होते ही रिक्त पदों पर शिक्षकों की बहाली हो जायेगी.
कृष्ण कुमार, डीइओ
बोले प्रधानाध्यापक
कमरे और शिक्षकों की कमी के कारण वर्ग संचालन करने में काफी परेशानी होती है.
विपिन कुमार
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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