छक्कन बिगहा में मूलभूत सुविधाओं का अभाव
Updated at : 15 Aug 2017 8:01 AM (IST)
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परेशानी. पगडंडी के सहारे गांव में जाते है लोग खाट पर लादकर मरीज को पहुंचाया जाता है अस्पताल करपी (अरवल) : प्रखंड क्षेत्र के अईयारा पंचायत के छक्कन विगहा गांव में सड़क, शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है. हालांकि गांव अरवल-जहानाबाद एनएच 110 से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित […]
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परेशानी. पगडंडी के सहारे गांव में जाते है लोग
खाट पर लादकर मरीज को पहुंचाया जाता है अस्पताल
करपी (अरवल) : प्रखंड क्षेत्र के अईयारा पंचायत के छक्कन विगहा गांव में सड़क, शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है. हालांकि गांव अरवल-जहानाबाद एनएच 110 से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, लेकिन गांव में लोग पगडंडी के सहारे ही जाते हैं. गांव में जाने के लिए नाले को पार करना पड़ता है. नाले पर पुल नहीं है. ऐसे में ग्रामीणों को काफी परेशानी होती है. इन सुविधाओं के लिए ग्रामीण कई बार जन-प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कई बार जनसभा को संबोधित करते हुए कहा है कि हर गांव एवं बसावटो में सड़क पहुंचाना सरकार का लक्ष्य है. इसके बाद ग्रामीणों में आस जगी थी कि इनके गांव में भी अब सड़क होगा परंतु अभी तक इस दिशा में कोई सार्थक पहल नहीं हुई है.
जबकि इस गांव के अगल-बगल के गांव में सड़कों का जाल फैला है. हालांकि लोग अभी भी उम्मीद लगाये बैठे हैं कि सीएम की घोषणा जरूर रंग लायेगी. वहीं चुनाव के समय आते ही नेताओं का आना-जाना शुरू हो जाता है और नेताओं द्वारा बड़े-बड़े दावे एवं आश्वासन देकर वोट तो जरूर ले लिए जाते हैं, लेकिन उसके बाद ध्यान नहीं दिया जाता है. ग्रामीण अपने को ठगा महसूस करते हैं. ऐसी परिस्थिति में अगर कोई बीमार पड़ जाये तो गांव में एंबुलेंस भी नहीं पहुंच सकती है. लोगों को आपसी सहयोग से खाट पर लादकर मरीज को अस्पताल ले जाना पड़ता है. वहीं स्कूल आने जाने में भी बच्चों को काफी परेशानी होती है. खासकर बरसात के दिनों में चारों तरफ पानी भर जाने के कारण पगडंडी और नाला का अंतर मिट जाता है. नतीजा बच्चों के साथ हादसे का खतरा बना रहता है. बरसात का मौसम आते ही किसान खेती में जुट जाते हैं इससे उनके पास समय का अभाव हो जाता है. नतीजा बच्चों को प्रतिदिन स्कूल पहुंचाना और लाना उनके लिए मुश्किल हो जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है. वहीं मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी काफी कठिनाई होती है. गांव से लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करपी है. जहां आने-जाने का कोई सुलभ रास्ता भी नहीं है. ऐसे में बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना काफी मुश्किल भरा काम होता है. किसी के बीमार पड़ जाने पर गांव में ही ग्रामीण चिकित्सकों से इलाज कराना पड़ता है. कभी-कभी ग्रामीण डॉक्टरों से इलाज करवाना जोखिम भी साबित होता है. बरसात के दिनों में लोग शाम होने से पहले ही अपने घर लौट जाते हैं. खेतीबाड़ी की पटवन की भी कोई बेहतर सुविधा नहीं होने खेतीबाड़ी भी इससे प्रभावित होती है. किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए डीजल पंप सेटों का इस्तेमाल करना पड़ता है जो काफी महंगा साबित होता है. खाद, बीज और डीजल सभी महंगे दाम पर खरीदकर खेती करने में किसानों को पसीने छूटते हैं. ऐसे में ग्रामीणों को मॉनसून पर निर्भर रहना पड़ता है.
क्या कहते हैं ग्रामीण
नाले पर पुल के लिए जिला मुख्यालय से लेकर जन-प्रतिनिधियों का दरवाजा अनेकों बार खटखटाया, लेकिन आज तक पुल नहीं बना. बरसात के दिनों में स्कूली छात्र-छात्राओं को रास्ते के अभाव में पढ़ाई प्रभावित होती है. हालांकि गांव इमामगंज बाजार से दो किलोमीटर पर ही बसा है फिर भी सड़क नहीं रहने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
नीरा सिंह
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गांव से लगभग सात किलोमीटर की दूरी पर है. ऐसे में बरसात के दिनों में इलाज के लिए ग्रामीण चिकित्सकों पर ही निर्भर रहना पड़ता है. ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले गरीब मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सरकारी उपेक्षा से आक्रोश है. गली की स्थिति भी दयनीय है. स्थानीय विधायक एवं अन्य जन-प्रतिनिधियों का ध्यान भी इस समस्या की तरफ नहीं है.
अशोक सिंह
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