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साइफन निर्माण के बाद भी किसान हो रहे परेशान

Updated at : 02 Aug 2017 6:13 AM (IST)
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साइफन निर्माण के बाद भी किसान हो रहे परेशान

करपी (अरवल) : करपी व वंशी प्रखंड क्षेत्र के चिर-प्रतिक्षित परियोजना नेनुआ नाला पर पुल एवं साइफन का निर्माण कार्य आज से लगभग 23 साल पहले प्रारंभ हुआ था. दोनों प्रखंडों के दर्जनों गांवों की सिंचाई सुविधा इस परियोजना से मिलती है. इस नाले पर साइफन का निर्माण कार्य भी पूरा हो गया. बावजूद जमीन […]

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करपी (अरवल) : करपी व वंशी प्रखंड क्षेत्र के चिर-प्रतिक्षित परियोजना नेनुआ नाला पर पुल एवं साइफन का निर्माण कार्य आज से लगभग 23 साल पहले प्रारंभ हुआ था. दोनों प्रखंडों के दर्जनों गांवों की सिंचाई सुविधा इस परियोजना से मिलती है. इस नाले पर साइफन का निर्माण कार्य भी पूरा हो गया. बावजूद जमीन के पेच के कारण खेतों में पानी नहीं जा रहा है.

इसके कारण क्षेत्र के किसानों को काफी परेशानी हो रही है. किसानों के लंबे संघर्ष के बाद ही इसका निर्माण कार्य आरंभ हुआ था. यदि इससे पानी निकलता तो क्षेत्र के मोगलापुर, वंशी, भगवतीपुर, अनुआ, कस्तुरीपुर, शादीपुर तथा रैनाथ समेत दर्जनों गांवों के किसानों के खेतों का पटवन होता. बताते चलें कि संघर्ष के कारण ही वर्ष 1993 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने इस साइफन की आधारशिला रखी थी. कुछ साल बाद कार्य भी प्रारंभ हुआ, पाये भी बने लेकिन दो पाये की ढलाई के बाद

कार्य बंद हो गया. इसके बाद इस क्षेत्र के किसानों ने संघर्ष समिति का गठन कर उसके बैनर तले आंदोलन आरंभ किया. इस समिति के अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह के नेतृत्व में जोरदार आंदोलन हुआ. 27 नवंबर 2011 को सेवा यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लघु सिंचाई विभाग के मंत्री तथा अधिकारियों के साथ यहां पहुंचे. उन्होंने किसानों के साथ बातचीत की और मौके पर मौजूद अधिकारियों को पुनः कार्य आरंभ करने का निर्देश दिया. दो साल बाद निविदा भी निकाली गयी. गत वर्ष कार्य आरंभ भी हो गया. इस पुल तथा साइफन का निर्माण कार्य इस कदर किया गया कि पुल के नीचे से पुनपुन नदी का पानी जायेगा और ऊपर से सड़क और उसके समीप पुल पर भी नहर बनायी गयी है. करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी आमजनों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है. पुल तक नहर नहीं जोड़े जाने के कारण पानी नहीं आ रहा है. जिस उद्देश्य से इसका निर्माण किया गया

यदि उसे पूरा कर दिया जाता तो अरवल, औरंगाबाद जिले की दूरी भी कम हो जाती साथ ही हजारों हेक्टेयर जमीन की सिंचाई भी होती. यहां यह भी बताते चलें कि वंशी प्रखंड के नदी नालों से घिरे होने के कारण यहां के 14 गांवों के किसानों को इंद्र भगवान पर ही निर्भर रहना पड़ता है. लघु सिंचाई विभाग के कनीय अभियंता ने बताया कि पुल के उत्तर दिशा में लगभग 500 मीटर जमीन में नहर निर्माण का कार्य होना था. लेकिन वहां के किसान न्यायालय चले गये. हालांकि कि वह मुकदमा सरकार जीत गयी है. उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा शीघ्र ही जमीन की व्यवस्था कर ली जायेगी उसके बाद नहर का कार्य भी पूरा कर लिया जायेगा .

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