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धान का बिचड़ा बचाने में जुटे किसान

Updated at : 28 Jun 2017 8:15 AM (IST)
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धान का बिचड़ा बचाने में जुटे किसान

करपी (अरवल) : वर्षा के अभाव के कारण खेतों में बोये गये धान के बिचड़े झुलसने लगे हैं. इंद्र देवता की बेरुखी किसानों के अरमानों पर पानी फिरने लगा है. जब बिचड़े ही न रहेंगे, तो फिर धान की रोपाई कैसे संभव हो पायेगी. इस बात की चिंता किसानों को सताने लगी है. हालांकि डीजल […]

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करपी (अरवल) : वर्षा के अभाव के कारण खेतों में बोये गये धान के बिचड़े झुलसने लगे हैं. इंद्र देवता की बेरुखी किसानों के अरमानों पर पानी फिरने लगा है. जब बिचड़े ही न रहेंगे, तो फिर धान की रोपाई कैसे संभव हो पायेगी. इस बात की चिंता किसानों को सताने लगी है.
हालांकि डीजल पंपसेट के सहारे किसान अपने धान के बिचड़े को बचाने की जद्दोजहद में जुटे हुए हैं, लेकिन कई ऐसे इलाके हैं जहां भीषण गरमी के कारण और बारिश न होने से भूमिगत जल स्तर काफी नीचे चला गया है. वहां पंप सेट भी चलाना संभव नहीं हो पा रहा है. पिछले वर्ष धान की अच्छी फसल के बाद इस वर्ष शुरुआती दिनों में ही मौसम की बेरुखी से किसान परेशान हैं. वहीं सभी जलस्रोत भी सूखे पड़े हुए हैं. किसी भी नहर में अब तक पानी नहीं छोड़ा गया है, जिससे सिंचाई की वैकल्पिक व्यवस्था पर भी ग्रहण लग रहा है.
आसमान की अाेर देख रहे किसान : किसान टकटकी लगाकर आसमान की ओर देख रहे हैं.धान का कटोरा कहे जाने वाला अरवल मौसम की बेरुखी से सूखने के कगार पर है.
सोन तटीय इलाके में जहां बाढ़ तबाही मचाती है, उस इलाके में भी धान के बिचड़े सुरक्षित रखना मुश्किल हो रहा है. जिले से सोन और पुनपुन जैसी दो महत्वपूर्ण नदियां गुजरती हैं. इन नदियों से निकलने वाली नहरें इस इलाके की भूमि को सिंचित करती है. वहीं पुनपुन नदी सूखी पड़ी है, वहीं सोन नदी से निकलने वाली नहर में अभी तक पानी नहीं छोड़ा गया है, जिससे सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है. सुखाड़ से करपी, वंशी का इलाका पूरी तरह से ग्रसित है.
इन इलाकों में भूमिगत जल स्तर भी काफी नीचे चला गया है, कई गांव में तो पेयजल का भी संकट उत्पन्न हो गया है.ऐसे में पंप सेट डीजल से सिंचाई करना संभव नहीं है. यदि एक सप्ताह के अंदर बारिश नहीं हुई तो इलाके में धान के बिचड़े पूरी तरह झुलस जायेंगे. फिर धान की बोआई संभव नहीं हो पायेगी.
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