सेना बहाली में फर्जीवाड़ा करने का आरोपी 8 साल बाद दरभंगा से धराया, तीन लाख में खरीदा था मेडिकल सर्टिफिकेट

Updated at : 09 Jul 2022 2:03 PM (IST)
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सेना बहाली में फर्जीवाड़ा करने का आरोपी 8 साल बाद दरभंगा से धराया, तीन लाख में खरीदा था मेडिकल सर्टिफिकेट

Bihar News: काजीमोहम्मदपुर के थानेदार दिगंबर कुमार के निर्देश पर केस के आइओ दारोगा आरएल श्रीवास्तव ने राकेश को गिरफ्तार किया है. रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2014 में दो से 12 फरवरी के बीच सिकंदरपुर स्थित पंडित नेहरू स्टेडियम में सेना बहाली की प्रक्रिया हुई थी.

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मुजफ्फरपुर काजी मोहम्मदपुर पुलिस ने सेना बहाली फर्जीवाड़ा मामले में दरभंगा के बहेड़ा से युवक राकेश कुमार यादव को गिरफ्तार किया है. उसकी गिरफ्तारी करीब आठ साल बाद हुई है. प्रारंभिक पूछताछ के बाद उसे शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया गया. सुनवाई के बाद कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया. राकेश वर्तमान में दरभंगा स्थित एक मेडिकल स्टोर में सेल्समैन की नौकरी कर रहा था. इस मामले में दूसरे आरोपित के खिलाफ पुलिस वारंट लेने की कवायद कर रही है. दो अगस्त 2014 को चक्कर मैदान स्थित सेना भर्ती बोर्ड के तत्कालीन उप निदेशक सुबेदार मेजर रूप सिंह ने काजीमोहम्मदपुर थाने में दरभंगा के बेहड़ी थाना क्षेत्र के राकेश कुमार यादव उर्फ अजय यादव सहित दो अभ्यर्थियों के खिलाफ धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज करायी थी.

मेडिकल जांच में गड़बड़ी होने पर गया हुआ था रेफर

काजीमोहम्मदपुर के थानेदार दिगंबर कुमार के निर्देश पर केस के आइओ दारोगा आरएल श्रीवास्तव ने राकेश को गिरफ्तार किया है. रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2014 में दो से 12 फरवरी के बीच सिकंदरपुर स्थित पंडित नेहरू स्टेडियम में सेना बहाली की प्रक्रिया हुई थी. उस वक्त सेना भर्ती बोर्ड मुजफ्फरपुर के निदेशक कर्नल नागेश राणा और उपनिदेशक सूबेदार मेजर रूप सिंह थे. शारीरिक दक्षता जांच में सफल अभ्यर्थियों की मेडिकल जांच करायी गयी. इस दौरान दरभंगा के बहेड़ी थाना क्षेत्र के अधलोआम निवासी राकेश कुमार यादव उर्फ अजय यादव और मोतिहारी के एक युवक में प्रारंभिक मेडिकल जांच में कलर ब्लाइंडनेस पाया गया. सेना के चिकित्सकों ने दोनों अभ्यर्थियों को गया भेजा.

सत्यापन में पकड़ा गया मामला

गया से लौटने के बाद राकेश व दूसरे अभ्यर्थी ने मुजफ्फरपुर भर्तीबोर्ड बोर्ड को फिटनेस प्रमाणपत्र जमा कर दिया. इस बीच अभ्यर्थियों का डिस्पैच शुरू हो गया. राकेश की ओर से जमा फिटनेस प्रमाण पत्र का मुजफ्फरपुर सेना भर्तीबोर्ड ने सत्यापन के लिए गया भेजा. वहां से बताया गया कि यह फिटनेश प्रमाणपत्र उनके यहां से निर्गत नहीं किया गया है. उनके रिकॉर्ड में राकेश और अन्य का कोई ब्यौरा नहीं था. इसकी जानकारी गया मिलिट्री अस्पताल ने मुजफ्फरपुर सेना भर्तीबोर्ड को दी. इसके बाद तत्कालीन निदेशक कर्नल नागेश राणा के निर्देश पर तत्कालीन उपनिदेशक ने मामला दर्ज कराया.

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गया में तीन लाख में हुआ था सौदा

गिरफ्तारी के बाद राकेश ने पुलिस को बताया कि वे लोग मुजफ्फरपुर भर्तीबोर्ड से रेफरल लेकर गया स्थित मिलिट्री अस्पताल पहुंचे. जांच होने से पहले ही एक बिचौलिया अस्पताल परिसर में मिला. दोनों उसके प्रभाव में आ गये. बिचौलियों ने बताया था कि उनकी पहुंच ऊपर तक है. वे रुपये लेकर दोनों को फिट कर देंगे. उन्हें जांच कराने की जरूरत भी नहीं है. इसके लिए एक अभ्यर्थी का पांच लाख रुपये लगेगा. मोलजोल करते हुए तीन लाख रुपये में सौदा हुआ. दो दिन बाद दोनों को मेडिकल फिटनेस का प्रमाण पत्र दिया. इसके बाद दोनों लौट आये.

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