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ara News : अमर शहीद कपिलदेव राम की 83वीं बरसी आज, अब भी उपेक्षा का शिकार

Updated at : 13 Aug 2025 6:35 PM (IST)
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ara News : अमर शहीद कपिलदेव राम की 83वीं बरसी आज, अब भी उपेक्षा का शिकार

अमर शहीद कपिलदेव राम की 83वीं बरसी गुरुवार को मनायी जायेगी. प्रत्येक वर्ष 14 अगस्त को कोईलवरवासी उनकी प्रतिमा और स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करते हैं.

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कोईलवर. “मइया हमहू जात बानी, भारत के पुकार बा. देश के आजादी लागि आजे बलिदान बा… ” यह कहकर 14 वर्षीय कपिलदेव राम 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में कूद पड़े थे. महात्मा गांधी के आह्वान पर पूरा देश अंग्रेजों के खिलाफ खड़ा हो चुका था और वीर कुंवर सिंह की धरती शाहाबाद भी पीछे नहीं रही. इन्हीं क्रांतिकारी नौजवानों में शामिल थे कोईलवर के वीर सपूत अमर शहीद कपिलदेव राम, जिन्होंने देश की आजादी के लिए प्राण न्योछावर कर दिये. बसंत दुसाध और बेलासिया देवी के पुत्र कपिलदेव का विवाह कुछ ही दिन पहले हुआ था. 14 अगस्त, 1942 को अपने साथियों के साथ उन्होंने सरकारी कामकाज बाधित किया और कोईलवर पुल के पास रेल पटरी उखाड़ कर सोन नदी में फेंक दी. मुखबिर की सूचना पर अंग्रेज सैनिक पहुंचे और गोलियां चलाने लगे. एक गोली कपिलदेव के सीने में लगी, लेकिन वे “भारत माता की जय ” और “वंदे मातरम् ” के नारे लगाते रहे. इसके बाद अंग्रेज सैनिकों ने उनके पेट में क्रिच घोंप दी और जूतों से रौंद डाला. गंभीर रूप से घायल कपिलदेव को साथियों ने कोईलवर अस्पताल पहुंचाया. मां की गोद में उन्होंने अंतिम सांस ली और कहा, “तनिको गम ना करीहें मइया, तोहरे अइसन मइया के अवरू दरकार बा. पीठ गोली लागल नइखे, लागल बाटे छतिया. ” इतना कहकर वे हमेशा के लिए अमर हो गये. बाद में स्वतंत्रता सेनानी रामप्रसाद लाल उर्फ भोला बिस्मिल और समाजसेवी रामप्रवेश राम के प्रयास से उनके दफन स्थल पर स्मारक बना और आरा-पटना मुख्य मार्ग स्थित चौक का नाम “शहीद कपिलदेव चौक ” रखा गया. प्रत्येक वर्ष 14 अगस्त को कोईलवरवासी उनकी प्रतिमा और स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करते हैं. लेकिन, निराशाजनक है कि प्रशासनिक स्तर पर उनकी बरसी पर कोई पहल नहीं होती. स्थानीय लोगों का आरोप है कि दलित होने के कारण शहीद को उचित सम्मान नहीं मिल रहा. अगर ऐसा न होता तो उनके साथ भेदभाव का नजरिया नहीं अपनाया जाता. स्थानीय प्रबुद्धजन और परिवार के सदस्य मानते हैं कि आने वाली पीढ़ी को शहीद कपिलदेव की वीर गाथाओं से परिचित कराना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी. अन्यथा, “शहीदों की चिताओं पर हर बरस मेले लगे न लगे, मगर वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा. “

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAH ABID HUSSAIN

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By SHAH ABID HUSSAIN

SHAH ABID HUSSAIN is a contributor at Prabhat Khabar.

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