आरा. जिले में 15 जनवरी गुरुवार को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जायेगा. पर्व को लेकर बाजारों में खास रौनक देखने को मिल रही है. तिल, गुड़, चूड़ा, मूली और पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए लोग बाजार पहुंच रहे हैं. सनातन संस्कृति के अनुसार मकर संक्रांति का विशेष धार्मिक महत्व है. इस दिन सूर्यदेव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं. इसे देवताओं के दिन का शुभारंभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. मकर संक्रांति के साथ ही ऋतु परिवर्तन की शुरुआत मानी जाती है. जिले में इस पर्व पर तिलवा का विशेष महत्व है. लगभग हर घर में गुड़-चूड़ा या मूली से तिलवा बनाया जाता है, जिसे संक्रांति के दिन और उसके बाद ग्रहण करने की परंपरा है.
स्नान-दान का विशेष महत्व
मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल नदी, तालाब या किसी शुद्ध जलाशय में स्नान करना पुण्यदायी माना जाता है. स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर सूर्यदेव की पूजा की जाती है. इस दिन आटा, दाल, चावल, खिचड़ी, तिल और तिल के लड्डू का दान विशेष फलदायी माना गया है.
शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति का पुण्य काल दोपहर 03.13 बजे से प्रारंभ होगा. वहीं महा पुण्य काल दोपहर 03.13 बजे से 04.58 बजे तक रहेगा. शास्त्रों के अनुसार इस अवधि में किया गया स्नान, दान और पूजा कई गुना पुण्य प्रदान करता है.
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