बिहार राज्य विवि अधिनियम-2026 के विरोध में आरा में शिक्षकों का आक्रोश, राज्यभर में आंदोलन तेज

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बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 को लेकर शिक्षकों में गहरा असंतोष है. वे इस नए प्रस्तावित कानून को शिक्षा व्यवस्था के लिए नुकसानदेह बता रहे हैं और अपनी स्वायत्तता पर खतरे की बात कह रहे हैं. शिक्षकों ने सरकार से इस पर विस्तृत चर्चा की मांग की है, अन्यथा आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है.

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Arrah Teacher Protest : आरा में बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 को लेकर राज्यभर के शिक्षकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है. इस नए प्रस्तावित कानून के खिलाफ शिक्षकों ने खुलकर विरोध जताया है और इसे शिक्षा व्यवस्था के लिए नुकसानदेह बताया है. शिक्षकों का कहना है कि इस अधिनियम से उनकी स्वायत्तता और अधिकार प्रभावित होंगे, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा.

जानकारी के अनुसार, राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों ने इस अधिनियम के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है. उनका आरोप है कि बिना पर्याप्त विचार-विमर्श और सुझाव लिए इस तरह का कानून लाया जा रहा है, जो शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए उचित नहीं है.

University Autonomy Issue Bihar : शिक्षकों ने जताई कड़ी आपत्ति

शिक्षक संगठनों का कहना है कि बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 के तहत लंबे समय से व्यवस्था संचालित हो रही है. ऐसे में नए अधिनियम को लागू करने से पहले सभी पक्षों से व्यापक चर्चा जरूरी थी. लेकिन ऐसा नहीं किया गया, जिससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ गया है.

शिक्षकों ने यह भी कहा कि नए अधिनियम में कई ऐसे प्रावधान हैं, जो विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर कर सकते हैं. इससे शैक्षणिक निर्णयों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

सरकार से संवाद की मांग

विरोध कर रहे शिक्षकों ने सरकार से मांग की है कि इस अधिनियम को फिलहाल लागू न किया जाए और पहले इस पर विस्तृत चर्चा की जाए. उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार शिक्षक संगठनों, शिक्षाविदों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर उनकी राय ले.

शिक्षकों का कहना है कि संवाद के जरिए ही बेहतर और संतुलित नीति बनाई जा सकती है, जिससे शिक्षा का स्तर भी बेहतर होगा और सभी पक्षों का हित भी सुरक्षित रहेगा.

आंदोलन की चेतावनी

शिक्षक संगठनों ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे. राज्य के कई हिस्सों में धरना, प्रदर्शन और विरोध कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है.

उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल शिक्षकों के अधिकारों की नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र को बचाने की है. इसलिए सभी को एकजुट होकर इसका विरोध करना होगा.


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रागिनी शर्मा

लेखक के बारे में

By रागिनी शर्मा

वर्तमान में मैं, रागिनी शर्मा पटना स्थित प्रभात खबर डिजिटल की टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं. यहां मैं बिहार के विभिन्न जिलों से जुड़ी अहम खबरों, राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर काम कर रही हूं. मेरा उद्देश्य हर खबर को सरल, सटीक और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक न सिर्फ जानकारी प्राप्त करें बल्कि उससे जुड़ाव भी महसूस करें और डिजिटल पत्रकारिता को और अधिक सार्थक बनाया जा सके.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही मैंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. अपने कॉलेज के समय में हिंदुस्तान के साथ इंटर्नशिप के दौरान मुझे पहली बार वेब पोर्टल पर खबर लिखने और डिजिटल न्यूज राइटिंग का व्यावहारिक अनुभव मिला. इसी दौरान मैंने न्यूज़ लेखन, हेडलाइन स्ट्रक्चर और डिजिटल स्टोरी प्रेजेंटेशन की बुनियादी समझ विकसित की.

इसके बाद वर्ष 2025 में पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरा करने के साथ ही मैंने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की. डिजिटल मीडिया में मेरी पहली भूमिका फर्स्ट बिहार झारखंड के साथ रही, जहाँ मैंने एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग के माध्यम से बिहार के जमीनी मुद्दों को कवर किया. इस दौरान मैंने राज्य की राजनीति, सामाजिक सरोकारों और आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग की.

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