अररिया नगर परिषद की बड़ी लापरवाही; 25 लाख की डस्टबिनों पर जमी धूल, ठप पड़ी डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण योजना

Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 29 May 2026 9:09 AM

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सम्राट अशोक भवन में बंद पड़ी धूल फांक रही बाल्टियां

Waste Management Dustbin Scheme: स्वच्छ भारत मिशन को धरातल पर उतारने के दावों के बीच अररिया नगर परिषद की एक बड़ी सुस्ती उजागर हुई है. शहर को साफ-सुथरा बनाने के लिए करीब 25 लाख रुपये की लागत से खरीदी गईं हजारों डस्टबिनें (गीला और सूखा कचरा बाल्टी) जनता के घरों तक पहुंचने के बजाय महीनों से सम्राट अशोक भवन में बंद पड़ी धूल फांक रही हैं.

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अररिया से राहुल सिंह की रिपोर्ट

Waste Management Dustbin Scheme: अररिया नगर परिषद क्षेत्र में केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्वच्छ भारत मिशन’ योजना प्रशासनिक शिथिलता के कारण महज कागजों तक ही सिमट कर रह गई है. शहर को कचरा मुक्त बनाने और वैज्ञानिक तरीके से अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) के लिए लगभग 25 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि से खरीदी गईं हजारों गीला व सूखा कचरा डस्टबिनें महीनों से सम्राट अशोक भवन के कमरों में बंद हैं. डस्टबिनों के वितरण में हो रही अत्यधिक देरी के कारण एक तरफ जहां सरकारी राशि डंप पड़ी है, वहीं दूसरी तरफ पूरे शहर में जगह-जगह कचरे का अंबार लगा हुआ है. इस स्थिति को लेकर स्थानीय टैक्सपेयर्स (करदाताओं) में नगर परिषद प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष व्याप्त है.

योजना का लक्ष्य: हर घर को मिलनी थीं दो रंगीन बाल्टियां

स्वच्छता सर्वेक्षण के मानकों के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहर के प्रत्येक होल्डिंग धारक (गृहस्वामी) को जागरूक करना और कचरा पृथक्कीकरण (Source Segregation) को बढ़ावा देना था.

  • गीला और सूखा कचरा: प्रत्येक चिन्हित घर में नीले और हरे रंग की दो अलग-अलग बाल्टियां दी जानी थीं, ताकि नागरिक गीले व सूखे कचरे को शुरुआत में ही अलग रख सकें.
  • डोर-टू-डोर कलेक्शन: नगर परिषद के सफाई कर्मियों को प्रतिदिन सुबह गाड़ियों के साथ घर-घर पहुंचकर इस कचरे का सुरक्षित उठाव करना था और प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाना था.

परंतु, धरातल पर सच्चाई इसके ठीक उलट है. खरीदारी के कई महीने बीत जाने के बाद भी इन डस्टबिनों का समय पर वितरण नहीं किया जा सका, जिससे पूरी योजना अधर में लटकी हुई है.

मोहल्लों में नारकीय स्थिति, योजनाओं के क्रियान्वयन पर उठे सवाल

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर परिषद केवल नई-नई योजनाओं की घोषणा करने और सामग्रियां खरीदने में तत्परता दिखाती है, लेकिन उन्हें जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करने में पूरी तरह नाकाम साबित होती है. शहर के मुख्य वार्डों, गलियों और चौक-चौराहों पर नियमित सफाई नहीं होने के कारण हर तरफ गंदगी फैली है. लोगों का कहना है कि जब जनता के पैसों से डस्टबिन खरीदे जा चुके थे, तो उन्हें महीनों तक गोदाम में बंद रखने का क्या औचित्य है? इस सुस्त रवैये से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है.

प्रशासनिक पक्ष: 15 दिनों के भीतर वितरण पूरा करने का दावा

अधिकारियों का आश्वासन: मामले पर चौतरफा घिरने के बाद नगर परिषद के आला अधिकारियों ने सफाई पेश की है और जल्द ही स्थिति में सुधार का भरोसा दिलाया है.

  • स्वच्छता पदाधिकारी मो. अजहर ने बताया कि सभी होल्डिंग धारकों को गीला व सूखा कचरा बाल्टी देने की प्रशासनिक तैयारी पूरी कर ली गई है. वार्ड वार रोस्टर तैयार है और अगले 15 दिनों के भीतर शत-प्रतिशत घरों में इन बाल्टियों का वितरण सुनिश्चित करा दिया जाएगा. इसके साथ ही सफाई कर्मियों को नियमित रूप से घर-घर जाकर कचरा उठाने का कड़ा निर्देश जारी किया जा रहा है.
  • कार्यपालक अभियंता चंद्र प्रकाश राज ने बताया कि पूर्व में कुछ चिन्हित क्षेत्रों में बाल्टियों का वितरण किया जा चुका है. शेष बचे हुए होल्डिंग धारकों की सूची को अपडेट किया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द पारदर्शी तरीके से वितरण कार्य को संपन्न कराया जा सके.

हालांकि, अधिकारी के इन दावों पर स्थानीय जनता को भरोसा नहीं है. नागरिकों का कहना है कि ऐसे मौखिक आश्वासन पूर्व में भी कई बार दिए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी ‘शून्य’ ही बनी हुई है.

विशेषज्ञों की राय और नागरिकों की अंतिम मांग

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ठोस कचरा प्रबंधन के लिए कचरे को उद्गम स्थल (घरों) पर ही अलग करना सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है. इससे रिसाइक्लिंग आसान हो जाती है. अररिया में इस योजना के ठप होने से स्वच्छ भारत मिशन के मूल उद्देश्यों को झटका लगा है.

अररिया के आम नागरिकों ने जिला पदाधिकारी (डीएम) से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है ताकि गोदाम में बंद डस्टबिनों का अविलंब न्यायसंगत वितरण शुरू हो सके. लोगों ने साफ लहजे में कहा कि केवल कागजी खरीदारी से शहर सुंदर और स्वच्छ नहीं बनेगा, बल्कि इसके लिए योजनाओं का धरातल पर कड़ाई से लागू होना अनिवार्य है.

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लेखक के बारे में

By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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