एनीमिया व कुपोषण से लड़ने के लिए सरकारी योजनाओं में एफआरके युक्त चावल देना है अनिवार्य
एफआरके की अनुपलब्धता के कारण न उत्पादन हो पा रहा है न आपूर्ति, ब्याज के दलदल में फंस रहे पैक्स
भरगामा. विभागीय आश्वासन के एक सप्ताह बाद भी फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (एफआरके) की आपूर्ति नहीं हो सकी है. नतीजा यह कि भरगामा प्रखंड में संचालित दोनों राइस मिलों की मशीनें ठहर गयी हैं. चावल उत्पादन पूरी तरह प्रभावित हो गया है. एफआरके के बिना उत्पादन नियमों के अनुरूप नहीं हो पाने से मिल संचालकों ने काम बंद कर दिया है. इसका असर सिर्फ उद्योग तक सीमित नहीं, बल्कि पैक्स, किसानों व सरकारी आपूर्ति तंत्र तक फैलता दिख रहा है. पैक्स संघ अध्यक्ष सुरेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि धान अधिग्रहण के लिए विभागीय बैंक से ऋण लिया जाता है. उस पर लगभग 11 प्रतिशत ब्याज लगता है. नियमानुसार चावल तैयार कर जिला गोदाम में आपूर्ति होते ही भुगतान आता है. ब्याज की गणना रुकती है, लेकिन एफआरके की अनुपलब्धता के कारण न उत्पादन हो पा रहा है न आपूर्ति. फलस्वरूप पैक्स व मिल संचालक बढ़ते ब्याज के दबाव में फंसते जा रहे हैं. खुटहा बैजनाथपुर के पैक्स अध्यक्ष जयप्रकाश मेहता ने बताया कि यदि एफआरके की आपूर्ति तुरंत बहाल नहीं हुई, तो नुकसान गहरा जायेगा. इसका असर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) सहित आगामी सरकारी योजनाओं पर भी पड़ेगा. कहा कि स्टाॅक में रखे धान को अब चूहों ने बर्बाद करना शुरू कर दिया है. उन्होंने विभाग से अविलंब आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है.
क्या है एफआरके व क्यों जरूरी
एफआरके यानी फोर्टिफाइड राइस कर्नेल चावल के आटे में आयरन, फोलिक एसिड व विटामिन बी 12 जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाकर तैयार किया जाता है. इसे सामान्य चावल में लगभग 1:100 के अनुपात में मिलाया जाता है. स्वाद, रूप व पकने में चावल सामान्य रहता है. लेकिन पोषण स्तर कई गुना बढ़ जाता है. एनीमिया व कुपोषण से लड़ने के लिए सरकारी योजनाओं में एफआरके युक्त चावल देना अनिवार्य है.
कहते हैं प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी
जिलाधिकारी के साथ बैठक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया है. आश्वासन दिया गया है कि आगामी कुछ दिनों में समस्या का समाधान कर लिया जाएगा.
जय शंकर झा, बीसीओ भरगामाडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

