फारबिसगंज में सहयोग शिविर पर विपक्ष का सवाल, आयुष अग्रवाल बोले- खाली कुर्सियां बताती हैं जनता का भरोसा कम हुआ

Updated:
विज्ञापन

ई आयुष अग्रवाल,राजद नेता. | Prabhat Khabar Network

फारबिसगंज में आयोजित सहयोग शिविरों में जनता की कम उपस्थिति पर राजद नेता ई. आयुष अग्रवाल ने सवाल उठाए हैं.उनका कहना है कि खाली कुर्सियां जनता के घटते भरोसे का संकेत हैं, क्योंकि योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पा रहा है.

विज्ञापन

Araria News: फारबिसगंज नगर परिषद क्षेत्र में आयोजित सहयोग शिविर में अपेक्षाकृत कम जनभागीदारी को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है. राजद नेता ई. आयुष अग्रवाल ने शिविर में लोगों की कम उपस्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि खाली पड़ी कुर्सियां इस बात का संकेत हो सकती हैं कि आम लोगों का ऐसे शिविरों से भरोसा कम हो रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि शिविरों का वास्तविक लाभ आम नागरिकों तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंच पा रहा है.

उन्होंने कहा कि यदि सहयोग शिविरों का उद्देश्य लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है, तो उनमें व्यापक जनभागीदारी दिखाई देनी चाहिए. लेकिन फारबिसगंज में आयोजित शिविर में स्थिति इससे अलग नजर आई.

शिविर में अधिकारियों की मौजूदगी अधिक, जनता कम

ई. आयुष अग्रवाल ने कहा कि सहयोग शिविर में आम जनता की तुलना में नगर परिषद के पदाधिकारी और कर्मचारी अधिक दिखाई दिए.

उनके अनुसार ऐसी स्थिति दो संभावनाओं की ओर संकेत करती है- या तो क्षेत्र की अधिकांश समस्याओं का समाधान हो चुका है, या फिर लोगों का सहयोग शिविरों की उपयोगिता पर विश्वास कम हो गया है.

सरकारी कार्यालयों में भीड़, शिविर में सन्नाटा

राजद नेता ने कहा कि प्रखंड, अनुमंडल और अन्य सरकारी कार्यालयों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचते हैं.

उन्होंने कहा कि यदि जनसमस्याएं वास्तव में कम हुई होतीं, तो सरकारी कार्यालयों में इतनी भीड़ नहीं दिखाई देती. इससे स्पष्ट है कि समस्याएं मौजूद हैं, लेकिन लोग सहयोग शिविर को समाधान का प्रभावी माध्यम नहीं मान रहे हैं.

सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

ई. आयुष अग्रवाल ने इस स्थिति को सरकार की विफलता बताते हुए कहा कि प्रशासन और स्थानीय निकायों को यह समझना होगा कि लोग शिविरों तक क्यों नहीं पहुंच रहे.

उन्होंने कहा कि यदि लोगों को समयबद्ध और पारदर्शी समाधान मिलने का भरोसा होगा, तो ऐसे शिविरों में स्वतः अधिक भागीदारी देखने को मिलेगी.

Araria News: शिविरों की उपयोगिता बढ़ाने की जरूरत

उन्होंने कहा कि सहयोग शिविरों को केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए.

लोगों को योजनाओं, आवेदन प्रक्रिया, शिकायत निवारण और मौके पर समाधान जैसी सुविधाओं की स्पष्ट जानकारी और भरोसा दोनों मिलना चाहिए. तभी पंचायत और नगर स्तर पर आयोजित ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य सफल माना जा सकेगा.

Also Read: बांकीपुर में हार के बाद BJP में मंथन शुरू, CM सम्राट चौधरी अचानक पहुंचे प्रदेश कार्यालय, बंद कमरे में चल रही है बैठक

Also Read: मनोज तिवारी फ्रॉड आदमी हैं', विधायक बनने के बाद प्रशांत किशोर का चैलेंज- हिम्मत है तो भरत तिवारी के परिवार को न्याय दिलाकर दिखाएं


विज्ञापन
विपुल विश्वास

लेखक के बारे में

By विपुल विश्वास

विपुल विश्वास प्रिंट माध्यम में 20 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सिकटी (अररिया) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन