अररिया में नूना नदी का जलस्तर घटने से सिकटी में राहत, लेकिन गाद और बालू ने बर्बाद कर दी धान की फसल
जलस्तर में कमी के बाद दिखने लगा बर्बादी | Prabhat Khabar Network
सिकटी प्रखंड में नूना नदी का जलस्तर कम होने से लोगों को राहत मिली है. हालांकि, बाढ़ के पानी से खेतों में जमा हुई गाद और बालू ने धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है. वहीं, पशुपालकों के सामने चारे का गंभीर संकट खड़ा हो गया है.
Araria News: अररिया जिले के सिकटी प्रखंड में लगातार बारिश और नूना नदी के बढ़े जलस्तर से परेशान लोगों को बुधवार को कुछ राहत मिली. नेपाल के तराई क्षेत्र में मंगलवार से बारिश रुकने के बाद नूना नदी का जलस्तर कम होना शुरू हुआ, जिससे निचले इलाकों में पानी का दबाव घटा. हालांकि राहत के इस माहौल के बीच किसानों के सामने नई चिंता खड़ी हो गई है. बाढ़ का पानी उतरने के बाद खेतों में फैली गाद और बालू ने बड़ी मात्रा में धान की फसल को नुकसान पहुंचाया है, जबकि पशुपालकों के सामने चारे का संकट भी गहराता जा रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी कम होने से आवागमन और दैनिक जीवन में कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन खेती और पशुपालन पर पड़ा असर आने वाले महीनों तक महसूस किया जाएगा.
बारिश थमने से घटा नूना नदी का जलस्तर
नेपाल के तराई क्षेत्र में वर्षा रुकने का असर सिकटी प्रखंड में भी दिखाई दिया. नूना नदी का जलस्तर धीरे-धीरे कम होने लगा, जिससे नदी किनारे और निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने राहत की सांस ली.
पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण कई गांवों में बाढ़ का पानी फैल गया था और लोगों को खेतों, चारे और घरेलू सामान की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई थी.
गाद और बालू ने खेतों को पहुंचाया भारी नुकसान
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ के पानी के साथ बड़ी मात्रा में गाद और बालू खेतों में जमा हो गई है. विशेष रूप से निचले क्षेत्रों में स्थित धान के खेत सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं.
कालू चौक क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता सुजीत साह, सोएब आलम और नाजिम असगर सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि नूना नदी की धारा के साथ बहकर आई गाद और बालू ने धान की फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाया है. किसानों का कहना है कि पानी भले ही घट गया हो, लेकिन खेतों में जमा परत के कारण फसल को बचाना अब मुश्किल हो गया है.
पशुपालकों के सामने चारे का संकट
बाढ़ का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है. ग्रामीणों ने बताया कि निचले इलाकों में पशुओं के लिए जमा करके रखा गया सूखा चारा और घास भी पानी और मिट्टी से खराब हो गया है.
इस वजह से मवेशियों के भोजन की समस्या उत्पन्न हो गई है. कई पशुपालकों का कहना है कि यदि बरसात का यही सिलसिला आगे भी जारी रहा, तो उन्हें पशुओं के लिए वैकल्पिक चारे की व्यवस्था करनी पड़ेगी, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा.
किसानों की बढ़ी चिंता
सिकटी प्रखंड के किसान पहले ही अनिश्चित मौसम और बाढ़ की मार झेल रहे हैं. अब खेतों में गाद और बालू जम जाने से उनकी लागत और मेहनत दोनों पर असर पड़ा है.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते प्रभावित क्षेत्रों का आकलन कर राहत और कृषि सहायता की व्यवस्था करे, तो नुकसान की भरपाई में कुछ मदद मिल सकती है.
Araria News:आगे की स्थिति पर नजर
हालांकि नूना नदी का जलस्तर फिलहाल कम हो रहा है, लेकिन क्षेत्र के लोग अभी भी पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं. उनका कहना है कि यदि नेपाल के तराई क्षेत्र में फिर से तेज बारिश होती है, तो नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ सकता है.
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से बाढ़ प्रभावित किसानों और पशुपालकों के लिए राहत, चारा सहायता और फसल नुकसान के सर्वे की मांग की है, ताकि प्रभावित परिवारों को समय पर सहायता मिल सके.
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