अररिया में सड़कों पर उतरीं एएनएम: 3 माह से मानदेय न मिलने और फील्ड वर्क में बायोमेट्रिक हाजिरी के खिलाफ कलेक्ट्रेट घेरा

Updated:
विज्ञापन

प्रदर्शन करती एएनएम | Prabhat Khabar Network

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

3 महीने से मानदेय न मिलने और फील्ड ड्यूटी में बायोमेट्रिक हाजिरी की अनिवार्यता से नाराज सैकड़ों एएनएम ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया. आर्थिक संकट और अव्यवहारिक नियमों पर जताई नाराजगी.

विज्ञापन

जिले भर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली एएनएम (ऑग्जिलरी नर्स मिडवाइफ) कर्मियों का सब्र सोमवार को टूट गया. पिछले तीन महीनों से मानदेय का भुगतान न होने और फील्ड ड्यूटी के दौरान बायोमेट्रिक हाजिरी की अनिवार्यता से नाराज सैकड़ों एएनएम ने समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) परिसर का जोरदार घेराव किया.

विज्ञापन

हाथों में अपनी जायज मांगों से संबंधित तख्तियां और बैनर लिए स्वास्थ्य कर्मियों ने जिला प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की. प्रदर्शन के उपरांत एएनएम के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर अपनी समस्याओं से संबंधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा और अविलंब राहत की गुहार लगाई.

'पेट पर लात, फिर भी सेवाएं चालू': 3 महीने से वेतन न मिलने से आर्थिक संकट

प्रदर्शनकारी एएनएम कर्मियों ने दर्द बयां करते हुए कहा कि विगत तीन माह से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है, जिससे उनके परिवारों के समक्ष गहरा आर्थिक संकट और भुखमरी की नौबत आ गई है.

कर्मियों ने बताया कि इस गंभीर आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने सेवा दायित्वों में कोई कोताही नहीं बरती है. वे लगातार फील्ड में जाकर गैर-संचारी रोग (NCD) स्क्रीनिंग, अस्पतालों की ओपीडी ड्यूटी, नियमित टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य जांच और संस्थागत प्रसव से जुड़े तमाम जरूरी कार्यों का नियमित संपादन कर रही हैं.

Also Read: जमुई वायरल वीडियो पर उमेश कुशवाहा बोले- दोषी कितने भी बड़े हों, पुलिस के कब्जे में आएंगे, मंत्री सुनील कुमार ने कही ये बात

'पहले अस्पताल में हाजिरी, फिर कोसों दूर फील्ड': बायोमेट्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल

एएनएम कर्मियों ने वर्तमान बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली को फील्ड आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पूरी तरह अव्यावहारिक और दोषपूर्ण करार दिया. कर्मियों का कहना था कि उनका कार्य किसी एक अस्पताल या निश्चित चारदीवारी तक सीमित नहीं है.

उन्हें सुदूर ग्रामीण इलाकों, नदी-नालों से घिरे टोलों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचकर बच्चों व गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण करना होता है. ग्रामीण अंचलों में सार्वजनिक परिवहन की भारी किल्लत है, जिसके चलते कई कर्मियों को सुबह 7:00 बजे ही घरों से निकलना पड़ता है. ऐसे में पहले संबंधित स्वास्थ्य केंद्र जाकर अंगूठा लगाना और फिर वहां से कई किलोमीटर दूर दुर्गम गांवों में ड्यूटी करने जाना बेहद कष्टप्रद है, जिससे समय पर स्वास्थ्य सत्र आयोजित करने में भी बाधा उत्पन्न हो रही है.

काम के दबाव और तकनीकी बाध्यता के बीच फंसी स्वास्थ्य कर्मी

प्रदर्शन में शामिल एएनएम चुनमुन कुमारी, चुमकी कुमारी, मोनिका कुमारी, पूजा कुमारी, आभा देवी, मंजू कुमारी, अर्चना कुमारी और सुमन कुमारी ने एक सुर में कहा कि फील्ड आधारित कर्मियों को इस कठोर तकनीकी बाध्यता से व्यावहारिक छूट मिलनी चाहिए.

कर्मियों ने दो-टूक कहा कि आर्थिक परेशानी और बायोमेट्रिक उपस्थिति की दोहरी मार से स्वास्थ्य कर्मियों पर मानसिक दबाव अत्यधिक बढ़ गया है. उन्होंने मांग की कि तीन माह के लंबित मानदेय का एकमुश्त भुगतान तुरंत किया जाए और फील्ड आधारित कर्मियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए व्यावहारिक नियम तय किए जाएं.

जिलाधिकारी ने दिया त्वरित कार्रवाई का भरोसा

समाहरणालय में ज्ञापन प्राप्त करने के बाद जिलाधिकारी ने एएनएम के प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता की और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना.

डीएम ने स्वास्थ्य कर्मियों को आश्वस्त किया कि मानदेय भुगतान में आ रही तकनीकी व वित्तीय अड़चनों की समीक्षा कर शीघ्र ही लंबित वेतन जारी कराया जाएगा. वहीं फील्ड वर्क में बायोमेट्रिक उपस्थिति से जुड़ी व्यावहारिक परेशानियों के संबंध में जिलाधिकारी ने राज्य मुख्यालय और स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर समुचित मार्गदर्शन व समाधान का भरोसा दिलाया.

Also Read: बिहार में करम पूजा के दौरान हादसा : पोखर में नहाने गये 6 बच्चों की डूबकर मौत, एक को बचाने में सभी डूबे

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन