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मुख्य पार्षद के खिलाफ लाये गये अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला आज

Updated at : 25 Jun 2019 6:39 AM (IST)
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मुख्य पार्षद के खिलाफ लाये गये अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला आज

अररिया : अररिया नप के मुख्य पार्षद पर लाये गये अविश्वास पर फैसला मंगलवार को आयेगा. इस विशेष बैठक को लेकर प्रशासनिक तैयारी लगभग पूरी कर ली गयी है. निष्पक्ष व शांतिपूर्ण तरीके से बैठक कराने को लेकर नप कार्यालय परिसर को किलाबंद कर दिया गया है. नप कार्यालय परिसर के 200 मीटर के दायरे […]

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अररिया : अररिया नप के मुख्य पार्षद पर लाये गये अविश्वास पर फैसला मंगलवार को आयेगा. इस विशेष बैठक को लेकर प्रशासनिक तैयारी लगभग पूरी कर ली गयी है. निष्पक्ष व शांतिपूर्ण तरीके से बैठक कराने को लेकर नप कार्यालय परिसर को किलाबंद कर दिया गया है.

नप कार्यालय परिसर के 200 मीटर के दायरे में धारा 144 लागू कर दिया गया है. चुनाव प्रेक्षक के रूप में डीआरडीए निदेशक अनील कुमार झा की प्रतिनियुक्ति जिला प्रशासन के तरफ से की गयी है. जबकि पर्याप्त मात्रा में पुलिस पदाधिकारी व पुलिस बलों की प्रतिनियुक्ति की गयी है. बैठक की कार्यवाही 11.15 बजे शुरू की जायेगी. जानकारी अनुसार बैठक की अध्यक्षता उप मुख्य पार्षद अफसाना प्रवीण करेंगी.
सबसे पहले बैठक में मुख्य पार्षद रीतेश कुमार राय पर लगाये गये आरोपों पर चर्चा की जायेगी. जिसका जबाव मुख्य पार्षद या फिर उनके पक्ष के पार्षद रखेंगे. इसके बाद गुप्त मतदान के जरिए अविश्वास पर फैसला आयेगा. एक पार्षद के बीमार रहने की वजह से नप प्रशासन के द्वारा विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए चिकित्सीय टीम की भी मांग की गयी है.
विशेष चर्चा अवधि के दौरान पार्षद व पदाधिकारी के अलावा अन्य का प्रवेश वर्जित रहेगा. मत पत्र की तैयारी भी पूरी कर ली गयी है. दो कॉलम बनाये गये हैं. जिसमें क, में अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में व ख, में अविश्वास प्रस्ताव के विपक्ष में क्रास मार्क के जरिए चिह्न लगाये जाने हैं. चिह्न लगाये जाने के लिए एक विशेष पेन भी नप प्रशासन के द्वारा ही उपलब्ध कराया जायेगा.
रीतेश की बचेगी कुर्सी या फिर अविश्वास होगा पारित, आज संशय होगा खत्म
वर्ष 2007 के बाद से ही नप बोर्ड पर अविश्वास का ग्रहण लगा व पारित भी हुआ. लगातार उप मुख्य पार्षद अफसाना प्रवीण अपने पद से ऊपर आकर मुख्य पार्षद बनने में कामयाब हुई हैं. इस बार भी 10 जून को लाये गये अविश्वास प्रस्ताव में उनके पक्ष के पार्षद ही हावी रहे हैं. इसलिए इस बार यह देखना दिलचस्प होगा कि रीतेश कुमार राय विक्षुब्ध पार्षदों को विश्वास में लेने के लिए कितना हद तक सफल हो पाये हैं.
अविश्वास लगाये जाने के बाद से ही पार्षद इस तपिश भरी गर्मी से दूर सैर सपाटे में लगे हुए हैं. इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगा कि किस पक्ष का पलड़ा कितना भारी रहेगा. 2007 से ही हुए अविश्वास के खेल पर गौर किया जाए तो वर्ष 2007 में चुने गये अररिया नप की मुख्य पार्षद अंजनी जयसवाल को दो वर्ष पूरे होते ही वर्ष 2009 में अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी.
2014 की तत्कालीन मुख्य पार्षद स्वीटीदास गुप्ता के भी दो वर्ष के कार्यकाल पूरे होते ही अविश्वास का सामना करना पड़ा था, उन्हें भी कुर्सी से हाथ धोना पड़ा था. दोनों ही को कुर्सी से हटाने में अफसाना प्रवीण कामयाब हुई थी. उनके पीछे उनके पति इम्तियाज आलम की सक्रियता चर्चा में रही है.
2017 में 22 पार्षदों का मत पाकर मुख्य पार्षद रीतेश कुमार राय निर्विरोध मुख्य पार्षद निर्वाचित हुए थे. रीतेश के साथ इस बार इम्तियाज का विरोधी खेमा सक्रिय रहा है. इसलिए जीत हार का फैसला अब गुप्त मतदान की प्रक्रिया पर ही आधारित है. दोनों ही खेमा अपनी जीत की गारेंटी दे रहा है. इससे एक बात जो साफ दिख रही है कि किस खेमे में क्रास वोटिंग किसके पक्ष में जाता है. बहरहाल इन सभी अटकलों पर मंगलवार को विराम जरूर लग जायेगा.
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