अररिया : 2018 में 888 नवजातों ने मां की कोख में ही तोड़ दिया दम
Updated at : 27 Feb 2019 7:11 AM (IST)
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हेमंत कुमार हीरा, अररिया : जिले में पौषाहार चलाने के लिए हजारों की संख्या में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं. यही नहीं स्वास्थ्य विभाग भी गर्भवती महिलाओं की देखरेख के लिए कई दावे करती है. स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं के समुचित देखभाल के लिए कई योजना चलाती है. लेकिन हकीकत जो आंकड़ों की जुबानी बोल रही […]
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हेमंत कुमार हीरा, अररिया : जिले में पौषाहार चलाने के लिए हजारों की संख्या में आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं. यही नहीं स्वास्थ्य विभाग भी गर्भवती महिलाओं की देखरेख के लिए कई दावे करती है. स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं के समुचित देखभाल के लिए कई योजना चलाती है. लेकिन हकीकत जो आंकड़ों की जुबानी बोल रही है वह यह कि स्वास्थ विभाग नवजात की मौत की संख्या को कम करने में विफल साबित हो रहा है.
वर्ष 2018 में जिले में कुल 888 नवजात ऐसे जन्म लिये जिनकी मृत्यु मां की कोख में ही हो चुकी थी. ऐसा में यह सवाल उठना लाजिमी है कि स्वास्थ्य विभाग की ऐसी योजनाएं या फिर आइसीडीएस की वे योजनाएं जो मातृत्व लाभ के तहत दी जाती है जो कि महिला के गर्भ धारण के साथ हो शुरू हो जाती है.
उनका क्या हो रहा है. पूरी तरह से ख्याल रखने का दावा कहां तक कारगर हो रहा है. आशा का कार्य कहां तक पूर्ण हो रहा है. बहरहाल माना तो यही जायेगा कि कागजों पर कुछ और व धरातल पर कुछ और ही होता है. यह आंकड़ा यह भी है कि सदर अस्पताल में सिर्फ 281 नवजातों ने मां के कोख में ही दम तोड़ा है. ऐसे में सुरक्षित प्रशव कराने के दावों की हकीकत खुद आंकड़े ही बोल रही हैं.ं
साल गुजरे लेकिन आंकड़ों में नहीं हुआ सुधार
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी अनुसार बीते वर्ष कुल 365 दिन में 888 नवजात ऐसे पैदा हुए जिकनी मौत हो चुकी थी. जबकि 2017 में भी लगभग यही आकंड़ा देखा गया था. स्वास्थ्य विभाग दावा करती है कि स्वस्थ्य प्रशव हो लेकिन नवजात मरा हुआ पैदा ना ले. बावजूद इसके लिए स्वास्थ्य विभाग काफी सक्रिय है. लेकिन आंकड़ा स्वास्थ विभाग के दावे को झूठा साबित कर रहा है.
जब हों गर्भवती, तो रखें इन बातों का ध्यान
चिकित्सकों के मुताबिक नवजात की होने वाली मौत की कई कारण हो सकते हैं. इसमें गर्भवती माताओं का ससमय देखभाल ना होना. गर्भवती महिलाओं में इंफेक्शन होना. प्री- टर्म प्रसव. प्रसव के पहले व प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव होना. गर्भवती महिलाओं का हाई ब्लड प्रेशर व ब्लड शुगर का शिकार होना.
धुर्मपान व नशेली पदार्थ का सेवन करना. दवा का गलत इस्तेमाल करना मुख्य कारण हो सकता है. इसके अलावा मोटापा होना. एक्लेंपसिया और प्री एक्लेंपसिमा की बीमारी होने से भी प्रसव के बाद नवजात की मौत हो सकती है. इसके बाद हरी सब्जी, फल, दूध आदि का सेवन परचूर मात्रा में करनी चाहिए. जिससे मां व बच्चे पूर्णरूपेण स्वस्थ्य रह सकते हैं.
गर्भवती महिलाओं को समय-समय पर लेना चाहिए चिकित्सीय सलाह
सदर अस्पताल के चिकित्सकों के मुताबिक किसी भी गर्भवती महिलाओं को गर्भधारण करने के समय से ही पूरी देखभाल की जरूरत है.
इसके लिए गर्भधारण करने वाली महिलाओं को नियमित चिकित्सीय सलाह लेनी भी चाहिए. इसके साथ ही गर्भवती माताओं को धू्र्मपान नहीं करना चाहिए. मोटापा कम करना चाहिए. पौष्टिक आहार लेना चाहिए. गलत दवाओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
गर्भवती महिला खायें प्रतिदिन आयरन की गोली: अधीक्षक
इस संबंध में पूछे जाने पर सदर अस्पताल के अधीक्षक डॉ आरएन सिंह ने बताया कि गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए सदर अस्पताल में अलग वार्ड बनाया गया है. गर्भवती महिलाओं का गर्भ धारण करने के बाद उसे नि:शुल्क दवा दी जाती है. सदर अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को आयरन की दवा देनी चाहिए. जो कि सदर अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है.
कहते हैं डीपीएम
इस मामले में डीपीएम रेहान अशरफ ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग गर्भवती माताओं के लिए काफी सक्रिय हैं. इसके लिए जो भी महिला गर्भ धारण करती है. उस समय से ही स्वास्थ्य विभाग उसका ध्यान रखने का काम करती है.
इसके साथ ही गांव के हर क्षेत्र में आशा के द्वारा समय उसका जांच समुचित दवा दी जाए. इसके लिए उन्हें लगाया गया है. जहां तक नवजात की मौत की बात है यह पहले के मुकाबले कम हुआ है.
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