सीमांचल पिछड़ा है पर यहां के लोग प्रतिभा के धनी हैं : अशफाक करीम

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अभिभावक उर्दू भाषा में दिलायें बच्चों को बुनियादी शिक्षा सांसद सरफराज आलम व अशफाक करीम का हुआ स्वागत रोजमर्रा के जीवन में उर्दू का करें इस्तेमाल अररिया : सोमवार को टॉउन हॉल में उर्दू भाषा के विकास को लेकर आयोजित सेमिनार के दौरान अतिथि वक्ताओं ने कहा कि भाषा के विकास के लिए जरूरी है […]

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अभिभावक उर्दू भाषा में दिलायें बच्चों को बुनियादी शिक्षा

सांसद सरफराज आलम व अशफाक करीम का हुआ स्वागत
रोजमर्रा के जीवन में उर्दू का करें इस्तेमाल
अररिया : सोमवार को टॉउन हॉल में उर्दू भाषा के विकास को लेकर आयोजित सेमिनार के दौरान अतिथि वक्ताओं ने कहा कि भाषा के विकास के लिए जरूरी है कि अभिभावक अपने बच्चों को बुनियादी शिक्षा मातृभाषा में दिलायें. उर्दू के विकास के लिए जरूरी है कि लोग रोजमर्रा के जीवन में इसका इस्तेमाल करें. केवल हुकूमतों के रहमों करम पर किसी भी भाषा का विकास नहीं हो सकता है. सेमिनार को आयोजन दारूल कुरआन एजूकेशनल व वेलफेयर ट्रस्ट, डूबा ने बिहार उर्दू एकेडमी के सहयोग से किया था.
अध्यक्षता आयोजक संस्था के अध्यक्ष व पत्रकार डा अब्दुल कादिर शम्स ने की. जबकि संचालन कवि रत्न हारून रशीद गाफिल व कारी नियाज अहमद ने किया. कार्यक्रम के दौरान दोनों सांसद अहमद अशफाक करीम व सरफराज आलम के साथ साथ साथ किशनगंज के पूर्व विधायक अखतरूल ईमान व मशहूर शायर जुबैरूल हसन गाफिल को आयोजक संस्था की ओर से सम्मानित भी किया गया. इस मौके पर अपनी बात रखते हुए पटना से आये एक उर्दू दैनिक के ब्युरो चीफ अजफर फरीदी ने कहा कि उर्दू किसी किसी धर्म, बिरादरी व जात की जबान न होते हुए भी उर्दू जिंदा है. उर्दू बोलने व समझने वालों की तादाद बहुत अधिक है. अलग अलग भाषाओं के हजारों शब्द इस में हैं. उर्दू भाषा के विकास के लिए जरूरी है कि उर्दू भाषी लोग रोजमर्रा के जीवन में इसका इस्तेमाल करें. पांचवीं कक्षा तक बच्चों को उर्दू में शिक्षा दिलायें.
उर्दू की सेवा में कभी पीछे नहीं रहा सीमांचल
उर्दू में बुनियादी तालीम की वकालत करते हुए सेवानिवृत्त एडीजे जुबैरूल हसन गाफिल ने शाह किफायतुल्लाह की विद्याधर व अन्य साहित्यकारों की रचनाओं का हवाला देते हुए कहा कि सीमांचल उर्दू की सेवा में कभी पीछे नहीं रहा है. उन्होंने कहा कि बुनियादी तालीम के लिए जरूरी है कि मकतबों की पुरानी परंपरा को फिर से शुरू किया जाये. लोग उर्दू अखबार व पत्रिका खरीदें. जबकि पूर्व विधायक अखतरूल ईमान ने सेमिनार के आयोजन व अन्य कल्याणकारी कामों को अंजाम देने के लिए संस्था की सराहना करते हुए कहा कि उर्दू के विकास के लिए अवाम के स्तर से प्रयास जरूरी है. इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंनेकहा कि उर्दू व हिंदी जुड़वां बहनें हैं.
दोनों की साथ साथ तरक्की जरूरी है. उर्दू केवल भाषा नहीं एक तहजीबी व संस्कृति का नाम भी है. मातृभाषा में बुनिादी शिक्षा की जरूरत पर बल देते हुए उन्होंने महात्मा गांधी के कथन का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह बच्चे के शारीरिक विकास के लिए मां की दूघ की अहमियत है. वैसे की बौद्धिक विकास के लिए मातृ भाषा अहम है. वहीं सर सैयद अहमद खान के हवाले से कहा कि वो कौम आगे नहीं बढ़ सकती जिजो अपने बच्चों को मातृ भाषा में शिक्षा नहीं दे सकती.
वहीं सेमिनार के दौरान अपने विचार रखते हुए प्रो रकीब अहमद, एमए मुजीबी, मुफती इनामुल बारी, सरवर आलम नदवी, हाजी अब्दुल गफफार व अब्दुल गनी लबीब ने भी उर्दू में बुनियादी शिक्षा की जरूरत पर बल दिया. साथ ही सरकार से स्कूलों में आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी की. अतिथियों का स्वागत ट्रस्ट के अब्दुल वाहिद रहमानी व हाजी तसलीम अहमद ने किया.
24 घंटे सेवा के लिए रहूंगा हाजिर: सरफराज आलम
सोमवार को टॉउन हॉल में आयोजित सेमिनार के दौरान नव निर्वाचित राज्यसभा सांसद व कटिहार मेडिकल कॉलेज के संस्थापक अहमद अशफाक करीम ने कहा कि सीमांच भले ही विकास के मामले में पिछड़ा हो. पर सीमांचल वासियों में सलाहियत की कमी नहीं हैं. देश के विभिन्न हिस्सों में ही नहीं विदेशों में भी सीमांचल के लोग अपना मुकाम बन चुके हैं. उर्दू के विषय पर उन्होंने कहा कि उर्दू भाषा भारत में ही नहीं पूरी दुनियां में बोली जाती है. भारत में केवल मुसलमान की उर्दू से नहीं जुड़े हैं,
बल्कि पंजाब, हरियाणा व अन्य प्रदेशों से भी अन्य धर्म के लोगों के संरक्षण में उर्दू पत्र पत्रिकाएं निकल रही हैं. उर्दू लशकरी जबान है. इसमें लोच है. तरन्नुम है. लोगों से उर्दू पत्र पत्रिकाएं खरीदने व बच्चों को उर्दू में बुनियादी शिक्षा दिलाने का आहवान करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को भी आवश्यक सहयोग करना चाहिए. बहालियां होनी चाहिए. वहीं लोकसभा सांसद सरफराज आलम ने इस अवसर पर अपनी जीत के लिए जिले वासियों का आभार जताते हुए पहली बार लोकसभा पहुंचने के अनुभव को भी साझा किया.
अपने स्वर्गीय सांसद पिता तसलीमुद्दीन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न दलों के लोकसभा सदस्यों से मिल कर उन्हें एक बार फिर महसूस हुआ कि उनके का कितना सम्मान राजनेता करते थे. इसी अवसर पर उन्होंने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं को लेकर वो आखिरी सांस तक लड़ाई लड़ते रहेंगे. 24 घंटा सेवा के लिए हाजिर रहेंगे.
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