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अररिया-परसरमा एनएच होगी 105 किमी लंबी, भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी, छह जिलों के लोगों को होगी सुविधा

Updated at : 13 Jun 2023 1:01 AM (IST)
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अररिया-परसरमा एनएच होगी 105 किमी लंबी, भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी, छह जिलों के लोगों को होगी सुविधा

अररिया-परसरमा सड़क के फोरलेन हो जाने से राज्य के छह जिले सुपौल, मधेपुरा, अररिया, मधुबनी, दरभंगा और सहरसा के लोगों को बंगाल और नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में आने-जाने में लगभग 80 किमी की बचत होगी.

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अररिया- जदिया- सुपौल- परसरमा एनएच- 327 ई अभी राष्ट्रीय उच्च पथ के टू लेन मानक पर बना हुआ है. इसे फोरलेन ग्रीनफील्ड हाइवे में बदला जा रहा है. बिहार में अररिया- जदिया- सुपौल- परसरमा एनएच-327 इ ग्रीनफील्ड हाइवे को करीब 105 किमी लंबाई में फोरलेन बनाया जायेगा. इसके लिए अब जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना जारी कर दी गयी है. इस मुख्य सड़क से सुपौल और त्रिवेणीगंज को भी कनेक्टिविटी मिल जायेगी. मुख्य सड़क की चौड़ीकरण के लिए एनएचएआइ ने राज्य सरकार से जमीन अधिग्रहण के लिए मदद मांगी है.

छह जिले के लोगों को होगी सुविधा

अररिया-परसरमा सड़क के फोरलेन हो जाने से राज्य के छह जिले सुपौल, मधेपुरा, अररिया, मधुबनी, दरभंगा और सहरसा के लोगों को बंगाल और नॉर्थ-ईस्ट राज्यों में आने-जाने में लगभग 80 किमी की बचत होगी. इससे इन जिलों के लोगों के समय की भी काफी बचत होगी. जिन जिलों के तालुका में जमीन अधिग्रहण की जायेगी उनमें सहरसा जिले में सत्तरकटैया, सुपौल जिले में छातापुर, किशनपुर, सुपौल, पिपरा, त्रिवेणीगंज, अररिया जिले में भरगामा, रानीगंज और अररिया अंचल शामिल हैं.

मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने नितिन गडकरी को भेजा था प्रस्ताव

इससे पहले अररिया- परसरमा सड़क की चौड़ीकरण के लिए ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने पत्र लिखकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को प्रस्ताव भेजा था. उनके पत्र पर पिछले साल ही सड़क को फोरलेन करने की मंजूरी मंत्रालय से मिल गई थी. साथ ही डीपीआर बनाने की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी. अब इस सड़क का अलाइनमेंट तय हो गया है. इस मुख्य सड़क से सुपौल की कनेक्टिविटी के लिए 1.7 किमी की एक सड़क बनाई जायेगी. साथ ही त्रिवेणीगंज की कनेक्टिविटी के लिए 3.45 किमी की एक सड़क बनाई जायेगी.

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ईस्ट- वेस्ट- कॉरिडोर का विकल्प होगी यह सड़क

इस सड़क का महत्व इस बात से भी है कि यह विभिन्न व्यापारिक गतिविधियों जैसे बांस, मखाना, मक्का, चावल आदि अनाज की ढुलाई तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से ईस्ट- वेस्ट- कॉरिडोर का विकल्प है. यह सड़क अभी राष्ट्रीय उच्च पथ के टू लेन मानक पर बना हुआ है. भविष्य में इस पर यातायात का भारी दबाव बढ़ने की संभावना है.

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