भागलपुर में लाखों रुपये खर्च कर अमृत सरोवर का हुआ था निर्माण, अब बना गया है कूड़ेदान

Updated at : 21 Apr 2023 2:06 AM (IST)
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भागलपुर में लाखों रुपये खर्च कर अमृत सरोवर का हुआ था निर्माण, अब बना गया है कूड़ेदान

मनरेगा योजना से लाखों रुपये खर्च कर अमृत सरोवर का निर्माण गोपालपुर प्रखंड के लत्तीपाकर गांव के समीप किया गया है. अधिकारियों की निगरानी नहीं होने से यह सरोवर दिसंबर आते-आते ही सूख गया और इसमें एक बूंद पानी नहीं है.

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भागलपुर. मनरेगा योजना से लाखों रुपये खर्च कर अमृत सरोवर का निर्माण गोपालपुर प्रखंड के लत्तीपाकर गांव के समीप किया गया है, लेकिन मनरेगा के अधिकारियों ने यहां सरोवर निर्माण कार्य पूरा होने की बात कह रहे हैं, लेकिन यहां सरोवर के जीर्णोद्धार की खानापूर्ति की गयी है. सरोवर की खुदाई से लेकर लंबाई व चौड़ाई तक में मनरेगा के अधिकारियों की निगरानी नहीं होने से यह सरोवर दिसंबर आते-आते ही सूख गया और इसमें एक बूंद पानी नहीं है. यह सरोवर मात्र कूड़ेदान बन कर रह गया है. सरोवर के अलग बगल में कुछ पेड़ पौधा अवश्य है, लेकिन मनरेगा के तहत कुछ भी वहां नहीं लगाया गया है. बता दें कि सरोवर निर्माण का कार्य पिछले वर्ष जून में शुरू हुआ था. इसे पांच माह में पूरा कर लिया गया. लंबाई-चौड़ाई मानक के अनुकूल नहीं है. इसमें 10,000 एमक्यू पानी जमा करने की क्षमता है.

लाखों की लागत से बना है सरोवर

लत्तीपाकर गांव के समीप अमृत सरोवर (पोखर) का निर्माण मनरेगा से वित्त वर्ष 2022-23 के तहत हुआ है. सरोवर के निर्माण की प्राक्कलित राशि लगभग आठ लाख 77 हजार रुपये है. इस योजना में खर्च चार लाख 51 हजार रुपये ही खर्च हो पाया है. अमृत सरोवर से लत्तीपाकर, मकंदपुर, मालपुर सहित कई गांव के लोगों को फायदा होता, लेकिन अमृत सरोवर में दिसंबर होते-होते पानी सूख गया, जिससे यह बंजर और बेकार पड़ा है.

क्या है लक्ष्य

आजादी के अमृत महोत्सव पर सरकार ने अमृत सरोवर के रूप में गांव व पंचायत स्तर पर इसे आजादी के अमृत महोत्सवकरने का प्रयास किया है. सरकार का लक्ष्य जल स्रोत स्थापित करना है, जिससे माल मवेशी व स्थानीय ग्रामीणों को इस अमृत सरोवर से फायदा मिले. यहां बारिश के कुछ माह तक पानी रहता है. पुन: धीरे-धीरे सूखने लगता है.

बलुआयी मिट्टी होने से यहां पानी टिकता: कार्यक्रम पदाधिकारी

वहीं प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि सरोवर का निर्माण हुआ है, लेकिन बलुआयी मिट्टी होने से यहां पानी टिक नहीं पा रहा है. थोड़ी गर्मी बढ़ते ही दिसंबर से ही अमृत सरोवर सूखने लगा. प्रखंड में मात्र एक अमृत सरोवर का निर्माण कराया गया है. एक की जगह दो इंट्री करने से यहां दो अमृत सरोवर का निर्माण बताया जा रहा है.

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