बिहार में मंदिर, मस्जिद से किया जायेगा ठनका काे लेकर अलर्ट, ठनका गिरने से 30 मिनट पहले दी जाएगी जानकारी

Updated at : 26 Jul 2022 12:10 PM (IST)
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बिहार में मंदिर, मस्जिद से किया जायेगा ठनका काे लेकर अलर्ट, ठनका गिरने से 30 मिनट पहले दी जाएगी जानकारी

Thunderclap in Bihar: प्राधिकरण के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र में मरने वाले लोगों में ऐसे लोग होते हैं, जो खेतों में काम करते रहते हैं या फिर बाहर. इन लोगों के पास उस वक्त मोबाइल नहीं होता है और वह वज्रपात की चपेट में आ जाते हैं.

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पटना. राज्य में वज्रपात से लोगों की जान बचाने के लिए अब मंदिर-मस्जिद और लाउडस्पीकर से लोगों को अलर्ट किया जायेगा. इसको लेकर बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने पूरे राज्य में काम शुरू कर दिया है. प्राधिकरण के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र में मरने वाले लोगों में ऐसे लोग होते हैं, जो खेतों में काम करते रहते हैं या फिर बाहर. इन लोगों के पास उस वक्त मोबाइल नहीं होता है और वह वज्रपात की चपेट में आ जाते हैं. ऐसे लोगों को ठनका गिरने से 30 मिनट पूर्व जागरूक करने के लिए जन जागरण चलाया जायेगा.

लाउड स्पीकर से होगी अलर्ट करने में सहूलियत

ग्रामीण इलाके में मौसम खराब होगा.उस इलाके के मंदिरों की घंटियों को लगातारबजा कर, मस्जिद से साउंड सिस्टम या फिर लगातार लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जायेगा, ताकि खेतों में काम करने वाले लोग अलर्ट हो जायें. जहां भी लोग रहें, वह भी रास्ते में कहीं सुरक्षित स्थान पर शरण ले लेंगे.

इंद्रवज्र एप का भी होगा प्रचार-प्रसार

आपदा प्रबंधन विभाग ने इंद्रवज्र एप बनाया है, जिसके माध्यम से लोगों को ठनका गिरने से 30 मिनट पूर्व जानकारी मिल जाती है. इस एप को हर लोग डाउनलोड करें. इसके लिए प्रचार-प्रसारकिया जायेगा. इसमें मौसम खराब होने के बाद अलर्ट सिस्टम भी है. साथ ही कई जानकारियां मिल जाती हैं. इसी एप के माध्यम से गांव-गांव में लोगों को जागरूक किया जायेगा.

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ताड़ के पेड़ खत्म हो गये इस वजह से भी परेशानी

अधिकारियों के मुताबिक पूर्व में गांव में सभी जगहों परबड़े- बड़े ताड़ का पेड़ होता था. अब सभी जगहों पर पेड़ कट गये हैं. इससे लोगों का बचाव होता था. गांव के लोग टायर का एक चप्पल बना कर खेतों में काम करने जाते थे, लेकिन हाल के दिनों में यह भी परंपरा खत्म हो गयी है. इससे भी वज्रपात से लोगों की मौत बढ़ी है. प्राधिकरण के माध्यम से जानकारी में कहा गया कि गांव में जन जनजागरण ही बचाव एक मजबूत विकल्प है.

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